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EPS minimum pension hike : मिनिमम पेंशन 7500 रुपये करने की मांग पर संसद में सरकार ने दिया जवाब. (Image : Freepik)
Employees’ Pension Scheme Minimum Pension Hike : एंप्लाईज पेंशन स्कीम यानी EPS के तहत मिलने वाली मिनिमम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये करने की मांग पिछले कई सालों से उठ रही है. बुजुर्ग पेंशनर्स का कहना है कि महंगाई के इस दौर में 1000 रुपये में गुजारा नामुमकिन है. इसी मुद्दे पर संसद में सरकार से फिर सवाल पूछा गया तो सरकार ने अपना पक्ष रखा. आइए जानते हैं कि इस मसले पर सरकार ने क्या कहा और पेंशनर्स की मांग अब कहां अटकी हुई है.
संसद में क्यों उठा EPS पेंशन बढ़ाने का सवाल
संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) के दौरान 15 दिसंबर को लोकसभा में सांसद राजेश रंजन ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से सवाल किया कि EPS-95 के तहत मिनिमम पेंशन 7500 रुपये क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को पूरी तरह लागू करने में देरी क्यों हो रही है. यह सवाल ऐसे समय आया जब देशभर में करीब 78 लाख EPS पेंशनर्स लगातार आर्थिक तंगी की बात कह रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग दोहरा रहे हैं.
EPS पेंशनर्स क्या मांग कर रहे हैं
EPS-95 के पेंशनर्स सिर्फ पेंशन बढ़ाने की बात नहीं कर रहे हैं. उनकी मांग है कि मिनिमम मंथली पेंशन (EPS Pension) 7500 रुपये की जाए, परिवार पेंशन की व्यवस्था हो, महंगाई भत्ता यानी DA मिले और बुजुर्गों के लिए मुफ्त मेडिकल सुविधाएं दी जाएं. संसद में उठे सवाल में भी यह साफ किया गया कि बहुत बड़ी संख्या में पेंशनर्स बुढ़ापे में आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं.
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अभी कितनी मिलती है EPS की मिनिमम पेंशन
सरकार ने अपने जवाब में बताया कि फिलहाल EPS-95 के तहत मिनिमम मंथली पेंशन 1000 रुपये प्रति माह है. यह रकम साल 2014 में तय की गई थी. उस वक्त केंद्र सरकार ने बजट से अतिरिक्त पैसा देकर यह पक्का किया था कि किसी भी पेंशनर को 1000 रुपये से कम पेंशन न मिले. इसके बाद से अब तक इस मिनिमम पेंशन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ती रही है. EPS पेंशन महंगाई से जुड़ी हुई नहीं है और इसमें DA भी नहीं मिलता.
EPS स्कीम का पैसा आता कहां से है
श्रम मंत्रालय ने EPS की फंडिंग को लेकर भी स्थिति साफ की. मंत्रालय के मुताबिक EPS-95 एक “डिफाइंड कंट्रीब्यूशन-डिफाइंड बेनिफिट” (defined contribution–defined benefit) सोशल सिक्योरिटी स्कीम है. मंत्रालय ने अपने लिखित जवाब में कहा, “एंप्लाईज पेंशन फंड (Employees’ Pension Fund) का कॉर्पस दो हिस्सों से बनता है. पहला, एम्प्लॉयर की तरफ से वेतन का 8.33 फीसदी योगदान और दूसरा, केंद्र सरकार की तरफ से बजट सपोर्ट के रूप में वेतन का 1.16 फीसदी योगदान, जो 15,000 रुपये प्रतिमाह की सैलरी की सीमा तक होता है. स्कीम के तहत सभी पेंशन लाभ इसी जमा रकम से दिए जाते हैं.”
आसान शब्दों में कहें तो EPS का पैसा किसी एक बड़े फंड से नहीं, बल्कि रेगुलर कंट्रीब्यूशन और सरकारी मदद से चलता है.
एक्चुरियल डेफिसिट बना सबसे बड़ी रुकावट
सरकार ने पेंशन बढ़ाने में देरी की सबसे बड़ी वजह “एक्चुरियल डेफिसिट” (Actuarial Deficit) को बताया. मंत्रालय ने कहा, “EPS 1995 के पैराग्राफ 32 के तहत हर साल फंड का मूल्यांकन किया जाता है और 31 मार्च 2019 तक के मूल्यांकन में फंड में एक्चुरियल घाटा पाया गया है.”
आसान भाषा में इसका मतलब यह है कि ईपीएस के तहत जितनी पेंशन देनी होगी, उसके मुकाबले फंड में पैसा कम है. इसी वजह से सरकार का कहना है कि पेंशन को एक झटके में 7500 रुपये तक बढ़ाना या महंगाई से जोड़ना फिलहाल मुश्किल है. सरकार ने यह भी बताया कि 1000 रुपये की मिनिमम पेंशन देने के लिए वह पहले से ही हर साल अतिरिक्त बजट सपोर्ट दे रही है.
DA से जुड़ी पेंशन क्यों नहीं मानी गई
महंगाई भत्ता देने के मुद्दे पर सरकार ने हाई एम्पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी यानी HEMC की रिपोर्ट का हवाला दिया. मंत्रालय के अनुसार, इस कमेटी ने EPS-95 में DA जोड़ने या पेंशन को कॉस्ट ऑफ लिविंग इंडेक्स से जोड़ने की संभावना की जांच की थी. कमेटी इस नतीजे पर पहुंची कि फंड की मौजूदा आर्थिक हालत को देखते हुए ऐसा इंतजाम करना संभव नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आगे क्या हुआ
संसद में यह सवाल भी उठा कि ज्यादा सैलरी के आधार पर पेंशन तय करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का क्या हुआ. सरकार ने बताया कि EPFO ने नवंबर 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए कदम उठाए हैं.
सरकार के अनुसार जॉइंट ऑप्शन के वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन सुविधा दी गई थी. 11 जुलाई 2023 तक 17.49 लाख आवेदन आए, जिनमें से 15.24 लाख आवेदन 31 जनवरी 2025 तक एंप्लॉयर्स द्वारा EPFO को भेजे जा चुके हैं. मंत्रालय ने संसद को बताया कि 24 नवंबर 2025 तक EPFO को मिले करीब 99 फीसदी आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है.
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पेंशन बढ़ाने की टाइमलाइन अब भी नहीं
सरकार ने अपने जवाब में आर्थिक दिक्कतों की जानकारी तो दी, लेकिन EPS की मिनिमम पेंशन 7500 रुपये करने को लेकर कोई समयसीमा नहीं बताई. DA और मेडिकल सुविधाओं पर भी कोई ठोस ऐलान नहीं हुआ.
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