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CEA on Falling Rupee : रुपये में गिरावट से क्यों नहीं उड़ी सरकार की नींद? चीफ इकनॉमिक एडवाइजर ने बताई वजह

CEA on Falling Rupee : रुपया पहली बार 90 से नीचे चला गया लेकिन सरकार इस गिरावट से ज्यादा परेशान नहीं है. ऐसा क्यों है, इसकी वजह चीफ इकनॉमिक एडवाइजर ने बताई है.

CEA on Falling Rupee : रुपया पहली बार 90 से नीचे चला गया लेकिन सरकार इस गिरावट से ज्यादा परेशान नहीं है. ऐसा क्यों है, इसकी वजह चीफ इकनॉमिक एडवाइजर ने बताई है.

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FE Hindi Desk
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Chief Economic Adviser explains why falling rupee is not a concern for the government

CEA on Rupee Fall : चीफ इकनॉमिक एडवाइजर नागेश्वरन ने कहा है कि रुपये में गिरावट से सरकार की नींद खराब नहीं हो रही है. (File Photo : Reuters)

Govt not losing sleep over falling rupee against dollar, expects improvement next year : रुपया बुधवार को पहली बार 90 के स्तर से नीचे फिसल गया और 90.21 पर बंद हुआ. इस गिरावट से बाजार में भले ही चिंता हो, लेकिन इस गिरावट से सरकार की नींद खराब नहीं हो रही है. यानी सरकार इसे लेकर बहुत ज्यादा परेशान नहीं है. चीफ इकनॉमिक एडवाइजर (Chief Economic Adviser) वी. अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) का कहना है कि रुपये की कमजोरी फिलहाल न तो महंगाई बढ़ा रही है और न ही निर्यात (Export) पर कोई निगेटिव असर डाल रही है.

रुपये की गिरावट से क्यों नहीं उड़ी नींद

पीटीआई के मुताबिक सीआईआई (CII) के एक कार्यक्रम के दौरान CEA नागेश्वरन ने साफ कहा, “रुपये में गिरावट (Falling Rupee Value) को लेकर हमारी रातों की नींद नहीं खराब हो रही है.” यानी सरकार इस गिरावट को किसी बड़े संकट की तरह नहीं देख रही. उन्होंने बताया कि रुपये की कमजोरी से फिलहाल महंगाई नहीं बढ़ रही है और निर्यात में भी इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है. हालांकि उन्होंने माना कि इससे आयात यानी इंपोर्ट (Import) महंगा होना स्वाभाविक है, जिससे जेम्स-एंड-ज्वेलरी, पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स पर दबाव पड़ सकता है. लेकिन अभी यह दबाव इतना बड़ा नहीं है कि अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाए.

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अगले साल सुधार की उम्मीद क्यों

CEA नागेश्वरन ने उम्मीद जताई कि डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति (Rupee Vs Us Dollar) अगले साल बेहतर हो सकती है. उन्होंने कहा कि 2025 में रुपये ने करीब 5% की गिरावट जरूर दर्ज की है, लेकिन आने वाले महीनों में कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू फैक्टर्स इसमें सुधार ला सकते हैं. विदेशी फंड्स की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों और भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी जैसे कारणों से रुपये पर दबाव बढ़ा है. साथ ही बाजार में यह भी चर्चा है कि आरबीआई की ओर से रुपये को रोकने के लिए कोई बड़ा दखल नहीं दिया जा रहा है. लेकिन CEA को भरोसा है कि यह स्थिति लंबे समय तक रहने वाली नहीं है. 

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FDI में बड़ा उछाल, क्यों बढ़ा सरकार का आत्मविश्वास

CEA नागेश्वरन ने विदेशी निवेश (FDI) को लेकर भी पॉजिटिव रुख जाहिर किया. उन्होंने कहा, “इस साल हम 100 बिलियन डॉलर के FDI को पार कर सकते हैं.” चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में कुल FDI बढ़कर 50 बिलियन डॉलर हो गया है, जो पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है. उन्होंने बताया कि 2024-25 में भी ग्रॉस FDI में 14% की बढ़ोतरी हुई थी.

नागेश्वरन का कहना है कि 2014 के बाद FDI में लगातार ग्रोथ हुई, लेकिन कोरोना और जियो-पोलिटिकल टेंशन के कारण कंपनियों ने स्थानीय उत्पादन पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया. कई देशों ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग वापस अपने इलाकों में शिफ्ट कर ली, जिससे भारत जैसे देशों में निवेश की रफ्तार कुछ कम हुई. CEA ने कहा, “हम जानते हैं कि हमें और मेहनत करनी है.” उन्होंने भरोसा जताया कि टैक्स सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी मजबूत करके भारत FDI को और बढ़ा सकता है.

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रुपये पर दबाव, लेकिन अर्थव्यवस्था मजबूत

हालांकि रुपये के लगातार कमजोर होने से चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है. बढ़ते FDI, महंगाई दर (Inflation) के काबू में रहने और मजबूत सर्विस सेक्टर ग्रोथ से संकेत मिलता है कि रुपये की कमजोरी फिलहाल किसी बड़े संकट में तब्दील नहीं होने वाली है. बल्कि उम्मीद ये है कि अगले साल की शुरुआत से रुपये की हालत सुधरनी शुरू हो जाएगी.

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