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Gold, Silver Investment: गोल्ड और सिल्वर ETF में हाल में आई गिरावट क्या नए निवेश का मौका है? (Image : Pixabay)
Gold and Silver ETF Investment Strategy : पिछले कुछ समय में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में जोरदार गिरावट देखने को मिली है. एक महीने में गोल्ड ईटीएफ (Gold Etf) करीब 6% और सिल्वर ईटीएफ लगभग 9% तक लुढ़क गए हैं. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह डिप निवेश का सही मौका है? या फिर अभी रुककर हालात देखने चाहिए? दरअसल, सोने और चांदी की चाल इक्विटी से अलग होती है, इसलिए इन दोनों में निवेश की रणनीति भी अलग रखनी चाहिए.
गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ क्यों हुए डाउन?
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में हालिया गिरावट के पीछे कई कारण सामने आए हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-चीन तनाव कम होने से गोल्ड की सेफ हेवन डिमांड थोड़ी घटी है. यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती को लेकर सावधानी अपनाने से भी प्रेशर बढ़ा है क्योंकि सोने-चांदी की चमक आमतौर पर कम ब्याज दर वाले माहौल में ज्यादा बढ़ती है. डॉलर इंडेक्स में उछाल और तेज रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग ने भी गिरावट को तेज किया.
देश के भीतर के बाजार पर नजर डालें तो अक्टूबर में एमसीएक्स गोल्ड (MCX Gold) 1.34 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था. इसके बाद आई तेज बिकवाली ने गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की नेट एसेट वैल्यू में गिरावट ला दी. खासकर सिल्वर ईटीएफ में गिरावट ज्यादा रही क्योंकि दिवाली के दौरान डिमांड बढ़ने और सप्लाई की कमी से कीमतें जरूरत से ज्यादा ऊपर चली गई थीं. जैसे ही स्थिति नॉर्मल हुई, यह तेजी तेजी से वापस आ गई.
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क्या ये करेक्शन निवेश का मौका है?
इक्विटी बाजार में गिरावट को अक्सर बेस्ट बाइंग ऑपर्च्युनिटी माना जाता है, लेकिन सोना-चांदी की कहानी अलग है. यह कमाई नहीं, बल्कि डिमांड के आधार पर चलने वाली एसेट्स हैं. इसलिए गिरावट के समय जल्दीबाजी करने की जरूरत नहीं होती.
अगर आपने गोल्ड को डेट का विकल्प मानकर निवेश किया है और लंबी अवधि के लिए होल्ड करना चाहते हैं, तब तो यह गिरावट आपके लिए मौका बन सकती है. लेकिन शॉर्ट टर्म में रिटर्न के भरोसे सोने-चांदी में पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है. ऐसे में मौजूदा निवेश को होल्ड करना और अगर एसआईपी चल रही है तो उसे जारी रखना बेहतर है. इससे अलग-अलग मार्केट फेज में एवरेजिंग होकर अच्छा रिटर्न मिलने की गुंजाइश बढ़ती है.
कैसा रहा अब तक का प्रदर्शन?
साल 2025 में अब तक गोल्ड ईटीएफ ने औसतन 57% के आसपास रिटर्न दिया है. कुछ फंड्स ने तो 59% से ऊपर कमाई कराई है. वहीं पिछले एक साल में यह रिटर्न 60% से भी ऊपर रहा है. गोल्ड ईटीएफ की मांग लगातार बढ़ रही है और सेंट्रल बैंक्स भी अपने रिजर्व में गोल्ड बढ़ा रहे हैं.
सिल्वर ईटीएफ का प्रदर्शन इससे भी तेज रहा. मौजूदा साल में इसने औसतन 74% तक रिटर्न दिया है, जबकि कुछ फंड्स ने 76% से ज्यादा कमाई कराई है. सिल्वर लगातार 5 साल से सप्लाई डेफिसिट में है और इंडस्ट्रियल यूज बढ़ने से इसका लॉन्ग टर्म आउटलुक मजबूत माना जा रहा है.
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पोर्टफोलियो में गोल्ड-सिल्वर का रोल क्या होना चाहिए?
सोना-चांदी को प्राइमरी वेल्थ क्रिएटर नहीं मानना चाहिए, क्योंकि इनकी ग्रोथ इक्विटी के मुकाबले कम ही रहती है. लेकिन यह अच्छे पोर्टफोलियो स्टेबलाइज़र साबित होते हैं. इसलिए एक संतुलित पोर्टफोलियो में इनका एक्सपोजर 10% के आसपास रखना अच्छी रणनीति हो सकती है, जिससे पोर्टफोलियो की ओवरऑल वोलैटिलिटी कम होती है.
सिल्वर में निवेश सावधानी से करें क्योंकि इसमें रिस्क ज्यादा होता है और लॉन्ग टर्म पोटेंशियल गोल्ड जितना मजबूत नहीं माना जाता. गोल्ड को डेट के विकल्प के रूप में देखा जा सकता है, जबकि सिल्वर को सप्लीमेंटरी इन्वेस्टमेंट की तरह रखना बेहतर होता है.
कुल मिलाकर देखें, तो गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ का मौजूदा करेक्शन उन निवेशकों के लिए मौका है, जिनका नजरिया लंबी अवधि का है. लेकिन शॉर्ट टर्म में तेजी पकड़ने के लिए जल्दबाजी में निवेश करना नुकसानदेह हो सकता है. सही रणनीति यही है कि सिस्टमेटिक तरीका अपनाएं, मार्केट टाइमिंग के फेर में न पड़ें और लांग टर्म फाइनेंशियल गोल्स को ध्यान में रखकर कदम बढ़ाएं.
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