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Best way to invest in gold : निवेशक गोल्ड फंड या गोल्ड ETF के जरिए निवेश को डाइवर्सिफाई कर सकते हैं. (Freepik)
Gold Investment Strategy 2026 : सोने और चांदी दोनों ही मेटल में इस साल रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी (Silver Price) 2.49 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड लेवल पर हैं. सोना इस साल करीब 73 फीसदी तो चांदी करीब 160 फीसदी मजबूत हो चुकी है. सवाल यह है कि इस साल तो इन एसेट क्लास में शानदार तेजी रही, अब नया साल इनके लिए कैसा रहेगा.
2025 रहा ब्लॉकबस्टर, 2026 को लेकर उम्मीदें मजबूत
सचिन सावरिकर, मैनेजिंग पार्टनर, अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स आईएफएससी एलएलपी का कहना है कि 2025 की बात करें तो सोने ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. इसकी बड़ी वजह रहीं जियो-पॉलिटिकल टेंशन, बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी.
भारतीय निवेशकों के लिए यह साल खास तौर पर फायदेमंद रहा, क्योंकि सोने की कीमतों में तेज उछाल आया और एक बार फिर यह साबित हुआ कि सोना सुरक्षित निवेश और दौलत बचाने का भरोसेमंद जरिया है. ग्लोबल स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता ने सोने को सपोर्ट दिया, वहीं भारत में त्योहारों, शादियों और निवेश की लगातार मांग ने इसकी तेजी को बनाए रखा.
सचिन सावरिकर का कहना है कि आने वाले साल यानी 2026 की बात करें, तो सोने (Gold) का भविष्य अच्छा दिख रहा है, लेकिन इसमें कुछ उतार-चढ़ाव भी हो सकते हैं. सोने की कीमतें मुख्य रूप से कुछ बातों पर निर्भर करेंगी, जैसे केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां, करेंसी में उतार-चढ़ाव और महंगाई का रुझान यह तय करेंगे कि सोने की कीमतें किस दिशा में जाती हैं.
अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोने की मांग बनी रहेगी. सोना हमारी 'खरीदने की ताकत' (परचेजिंग पावर) को घटने से बचाता है. दूसरी ओर, अगर बैंक ब्याज दरों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी करते हैं, तो थोड़े समय के लिए सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है. फिर भी, लंबे समय के लिए निवेश के नजरिए से सोना एक सुरक्षित विकल्प बना रहेगा.
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इसके अलावा, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव भी सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग को लगातार सपोर्ट देते रहेंगे. कुल मिलाकर, सोना न केवल एक निवेश है, बल्कि मुसीबत के समय काम आने वाला एक भरोसेमंद साथी भी बना रहेगा.
पोर्टफोलियो में 5-10% रखें सोना, Gold ETF बेहतर विकल्प
सचिन सावरिकर का कना है कि पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 5% से 10% तक रखने की सलाह है. इससे सोना एक तरफ महंगाई से बचाव और स्थिरता देता है, वहीं दूसरी तरफ शेयर जैसे ग्रोथ वाले निवेशों के साथ संतुलन भी बना रहता है.
जिन निवेशकों के पास पहले से काफी अधिक फिजिकल गोल्ड है, वे गोल्ड फंड या Gold ETF के जरिए निवेश को और बेहतर तरीके से डाइवर्सिफाई कर सकते हैं. इससे लिक्विडिटी बढ़ती है और मैनेजमेंट आसान होता है. कुल मिलाकर, पूंजी की सुरक्षा, महंगाई से बचाव और संकट के समय मजबूती जैसी खूबियों की वजह से सोना एक संतुलित निवेश रणनीति का जरूरी हिस्सा बना रहता है.
भारतीय परिवारों के पास 25,000 - 30,000 टन सोना
अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास कुल मिलाकर करीब 25,000 से 30,000 टन सोना मौजूद है, जो दुनिया में निजी तौर पर रखे गए सोने के सबसे बड़े भंडारों में से एक है. मौजूदा कीमतों पर इसकी कुल कीमत लगभग 3.4 ट्रिलियन डॉलर से 4.1 ट्रिलियन डॉलर के बीच बैठती है. इससे साफ है कि भारत में घरों की संपत्ति में सोना सबसे अहम हिस्सों में से एक है.
ध्यान रखना जरूरी है कि भारत जो सोना विदेशों से मंगवाता है, उसका एक हिस्सा ज्वैलरी बनाकर वापस दूसरे देशों को बेच (एक्सपोर्ट) दिया जाता है. जिसने भारत को दुनिया का एक बड़ा 'ज्वैलरी हब' बना दिया है. भले ही कुछ सोना निर्यात हो जाता है, लेकिन फिर भी भारत के पास सोने का इतना बड़ा भंडार बचा रहता है जो भारतीय परिवारों और संस्थानों के लिए आर्थिक सुरक्षा की एक मजबूत दीवार की तरह काम करता है.
(Disclaimer: यहां गोल्ड और सिल्वर पर विचार एक्सपर्ट के हैं. यह फाइनेंशियल एक्सप्रेस के निजी विचार भी नहीं है. बाजार में जोखिम होते हैं, इसलिए निवेशक निवेश का कोई फैसला लेने के पहले एक्सपर्ट की राय लें.)
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