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Gold ETFs and Gold FOFs : ये दोनों विकल्प सोने में निवेश को आसान, सुरक्षित, और बिना झंझट वाला बना देते हैं. (Reuters)
Best way to invest in gold : भारत में सोना हमेशा से धन और सुरक्षा का प्रतीक रहा है, लेकिन बदलते समय के साथ सोने में निवेश का तरीका भी बदल गया है. अब सोने को घर में रखने, सुरक्षा की चिंता करने या मेकिंग चार्ज और GST भरने की जरूरत नहीं, क्योंकि Gold ETF और Gold Fund of Funds ने निवेशकों के लिए एक मॉडर्न, आसान और बिना झंझट वाला रास्ता खोल दिया है. कम खर्च, ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा, और टैक्स के बड़े फायदे इन दोनों को आज के स्मार्ट निवेशकों के बीच सबसे लोकप्रिय विकल्प बना रहे हैं.
कोटक म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर - ETF, सतीश डोंडापति का कहना है कि भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. पहले लोग ज्यादातर जेवर, सिक्के या सोने की ईंटें (बार) खरीदकर ही निवेश करते थे, क्योंकि यही आम तरीका था. लेकिन अब समय बदल गया है. आज ऐसे विकल्प मौजूद हैं जिनमें न तो सोना घर पर रखने की जरूरत है और न ही सुरक्षा की चिंता रहती है. इनमें सबसे अच्छे विकल्प हैं:
1. गोल्ड ETFs (Gold Exchange-Traded Funds)
2. गोल्ड FOFs (Gold Fund of Funds)
ये दोनों विकल्प सोने में निवेश को आसान, सुरक्षित, और बिना झंझट वाला बना देते हैं. आप इन्हें शेयर की तरह ही मार्केट के खुले होने पर कभी भी खरीद-बेच सकते हैं.
क्या इनकी सबसे बड़ी खासियत
मेकिंग चार्ज नहीं लगता
स्टोरेज की कोई दिक्कत नहीं
चोरी या सुरक्षा की चिंता नहीं
असली सोने की तुलना में कम खर्चे
अगर आप सोने में निवेश को सिंपल और एफिशिएंट रखना चाहते हैं, तो ETFs और FOFs बेहतरीन विकल्प हैं.
गोल्ड ETF क्या होता है?
एक गोल्ड ETF यूनिट का मतलब होता है एक ग्राम सोने का दसवां हिस्सा, जिसे बैंक के सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है. आप इन यूनिट्स को NSE और BSE जैसी स्टॉक एक्सचेंजों पर खरीद या बेच सकते हैं.
इसके फायदे :
ट्रेड करना बहुत आसान होता है.
कीमत रियल-टाइम में अपडेट होती हैं.
जेवर खरीदने में लगने वाले अतिरिक्त खर्च (जैसे मेकिंग चार्ज और GST) नहीं लगते.
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गोल्ड ETF में निवेश आसान
गोल्ड ETF में निवेश करना बहुत आसान होता है. आप इन्हें मार्केट के समय के दौरान तुरंत खरीद या बेच सकते हैं. इन पर लगने वाला सालाना खर्च (Expense Ratio) भी कम होता है, करीब लगभग 0.50%.
यह उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है, जो सोने की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव का फायदा लेना चाहते हैं, बिना इस चिंता के कि सोना घर पर कैसे रखें या उसकी सुरक्षा कैसे करें.
Gold Fund of Funds (FOFs) : डीमैट अकाउंट जरूरी नहीं
अगर आपके पास डीमैट अकाउंट नहीं है, या आप चीजों को और भी आसान रखना चाहते हैं, तो Gold FOFs अच्छा विकल्प (Advantage of Gold Funds) है. ये फंड ज्यादातर पैसा Gold ETFs में ही निवेश करते हैं. मतलब आपको सोने का फायदा मिलता है, पर कोई स्टोरेज या सिक्योरिटी की टेंशन नहीं रहती.
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कम पैसों से निवेश की सुविधा
गोल्ड फंड्स में आप सिर्फ 500 रुपये प्रति महीना SIP के जरिए निवेश शुरू कर सकते हैं. यह नियमित निवेश की आदत डालने के लिए एकदम सिंपल तरीका है.
इनके खर्च (एक्सपेंस रेश्यो), ETF के मुकाबले कुछ ज्यादा होते हैं, कुल मिलाकर करीब 1%, क्योंकि इनमें ETF का खर्च भी शामिल होता है. लेकिन इसका फायदा यह है कि डीमैट की जरूरत नहीं हाती है. प्रोफेशनल मैनेजमेंट आपका पैसा संभालता है. लंबी अवधि के लक्ष्यों और एसेट एलोकेशन के लिए अच्छा विकल्प है.
इसके अलावा, Gold ETFs और Gold FOFs दोनों में टैक्स का फायदा भी मिलता है, जो लंबे समय के निवेशकों के लिए काफी अच्छा रहता है.
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Gold ETFs और Gold FOFs : टैक्स के क्या हैं नियम?
अगर आप Gold ETF एक साल से ज्यादा समय तक रखते हैं, तो आपको 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस टैक्स देना होता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे इक्विटी फंड्स पर लगता है.
गोल्ड म्यूचुअल फंड्स (Gold Funds) पर भी यही टैक्स रेट है, लेकिन इनके लिए आपको कम से कम 2 साल तक निवेश बनाए रखना पड़ता है.
इस वजह से, दोनों विकल्प टैक्स के हिसाब से काफी फायदे वाले हैं, खासकर अगर आप लंबी अवधि में पैसा बढ़ाना चाहते हैं.
क्यों बेहतर हैं Gold ETFs और Gold FOFs?
ये सस्ते होते हैं, खरीदना-बेचना आसान है, चोरी या स्टोरेज की चिंता नहीं, फिजिकल गोल्ड के झंझट (मेकिंग चार्ज, GST, सेफ्टी) पूरी तरह खत्म रहता है.
इसके अलावा, आपको सोने का वही पारंपरिक फायदा भी मिलता है, जैसे महंगाई (Inflation) से बचाव, समय के साथ सोने का मूल्य स्थिर रहता है, अगर आप सोने में एक मॉडर्न, सुरक्षित और बिना झंझट वाला तरीका चाहते हैं, तो Gold ETFs और Gold Funds सबसे बेहतर विकल्प नजर आते हैं.
(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सिफारिश करना नहीं है. निवेश का कोई भी फैसला पूरी जानकारी हासिल करने और अपने निवेश सलाहकार की राय लेने के बाद ही करें.)
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