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Why flexi cap funds are popular : इनकी खासियत है कि ये लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में जरूरत के हिसाब से निवेश बदलते रहते हैं. Photograph: (Pixabay)
Flexi Cap Funds Top Net Sales Over Last 12 Months : पिछले एक साल में भारत के म्यूचुअल फंड मार्केट में फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे बड़े विजेता बनकर उभरे हैं. यह दिखाता है कि उतार-चढ़ाव वाले बाजार में निवेशक अब ज्यादा लचीलापन चाहते हैं. फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 12 महीनों में फ्लेक्सी-कैप फंड्स में सभी इक्विटी कैटेगरी में सबसे ज्यादा निवेश आया है. पिछले 12 महीनों में इन फंड्स में करीब 75,700 करोड़ का नेट निवेश दर्ज किया गया.
फ्लेक्सी-कैप फंड्स की खासियत है कि ये लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में जरूरत के हिसाब से निवेश बदलते रहते हैं. इन्हें आजादी है कि ये हर मार्केट कैप में पैसा लगा सकते हैं और बाजार के माहौल के हिसाब से उसे घटा या बढ़ा सकते हैं, यानी एक कैटेगरी से दूसरी में स्विच कर सकते हैं.
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इक्विटी की मजबूती से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को बूस्ट
फ्लेक्सी-कैप फंड्स के अच्छे प्रदर्शन से कुल इक्विटी-बेस्ड म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी बढ़ी है. अब इक्विटी स्कीमें कुल म्यूचुअल फंड AUM का करीब 60% हिस्सा रखती हैं, जो बताता है कि रिटेल निवेशक हाई रिटर्न के लिए जोखिम लेने को तैयार हैं. SIP के जरिए इक्विटी फंड्स में लगातार पैसा आ रहा है, जिससे फ्लेक्सी-कैप फंड्स को लंबे समय का स्थिर निवेश मिल रहा है और ये पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं.
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म्यूचुअल फंड का एसेट्स बैंक डिपॉजिट का एक तिहाई
घरेलू बचत के तरीके में अब साफ बदलाव दिखाई दे रहा है. म्यूचुअल फंड का कुल AUM बढ़कर 80.8 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो अब कुल बैंक डिपॉजिट (Bank Fixed Deposits) का करीब 33% है. एक दशक पहले यह आंकड़ा सिर्फ करीब 13% था. यह तेज बढ़ोतरी दिखाती है कि निवेशक अब पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट से धीरे-धीरे हटकर लंबे समय में ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, खासकर फ्लेक्सी-कैप जैसे इक्विटी आधारित फंड्स की तरफ.
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बचत को लेकर निवेशकों की सोच में बदलाव
पिछले 5 सालों में म्यूचुअल फंड की संपत्ति 22% की सालाना दर (CAGR) से बढ़ी है, जो बैंक डिपॉजिट की करीब 11% की बढ़त से डबल है. यह बढ़ता गैप बताता है कि लोगों में वित्तीय जागरूकता बढ़ी है, मेट्रो शहरों के बाहर भी म्यूचुअल फंड की पहुंच मजबूत हुई है और प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट पर भरोसा बढ़ा है. ग्रोथ की संभावना और लचीलापन रखने वाले फ्लेक्सी-कैप फंड्स इस बदलाव के सबसे बड़े बेनेफिशियरीज में शामिल हैं.
फ्लेक्सी-कैप फंड की पॉपुलैरिटी बढ़ी
फ्लेक्सी-कैप फंड्स की बढ़ती लोकप्रियता और घरेलू बचत में म्यूचुअल फंड की बढ़ती हिस्सेदारी यह साफ दिखाती है कि भारत में निवेश की सोच बदल रही है. निवेशक अब सिर्फ बाजार से जुड़े विकल्पों में ज्यादा पैसा नहीं लगा रहे, बल्कि ऐसे फंड भी चुन रहे हैं जो डायवर्सिफिकेशन और लचीलापन दोनों देते हैं. जैसे-जैसे म्यूचुअल फंड बैंक डिपॉजिट पर बढ़त बना रहे हैं, फ्लेक्सी-कैप फंड्स आने वाले समय में लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की इस कहानी के केंद्र में बने रह सकते हैं.
(नोट : यह आर्टिकल ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट के आधार पर जानकारी के उद्देश्य से दिया गया है. यह निवेश की सलाह नहीं है. किसी भी इक्विटी फंड में पुराना रिटर्न आगे भी जारी रहेगा या नहीं, इसकी गारंटी नहीं है. बाजार में जोखिम होती है, इसलिए निवेश के पहले एक्सपर्ट की सलाह लें.)
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