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e-Jagriti भारत सरकार का ऐसा सिस्टम है जो पूरे देश के उपभोक्ता कोर्ट यानी कंज्यूमर कमीशन को कंप्यूटर और ऑनलाइन नेटवर्क से जोड़ता है, ताकि लोगों की शिकायतें जल्दी और आसानी से निपट सकें. (Image: X/@jagograhakjago)
e-Jagriti Portal for consumers: क्या आप भी किसी ऑनलाइन कोर्स में फंसकर पैसा गंवा चुके हैं? क्या आपके घर का ब्रांडेड फ्रीज सालों से परेशान कर रहा है और कंपनी सुन नहीं रही? या फिर नया इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदकर रोजमर्रा की कमाई पर असर पड़ रहा है क्योंकि मशीन बार-बार बंद हो जाती है? यदि हां, तो आपके लिए सरकार का ई-जागृति डिजिटल कंज्यूमर कंप्लेन पोर्टल (e-Jagriti Portal) बेहद मददगार बन सकता है.
ई-जागृति वही प्लेटफॉर्म है, जहां ग्राहक बिना कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाए ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं. सरकार ने हाल ही में इस पोर्टल पर आई शिकायतों और उन पर हुई त्वरित कार्रवाई की कुछ सफलता की कहानियां भी साझा की हैं. इन्हें देखकर समझ आता है कि यदि आपको किसी सामान या सेवा को लेकर ठगा हुआ महसूस हो रहा है, तो ऐसे मामलों में ई-जागृति पोर्टल आपके लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है.
देश के अलग-अलग हिस्सों की ये सक्सेज स्टोरी
ऑनलाइन कोर्स घोटाले से जुड़ा मामला
असम के रहने वाले एक पेरेंट्स ने अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन क्लासेस खरीदीं. कोर्स की क्वालिटी खराब निकली, एड टेक कंपनी ने कहा कि कैंसिल भी करेंगे तो कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा. लेकिन कुछ ही दिनों में 54,987 रुपये की ऑटो-डेबिट कटौती हो गई. पेरेंट्स ने मामले की शिकायत ई-जागृति पोर्टल पर की. जिसके बाद आयोग ने कार्रवाई शुरू की. ऑनलाइन कोर्स घोटाले के 25 दिनों के अंदर का आयोग मामले में नतीजे पर पहुंचा.
आयोग ने सेर्विस में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया और पूरी राशि 54,987 रुपये वापस करने के साथ-साथ वित्तीय नुकसान के लिए 2.5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. यह फैसला एड-टेक कंपनियों की गलत कटौती और झूठे वादों के खिलाफ बड़ा मिसाल बना.
8 साल पुराने खराब फ्रिज पर मिला मुआवजा
इसी तरह त्रिपुरा के एक मामले में 8 साल पुराने 85,000 रुपये के एलजी साइड-बाय-साइड फ्रिज में लगातार पानी लीक होने और 2017 से डीफ्रॉस्ट न होने की शिकायत पर आयोग ने एलजी इंडिया और सर्विस सेंटर को सर्विस में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया.
आयोग ने ग्राहक को 7.5% सालाना ब्याज के साथ पूरी राशि वापस करने, 12,000 रुपये मरम्मत खर्च, 50,000 रुपये मानसिक पीड़ा और 20,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया, जिसे 30 दिनों के भीतर चुकाना होगा. यह मामला दिखाता है कि ई-जागृति प्लेटफॉर्म खरीद के सालों बाद भी ग्राहक को उसका अधिकार दिलाने में मददगार साबित हुए और कंपनियों को अपनी सर्विस जिम्मेदारियों निभाने के लिए मजबूर करता है.
इलेक्ट्रिक ऑटो के खराबी से जुड़े मामले में ग्राहक को मिला न्याय
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में एक ग्राहक ने इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा खरीदा, लेकिन थोड़े ही समय में उसमें लगातार समस्याएं आने लगीं, जैसे चलती गाड़ी का अचानक बंद हो जाना. कई बार शिकायत करने के बावजूद आफ्टर-सेल्स सर्विस ठीक से नहीं मिली, जिससे ग्राहक का कामकाज रुक गया और आर्थिक नुकसान हुआ.
E-Jagriti: आपकी उपभोक्ता शिकायतों का डिजिटल समाधान।
— Consumer Affairs (@jagograhakjago) September 8, 2025
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न्याय की उम्मीद में उसने ई-जागृति पोर्टल के जरिए दक्षिण कन्नड़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज की. सिर्फ 3 महीने और 16 दिनों में आयोग ने ग्राहक के हक में फैसला सुनाते हुए कंपनी को निर्देश दिया कि सर्विस में कमी के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा दें, वाहन की मरम्मत करें और जरूरी स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराएं. यदि कंपनी यह सब उपलब्ध नहीं कराती, तो उन्हें पूरे वाहन की कीमत वापस करनी होगी.
अगर आप भी कोई सामान, वाहन या अन्य खरीदकर परेशान हैं तो ई-जागृति पोर्टल की मदद ले सकते हैं.
हर दिन मिले करीब 412 कंप्लेन, अबतक 1.27 लाख मामलों का हुआ निपटारा
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बताया कि 1 जनवरी 2025 से लेकर 13 नवंबर के बीच ई-जागृति पोर्टल पर करीब 1.30 लाख शिकायतें मिलीं. यानी आंकड़ों के हिसाब से हर दिन ग्राहकों की ओर 412 कंप्लेन दर्ज कराए गए और इनमें से लगभग 1.27 लाख मामलों का समाधान ( हर दिन 401 मामलों का निपटारा) भी कर दिया गया है.
इस पोर्टल पर अब तक दो लाख से ज्यादा लोग रजिस्टर कर चुके हैं, जिनमें एनआरआई भी शामिल हैं. मंत्रालय के मुताबिक 13 नवंबर तक 1,27,058 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है, जो दिखाता है कि पूरे देश में उपभोक्ता शिकायतों को तेज़ी और प्रभावी तरीके से निपटाया जा रहा है.
क्या है e-Jagriti Portal?
e-Jagriti भारत सरकार का ऐसा सिस्टम है जो पूरे देश के उपभोक्ता कोर्ट यानी कंज्यूमर कमीशन को कंप्यूटर और ऑनलाइन नेटवर्क से जोड़ता है, ताकि लोगों की शिकायतें जल्दी और आसानी से निपट सकें.
ई-जागृति पर ओटीपी से रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन पेमेंट, डिजिटल डॉक्यूमेंट एक्सचेंज और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जिसका खास फायदा प्रवासी भारतीयों को मिला है. वे विदेश में रहते हुए भी बिना भारत आए शिकायत दर्ज कर पा रहे हैं. इस साल एनआरआई द्वारा 466 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें अमेरिका सबसे आगे रहा, इसके बाद यूके और यूएई का नंबर आता है.
मंत्रालय ने कहा कि ई-जागृति “समावेशी उपभोक्ता न्याय” की दिशा में बड़ा कदम है. यह प्लेटफॉर्म एनआरआई के लिए दूरी की दिक्कत दूर करता है और भारत में रहने वालों के लिए शिकायत प्रक्रिया को और आसान बनाता है. आंकड़ों के अनुसार गुजरात सबसे ज्यादा शिकायतों वाले राज्यों में शीर्ष पर रहा, उसके बाद उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान रहा.
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