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Gold vs equities investment : सोना अभी भी मजबूत है, लेकिन इक्विटी में निवेश का मौका ज्यादा अच्छा दिख रहा है. (Pixabay)
Sensex-to-gold ratio outlook : इस साल अक्टूबर के मिड में नई ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद, सोना और चांदी में अब गिरावट देखने को मिल रही है. MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोना अपने उच्च स्तर करीब 1.32 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर हाल के दिनों में 1.19 से 1.22 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की रेंज तक आ गया है. यह गिरावट लॉन्ग टर्म फंडामेंटल में बदलाव की बजाय, निवेशकों की पोजिशन और सेंटीमेंट के रीबैलेंसिंग जैसा ज्यादा लग रहा है.
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सोने की हाल की बढ़त का मुख्य कारण
बजाज फिनसर्व की रिपोर्ट के मुताबिक अस्थिरता के समय सुरक्षित निवेश (सेफ हैवेन) माना जाता है, जिसके चलते इसमें (Gold) खरीदारी बढ़ी. आर्थिक अनिश्चितता और जियो पॉलिटिकल टेंशन के चलते इसके कीमतों में रिकॉर्ड तेजी आई. इसके अलावा महंगाई और वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प खोजने पर मजबूर किया. ऐसे समय में, जब निवेशकों को शेयर बाजार कम भरोसेमंद लगने लगे, सोने ने फिर साबित किया कि यह संकट के समय भरोसेमंद सहारा है.
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बाजार में बदलाव: अब क्या बदल गया?
2025 के अंतिम महीनों में बाजार की अस्थिरता कम हुई, महंगाई के अनुमान स्थिर हुए, ग्लोबल शेयर बाजारों में भरोसा वापस आया, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज कटौती पहले से ही कीमतों में शामिल कर ली गई थी. इसका नतीजा यह हुआ कि सोने की कीमतों में जो अतिरिक्त तेजी थी, वह धीमी पड़ने लगी.
सेंसेक्स-गोल्ड रेश्यो (Sensex-Gold Ratio)
बजाज फिनसर्व के एनालिस्ट का कहना है कि सेंसेक्स टु गोल्ड रेश्यो यह बताता है कि शेयर बाजार (Sensex) की कीमतें सोने के मुकाबले कैसी हैं. फिलहाल यह रेश्यो लगभग 0.70x है, जो इसके लंबे समय के औसत 1.02x से काफी कम है.
इतिहास बताता है कि जब यह रेश्यो इतना नीचे होता है, तब आने वाले सालों में शेयर बाजार सोने से बेहतर प्रदर्शन करते हैं. इसका मतलब है कि सोना अभी भी मजबूत है, लेकिन इस समय शेयरों में निवेश का मौका ज्यादा अच्छा दिख रहा है, यानी बाजार की दिशा बदल रही है.
क्या चीजें अब भी सोने को मजबूत बना रही हैं?
दुनिया भर के कई केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर रहे हैं और बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं. लगातार तीन साल से, दुनिया भर में हर साल 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा जा रहा है, जो लंबे समय के औसत से काफी ज्यादा है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अपने सोने का भंडार बढ़ाकर लगभग 880 टन कर दिया है. RBI के कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 2021 में 6.9% से बढ़कर 2025 में 11.4% हो गई है.
यह छोटी अवधि की ट्रेडिंग नहीं है, बल्कि दुनिया के वित्तीय सिस्टम में बदलाव और सोने की बढ़ती अहमियत को दर्शाती लंबी अवधि की रणनीति है.
क्या है आउटलुक
पिछले एक साल में भारत में सोने की कीमत लगभग 50% तक बढ़ी, जबकि शेयर बाजार ज्यादातर स्थिर रहा. शुरू में यह बढ़त बड़े निवेश और अनिश्चितता के कारण थी, लेकिन अब वैश्विक हालात शांत होने से सोने की तेजी धीमी होती दिख रही है.
फिर भी, दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे इसकी कीमत को मजबूत सहारा मिल रहा है.
सेंसेक्स-टू-गोल्ड रेश्यो अभी 0.70x है, जो लंबे समय के औसत 1.02x से कम है. इसका मतलब है कि इस समय शेयर बाजार का अवसर सोने से बेहतर लग रहा है.
अब सोना एक सुरक्षित निवेश या बचाव की तरह काम कर रहा है, न कि तेजी से बढ़ने वाला निवेश. इसलिए निवेशकों के लिए सलाह है कि सोने में मध्यम निवेश रखें, और लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न पाने के लिए शेयर बाजार के अवसरों पर ध्यान दें, साथ ही जोखिम और वैल्यूएशन में बदलाव पर नजर बनाए रखें.
(Disclaimer: स्टॉक या गोल्ड और सिल्वर को लेकर सलाह एक्सपर्ट या ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दिए गए हैं. यह फाइनेंशियल एक्सप्रेस के निजी विचार नहीं है. बाजार में जोखिम होते हैं, इसलिए निवेश के पहले एक्सपर्ट की राय लें.)
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