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Digital Payments Increase Overspending : UPI और कार्ड के ज्यादा इस्तेमाल से बिगड़ सकता है बजट, सही प्लानिंग से कंट्रोल में रहेगा खर्च. (Image : Pixabay)
How to Control Overspending Due to Digital Payment Methods : आजकल ज्यादातर पेमेंट UPI, डिजिटल वॉलेट या क्रेडिट और डेबिट कार्ड के जरिये होने लगे हैं. सारा पेमेंट बिना वॉलेट निकाले चुटकियों में हो जाता है. लेकिन क्या कभी सोचा है कि इसी आसानी की वजह से आपका मंथली बजट हाथ से फिसल तो नहीं रहा? कई बार डिजिटल पेमेंट की आसानी, हमारे खर्च को कंट्रोल करने के रास्ते की सबसे बड़ी मुश्किल बन जाती है.
कैश के बिना महसूस नहीं होता खर्च का 'दर्द'
जब हम कैश देते हैं, तो पैसों को हाथ से जाते देखकर थोड़ा दर्द होता है. लेकिन कार्ड स्वाइप करने या फोन टैप करने पर यही एहसास गायब हो जाता है. दिमाग को लगता है कि खर्च तो हो गया, पर बोझ नहीं लगा. इसी वजह से बहुत सारी छोटी-मोटी चीजें बिना सोचे-समझे खरीद ली जाती हैं. एक कॉफी, अचानक से ऑनलाइन ऑर्डर… और महीने के अंत में समझ आता है कि जेब खाली कैसे हो गई!
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डिजिटल पेमेंट के कारण बजट बिगड़ने के संकेत
अगर आपको अपने रोजमर्रा के खर्चों में ये संकेत दिखें, तो समझ जाइए कि डिजिटल पेमेंट की वजह से बजट बिगड़ रहा है :
अगर आपको अक्सर लगे कि:
खर्च कहां हुआ समझ ही नहीं आता
मंथली बजट बार-बार ओवर यानी हद से बाहर हो जाता है
UPI या कार्ड से पेमेंट करते समय जरूरत से ज्यादा खरीदारी हो जाती है
बिना जरूरत लग्जरी या फैंसी आइटम खरीद लेते हैं
आपको लगता है कंट्रोल में हैं, लेकिन बैंक बैलेंस कुछ और कहानी सुनाता है
अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है, तो ये साफ संकेत है कि “कैशलैस इफेक्ट” ने आपकी जेब पर कब्जा कर लिया है. लेकिन अगर आप थोड़ी समझदारी से काम लें तो इस परेशानी को दूर कर सकते हैं. आइए जानते हैं इसके लिए आपको क्या करना होगा.
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ऐसे मैनेज करें महीने के खर्च
अपने महीनेभर के पैसों को अलग-अलग हिस्सों में बांटें जैसे बिल, किराना, ट्रांसपोर्ट और एंटरटेनमेंट. चाहें तो डिजिटल वॉलेट में अलग-अलग पॉट्स (pots) या हिस्से सेट कर सकते हैं. इससे हर कैटेगरी में कितने पैसे खर्च हुआ, तुरंत पता चलता रहेगा.
इसके साथ ही, सेविंग्स को ऑटोमेट कर दें. मतलब सैलरी आते ही कुछ पैसे अलग हो जाएं. यानी बचत पहले, खर्च बाद में. ये स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग का एक जरूर सबक है.
टेक्नॉलजी को सही ढंग से इस्तेमाल करें
डिजिटल वॉलेट या बजटिंग ऐप्स आपको रियल टाइम में बताते हैं कि कितना पैसा कहां खर्च हो गया. इनमें आप ऐसी लिमिट भी सेट कर सकते हैं, जिससे महीने में खर्च की सीमा पार होते ही अलर्ट मिलने लगे. इससे बेवजह के खर्च पर लगाम कसने में काफी मदद मिल सकती है.
शॉपिंग के लिए क्लिक करने से पहले ब्रेक लगाएं
अक्सर बोरियत या स्ट्रेस में लोग ऑनलाइन कुछ न कुछ खरीदने लगते हैं. इसलिए एक रूल बना लें. जरूरी नहीं है तो कोई भी खरीदारी 24 घंटे तक रुकने के बाद ही करें. One-click checkout बंद करें. यह छोटी ट्रिक आपकी गैर-जरूरी इंपल्सिव खरीदारी को काफी हद तक काबू में रख सकती है.
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डिजिटल पेमेंट गलत नहीं, लेकिन समझदारी है जरूरी
पहले अपनी इनकम और फिक्स्ड खर्च नोट कर लें, फिर बाकी पैसों को स्मार्ट तरीके से बांटें. टेक, प्लानिंग और थोड़ा कंट्रोल - इन तीन चीजों को मिलाकर चलेंगे, तो आप डिजिटल पेमेंट की सुविधा का लाभ भी ले पाएंगे और आपका मंथली बजट भी नहीं बिगड़ेगा.
अगली बार पेमेंट के लिए QR कोड स्कैन करने से पहले एक बार सोच लें - ये खर्च सही है या बस एक इमोशनल स्वाइप?
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