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Budget 2026 : नए बजट से क्या उम्मीद कर सकता है देश का मिडिल क्लास? (Image : Pixabay)
Budget 2026 Expectations : बजट की चर्चा होते ही देश के मिडिल क्लास के मन में सबसे पहले इनकम टैक्स का मसला उभरता है. मन में कहीं ये उम्मीद करवटें बदलने लगती है कि क्या इस बार उनकी कमाई का पहले से कुछ ज्यादा हिस्सा टैक्स की मार से बचकर घर तक पहुंच पाएगा? बढ़ती महंगाई, रोजमर्रा के खर्च और मेडिकल बिल्स के बोझ में दबे मध्य वर्ग के लिए सबसे बड़ी उम्मीद यही होती है कि क्या पता इस बार का बजट उन्हें टैक्स में कुछ और राहत दिला दे. 2025 में पेश बजट (Budget 2025) में सरकारने न्यू टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर जीरो टैक्स का इंतजाम करके बरसों बाद उनकी इन उम्मीदों को काफी हद तक पूरा किया . और अब नजरें फरवरी 2026 में आने वाले अगले बजट पर टिकी हैं. सवाल ये है कि क्या सरकार इस बार भी मिडिल क्लास को थोड़ी और राहत दे सकती है? क्या न्यू टैक्स रिजीम के स्लैब को कुछ और उदार बनाया जा सकता है?
न्यू टैक्स रिजीम से और क्या हैं उम्मीदें
न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में मैक्सिमम 30% टैक्स का स्लैब फिलहाल 24 लाख रुपये से शुरू होता है. लेकिन मिडिल क्लास की चाहत है कि इस मैक्सिमम स्लैब का दायरा बढ़ाया जाए. ऐसा होने से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी कमाई भले ही बढ़ी हो, लेकिन खर्च भी उतनी ही तेजी से बढ़े हैं. अगर ऐसा हुआ तो उनके हाथ में ज्यादा पैसे आएंगे, जिससे बचत और निवेश की क्षमता मजबूत होगी.
टैक्स स्लैब पर उद्योग संगठन का प्रस्ताव
उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसमें कहा गया है कि 0 से 30 लाख रुपये तक 20% टैक्स लिया जाए, जबकि 30 से 50 लाख रुपये तक 25% और 50 लाख रुपये से ऊपर 30% टैक्स स्लैब लागू हो. टैक्स स्ट्रक्चर में ऐसे बदलाव हुए तो मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिलेगी.
बेसिक एग्जम्पशन और 87A रिबेट
मिडिल क्लास की एक और अहम मांग है कि बेसिक एग्जम्पशन लिमिट और बढ़ाई जाए. इसके साथ ही सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली रिबेट को भी और ऊपर ले जाने की जरूरत बताई जा रही है. इन दोनों में बढ़ोतरी होने पर लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ेगी. खासकर सैलरी पर निर्भर लोगों के लिए यह कदम बहुत फायदेमंद हो सकता है.
हेल्थ पर होने वाले खर्च में मिले ज्यादा राहत
मेडिकल इलाज पर होने वाला खर्च बेहिसाब तेजी से आगे बढ़ा है. इसके चलते सेक्शन 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा पर मिलने वाली छूट अक्सर असली खर्च के मुकाबले काफी कम पड़ जाती है. इसी वजह से मिडिल क्लास यह उम्मीद कर रहा है कि इस बजट में इस लिमिट को बढ़ाया जाए, ताकि मेडिकल कवरेज लेना आसान हो सके. अस्पतालों का खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में टैक्स में ज्यादा राहत मिलती है तो यह बड़ी मदद होगी.
घर की EMI पर भी मिले और टैक्स छूट
मिडिल क्लास की जेब पर सबसे बड़ा बोझ अक्सर घर की ईएमआई (Home Loan EMI) और मेडिकल खर्च का होता है. इसी कारण लोग चाहते हैं कि ओल्ड टैक्स रिजीम में होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाई जाए. साथ ही अपनी जेब से होने वाले मेडिकल खर्च पर भी और ज्यादा राहत मिले.
टैक्स सिस्टम को और सरल बनाने की जरूरत
बहुत से लोगों को लगता है कि टैक्स के बोझ को कम करने के साथ ही साथ टैक्स भरने की प्रॉसेस को भी आसान बनाना जरूरी है. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले बजट में टैक्स कानूनों को कुछ और सरल किया जाएगा. रियल-टाइम रिफंड डैशबोर्ड और आसान डिडक्शंस की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं. लोग चाहते हैं कि टैक्स भरना, रिफंड पाना और पूरे सिस्टम को समझना आसान हो जाए.
क्या ओल्ड टैक्स रिजीम का होगा अंत?
कई एक्सपर्ट मानते हैं कि आने वाले समय में देश सिंगल टैक्स रिजीम की तरफ बढ़ सकता है. न्यू रिजीम में टैक्स-फ्री इनकम का दायरा बढ़ने से ओल्ड टैक्स रिजीम में बने रहने वालों की संख्या तेजी से घटने के आसार हैं. ऐसे में लोगों को लग रहा है कि सरकार अगले केंद्रीय बजट (Union Budget) में सिंगल टैक्स सिस्टम की तरफ कदम आगे बढ़ा सकती है. हालांकि ऐसा होने पर ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) की कुछ खूबियों को नए सिस्टम में भी शामिल करने की उम्मीद भी की जा सकती है.
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