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भले ही वितरक-नेतृत्व वाले चैनल अभी भी प्रमुख हैं, लेकिन DIY डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ने के साथ डायरेक्ट प्लान धीरे-धीरे लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं. (Photo source: Canva)
भारत में म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) का निवेश साल 2035 तक 315 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. Bain & Company और Groww की नई रिपोर्ट के अनुसार इसके पीछे मुख्य कारण घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, मजबूत नियामकीय समर्थन और निवेशकों का भरोसा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तेजी से बढ़ता निवेश म्यूचुअल फंड उद्योग के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देता है.
अध्ययन के अनुसार, अगले दशक में मेट्रो और टियर-1 शहरों में मास और मास-अफ्लुएंट सेगमेंट से लगभग 2.5 करोड़ नए म्यूचुअल फंड परिवार जुड़ने की संभावना है, जो डिजिटल एडॉप्शन की बढ़ती प्रवृत्ति से प्रेरित हैं. इसके अलावा, टियर-2 और टियर-3 शहरों से लगभग 50 लाख नए परिवार जुड़ने की उम्मीद है, जहां पहुंच बढ़ाने के लिए ‘फिजिटल’ (ऑनलाइन और ऑफलाइन का मिश्रण) मॉडल की आवश्यकता होगी.
शीर्ष शहरों से आगे भी वृद्धि देखने को मिलेगी
White Oak Capital के सीईओ आशीष सोमैया ने कहा, “अगले कुछ वर्षों में म्यूचुअल फंड में घरेलू हिस्सेदारी दोगुनी होने वाली है, जिसका मुख्य कारण शीर्ष-30 शहरों के बाहर विस्तार है. निवेशक आधार बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत और जुड़ावपूर्ण तरीके का संतुलित इस्तेमाल करना जरूरी होगा.”
रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष 30 शहरों में म्यूचुअल फंड की बढ़ोतरी मुख्य रूप से डिजिटल सेवाओं के ज्यादा इस्तेमाल, छोटे निवेशकों के लिए सस्ते SIP विकल्प, F&O ट्रेडर्स को म्यूचुअल फंड में लाने के प्रयास, और सीधे पैसिव फंड के बढ़ते इस्तेमाल से होगी, जिन्हें चुनने में कम प्रयास लगता है. बाकी 70 शहरों में यह विस्तार डिजिटल प्लेटफॉर्म के आसान और समझने में सरल इंटरफेस और लक्ष्य-आधारित निवेश टूल्स की मदद से होगा.
रिपोर्ट में बताया गया है कि B30 (शीर्ष-30 के बाहर) शहरों में 55% निवेशक 40 साल से कम उम्र के हैं. इन शहरों में RIA (Registered Investment Advisor) की पहुंच भी बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि नए SIP रजिस्ट्रेशन का आधा हिस्सा RIAs के माध्यम से होगा. रिटायरमेंट-फोकस्ड म्यूचुअल फंड योजनाओं पर अतिरिक्त कर लाभ मिलने से निवेश तेजी से बढ़ सकता है.
पिछले पांच वर्षों में फोलियो की संख्या 2.5 गुना बढ़ गई है, लेकिन व्यक्तिगत निवेश (gross flows) केवल 7% बढ़ा है. इसका कारण नए निवेशकों का आना है, जिनका निवेश छोटा होता है. FY25 में औसत SIP योगदान 3,000 रुपये रहा, जबकि FY15 में यह 3,200 रुपये था.
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AMFI का प्रयास निवेशकों के भरोसे को मजबूत करता है
Groww में एसेट मैनेजमेंट के प्रमुख वरुण गुप्ता ने कहा, “AMFI ने अपनी ‘म्यूच्यूअल फंड्स सही है’ कैंपेन के जरिए म्यूचुअल फंड को इस हद तक सफलतापूर्वक लोकप्रिय बनाया है कि यह निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन गया है. यह मंदी के समय में भी पसंदीदा निवेश का माध्यम बना रहता है.”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भले ही डिस्ट्रीब्यूटर-लेड चैनल अभी भी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन DIY डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ने के साथ डायरेक्ट प्लान धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहे हैं. सोमैया ने कहा, “डायरेक्ट प्लान की मांग लगातार बढ़ रही है, यहां तक कि प्राइवेट बैंकर्स और HNI वेल्थ मैनेजर्स भी इसमें निवेश कर रहे हैं. फिर भी, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय वितरक और MFDs म्यूचुअल फंड की पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे.”
इक्विटी म्यूचुअल फंड का AUM वित्त वर्ष 2035 तक लगभग 250 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. इसके पीछे मुख्य कारण डिजिटल जुड़ाव में बढ़ोतरी, निवेशक व्यवहार में बदलाव और मजबूत बाजार प्रदर्शन हैं.
IPEF की चेयरपर्सन मोनिका हलन ने कहा, “नियामकों और बाजार के प्रतिभागियों ने एक सुरक्षित और पारदर्शी बाजार तैयार किया है. अब असली अवसर यह है कि भरोसे और बाजार प्रदर्शन का फायदा उठाकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि आम भारतीय अल्पकालिक सट्टेबाजी की बजाय लंबी अवधि के निवेश को चुनें.”
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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