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ETF vs index fund India : सितंबर 2021 से सितंबर 2025 तक, भारत में ETFs और इंडेक्स फंड्स का AUM तेजी से बढ़ा. (AI Image)
How EPFO Is Driving Massive Growth in ETFs and Index Funds : भारत का म्यूचुअल फंड मार्केट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. निवेशकों की पसंद अब तेजी से पैसिव इन्वेस्टिंग, यानी ETFs और इंडेक्स फंड की ओर शिफ्ट हो रही है. सितंबर 2025 तक पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 17.1% हो चुकी है, जबकि FY20 में यह सिर्फ 7% थी. तेजी से बढ़ते इनफ्लो, कम लागत, डिजिटल प्लेटफॉर्म की आसान पहुंच और संस्थानों की बढ़ती दिलचस्पी ने पैसिव फंड्स को भारतीय निवेश जगत का नया ग्रोथ इंजन बना दिया है.
ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि EPFO जैसे बड़े संस्थान इस ट्रेंड को मजबूती दे रहे हैं. मार्च 2024 तक EPFO ने अपने फंड का लगभग 10% ETFs में लगाया था. सितंबर 2025 तक, कॉरपोरेट निवेशकों की ETF, Index AUM में लगभग 86%, 37% हिस्सेदारी और HNI की लगभग 12%, 39% हिस्सेदारी रही.
यह ग्रोथ बताती है कि भारत का निवेशक अब कम लागत और स्थिर रिटर्न वाले विकल्पों को ज्यादा महत्व दे रहा है. इस ट्रेंड का फायदा कुछ म्यूचुअल फंड कंपनियों, आरटीए और वेल्थ सेग्मेंट में काम करने वाली कंपनियों को आगे मिलेगा. मोतीलाल ओसवाल ने अपनी टॉप पिक्स में Nippon AMC, ABSL AMC , CAMS और Nuvama Wealth को शामिल किया है.
पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी अभी भी कम
भारत में पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी अभी भी कम है, सितंबर 2025 में कुल AUM का सिर्फ लगभग 17.1%. विकसित देशों की तुलना में यह काफी कम है. जैसे-जैसे निवेशकों की समझ बढ़ेगी, डिजिटल अपनाने में तेजी आएगी और संस्थानों की भागीदारी बढ़ेगी, इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की बहुत गुंजाइश है.
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EPFO जैसे बड़े संस्थान इस ट्रेंड को मजबूती दे रहे हैं. मार्च 2024 तक EPFO ने अपने फंड का लगभग 10% ETFs में लगाया था. सितंबर 2025 तक, कॉरपोरेट निवेशकों की ETF, Index AUM में लगभग 86%, 37% हिस्सेदारी और HNI की लगभग 12%, 39% हिस्सेदारी रही.
रिटेल निवेशक अभी भी इस पजल का गायब हिस्सा हैं. सितंबर 2025 तक ETFs, Index AUM में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 3%, 23% है. इसकी वजह है कम कमीशन और जागरूकता की कमी. हालांकि, डिजिटल प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे इस दूरी को कम कर रहे हैं.
AUM ग्रोथ : पैसिव फंड में एक्टिव फंड से तेज
सितंबर 2021 से सितंबर 2025 तक, भारत में ETFs और इंडेक्स फंड्स का AUM तेजी से बढ़ा. ETFs में 28% CAGR और इंडेक्स फंड्स 81% CAGR से. यह कुल इक्विटी स्कीम्स (28% CAGR) से भी ज्यादा है. इसकी मुख्य वजह लगातार और मजबूत नेट इनफ्लो रहे.
FY25 में पैसिव फंड्स में आने वाला पैसा डबल से भी ज्यादा बढ़ा, लगभग 118% YoY (जबकि कुल इक्विटी में 64% था). इसमें इंडेक्स फंड्स के इनफ्लो में 278% की जबरदस्त उछाल और ETFs में 59% की ग्रोथ शामिल है. यह निवेशकों के बढ़ते इंटरेस्ट और नए फंड लॉन्च की वजह से संभव हुआ. FY25 पैसिव प्रोडक्ट्स में लगातार चौथे साल पॉजिटिव मंथली इनफ्लो का साल भी रहा.
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पैसिव फंड्स की कुल म्यूचुअल फंड AUM में हिस्सेदारी भी बढ़ी है. मार्च 2020 में यह लगभग 7% थी, जो सितंबर 2025 में बढ़कर लगभग 17.1% हो गई. यह बढ़त निवेशकों की बढ़ती जागरूकता, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, बेहतर लिक्विडिटी और कम लागत की वजह से आई है.
रिटेल निवेशकों की भागीदारी अभी भी कम
सितंबर 2025 तक ETF AUM का ज्यादातर हिस्सा कॉरपोरेट्स के पास है (लगभग 86%), उसके बाद HNIs का लगभग 12% और रिटेल निवेशकों का सिर्फ लगभग 3% हिस्सा है. इंडेक्स फंड AUM का डिस्ट्रीब्यूशन थोड़ा बैलेंस है, HNIs लगभग 39%, कॉरपोरेट्स 37% और रिटेल निवेशक 23%.
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रिटेल निवेशकों की भागीदारी अभी भी कम है. सितंबर 2025 तक लगभग 73% रिटेल निवेश अभी भी डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए ही आते हैं. ETFs पर बहुत कम कमीशन मिलता है, जबकि एक्टिव फंड्स पर ज्यादा मिलता है. इसी वजह से डिस्ट्रीब्यूटर्स ETFs को ज्यादा प्रोत्साहित नहीं करते, जिससे रिटेल अपनाने की रफ्तार धीमी रहती है.
(नोट : यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है. यह निवेश की सलाह नहीं है. किसी भी फंड का एसेट्स भविष्य में कम या ज्यादा हो सता है. बाजार में जोखिम होते हैं, इसलिए निवेश के पहले एक्सपर्ट की सलाह लें.)
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