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विदेशी मुद्रा के बढ़ते चार्जेस के बीच क्रेडिट कार्ड कई ऐसी सुविधाएं देता है जो कैश और फॉरेक्स कार्ड से काफी बेहतर हैं. (AI Image : ChatGPT)
Credit Card or Cash Abroad: विदेश यात्रा पर जाने वालों की सबसे बड़ी चिंता होती है कि खर्च कैसे संभालेंगे. कितना कैश ले जाएं, फॉरेक्स कार्ड लें या डेबिट कार्ड इस्तेमाल करें. इन सब विकल्पों में आज भी सबसे आसान, सुरक्षित और समझदारी भरा तरीका क्रेडिट कार्ड माना जा रहा है. विदेशी मुद्रा के बढ़ते चार्जेस के बीच क्रेडिट कार्ड कई ऐसी सुविधाएं देता है जो कैश और फॉरेक्स कार्ड से काफी बेहतर हैं. चाहे सुरक्षा हो, खर्च का रिकॉर्ड हो या एक्सचेंज रेट का फायदा, क्रेडिट कार्ड अधिक उपयोगी साबित होता है.
क्या विदेश में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना है बेहतर?
विदेश में रोजमर्रा के खर्च जैसे खाना, यात्रा और खरीदारी क्रेडिट कार्ड से करना न सिर्फ आसान है बल्कि फायदे भी देता है.
- पहला, खर्च का पूरा हिसाब मिलता है. हर महीने आने वाला स्टेटमेंट बता देता है कि पैसा कहां और कितना खर्च हुआ, जबकि कैश में यह संभव नहीं होता.
- दूसरा, उस दिन का एक्सचेंज रेट मिलता है. कैश बदलवाने या फॉरेक्स कार्ड लोड करने पर जो रेट मिलता है वह तय रहता है, जबकि क्रेडिट कार्ड पर लेनदेन वाले दिन का रेट लागू होता है.
- तीसरा, रिफंड और सुरक्षा का बड़ा फायदा मिलता है. विदेश से खरीदा सामान खराब निकल जाए या सर्विस ठीक न लगे तो रिफंड सीधे कार्ड पर वापस मिल जाता है. अगर व्यापारी रिफंड देने से मना करे तो कार्डधारक लेनदेन पर आपत्ति दर्ज कर बैंक से पैसे वापस पा सकता है.
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विदेश में कार्ड इस्तेमाल के जोखिम और उनकी सुरक्षा
विदेश में कार्ड स्किमिंग का खतरा हमेशा रहता है, लेकिन अब कार्ड चिप आधारित हो गए हैं जिससे जोखिम काफी कम हुआ है. भारत में ऑनलाइन भुगतान पर ओटीपी वाला टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी है, जो धोखाधड़ी रोकता है. कई बैंक अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर तुरंत कॉल या संदेश भेजकर पुष्टि करते हैं.
फॉरेक्स चार्जेज पहले ज्यादा थे, अब हुए हैं कम
पहले विदेशी ट्रांजैक्शन पर करीब 3.5 फीसदी तक फीस लगती थी, लेकिन अब कई प्रीमियम कार्ड कम शुल्क लेते हैं. HDFC Infinia और Axis Olympus कार्ड पर 2 फीसदी तक फारेक्स चार्ज और लागू जीएसटी देने पड़ते हैं. जबकि RBL World Safari, Scapia और IDFC Mayura जैसे कार्ड पर फॉरेक्स चार्ज नहीं देने पड़ते. हालांकि American Express Platinum Metal पर आज भी 3.5 फीसदी तक, लेकिन विदेश में खर्च पर 3 गुना रिवार्ड मिलता है
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डायनेमिक करेंसी कन्वर्जन से हमेशा बचें
विदेश में कार्ड स्वाइप करते समय दो विकल्प आते हैं, स्थानीय मुद्रा में भुगतान या रुपये में भुगतान. रुपये वाला विकल्प आसान लगता है लेकिन नुकसान कराता है. इससे आठ प्रतिशत तक ज्यादा राशि भरनी पड़ सकती है और कई बैंक एक प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ देते हैं. कई कार्ड कंपनियां ऐसे लेनदेन पर रिवार्ड भी नहीं देतीं. इसलिए भुगतान हमेशा स्थानीय मुद्रा जैसे डॉलर, यूरो या येन में ही करें.
कुछ देशों में कैश की जरूरत भी पड़ती है
कुछ देशों में कार्ड नहीं चलते या अधिक शुल्क लगता है. वहां ऐसी बैंक सेवाएं उपयोगी होती हैं जिनमें विदेशों के एटीएम से कैश निकालने पर शुल्क नहीं लगता, जैसे IndusInd Bank. अगर यात्रा के बाद कैश बच जाए तो होटल में बिल चुकाने में काम आता है. लेकिन एयरपोर्ट पर करेंसी कभी न बदलवाएं क्योंकि वहां रेट सबसे महंगे होते हैं. कैश बदलने के लिए BookMyForex जैसी सेवाएं बेहतर होती हैं.
फॉरेक्स कार्ड कब होते हैं बेहतर
- ऑफिस की विदेश यात्राओं में
- लंबे समय के लिए विदेश में रहने पर
- जब ज्यादा रकम सुरक्षित रखनी हो
फॉरेक्स कार्ड लेते समय दो बातें जरूरी हैं, पहला नाम वाला कार्ड लें ताकि पहचान में दिक्कत न हो और दूसरा अपने बैंक से कार्ड लें ताकि भारत लौटकर फॉरेक्स आसानी से रुपये में बदल सकें.
( नोट: क्रेडिट कार्ड से जुड़ा यह आर्टिकल सिर्फ आपकी जानकारी के लिए है. अलग-अलग बैंकों व वित्तीय सस्थाओं के विभिन्न कार्ड कार्ड स्कीम में समय-समय पर बदलते रहते हैं. जिसमें विदेशी इस्तेमाल से जुड़ी शर्तें भी शामिल हो सकती है. ऐसे में किसी भी विकल्प पर आगे बढ़ने से पहले समान फील्ड के एक्सपर्ट या जानकार से सलाह जरूर हासिल कर लें. )
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