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How to Calculate Gratuity : ग्रेच्युटी मुख्य रूप से आपकी अंतिम बेसिक सैलरी और कंपनी में आपके द्वारा दी गई सर्विस के कुल साल पर निर्भर करती है. (Pixabay)
Know Your Gratuity Ammount : अगर आप किसी कंपनी में कई सालों से काम कर रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि आपकी कितनी ग्रेच्युटी बन चुकी है, तो यह आसान कैलकुलेशन आपको सही रकम समझने में मदद करेगा. ग्रेच्युटी वह फाइनेंशियल रिवार्ड है, जो कंपनियां अपने कर्मचारियों को सर्विस के बदले देती हैं. पुराने नियमों के अनुसार, किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल की लगातार सेवा जरूरी थी, जबकि नए लेबर कोड में इसे घटाकर 1 साल किया गया है.
आपकी ग्रेच्युटी मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करती है, एक आपकी आखिरी बेसिक सैलरी (DA सहित) और कंपनी में आपके कुल काम किए गए साल. ग्रेच्युटी का भुगतान एक निर्धारित फॉर्मूले के तहत (Gratuity Rules) गारंटीड तौर पर किया जाता है. ग्रेच्युटी का छोटा हिस्सा कर्मचारी की सैलरी से कटता है, लेकिन बड़ा हिस्सा कंपनी की तरफ से दिया जाता है.
Gratuity : क्या होती है ग्रेच्युटी
ग्रेच्युटी (Gratuity) का मतलब किसी कंपनी या फर्म द्वारा अपने कर्मचारी को उस कंपनी में लंबी अवधि तक दी गई सेवाओं के बदले पुरस्कार के रूप में भुगतान करना है. अभी तक ग्रेच्युटी की रकम केवल उन्हीं कर्मचारियों को दी जाती है जो कंपनी में 5 साल या उससे अधिक समय से काम कर रहे हैं. यह ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 द्वारा गवर्न किया जाता है. किसी दुर्घटना या किसी बीमारी के कारण विकलांग होने पर कर्मचारी को निर्धारित समय से पहले ग्रेच्युटी मिल सकती है.
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कैसे कैलकुलेट होती है ग्रेच्युटी?
ग्रेच्युटी मुख्य रूप से आपकी अंतिम बेसिक सैलरी और कंपनी में आपके द्वारा दी गई सर्विस के कुल साल पर निर्भर करती है. मान लीजिए आप किसी कंपनी में 11 साल 7 महीने काम कर चुके हैं. यहां आपकी नौकरी 12 साल मानी जाएगी. इस नियम के बारे में हमने आगे समझाया है. अभी आपका बेसिक और महंगाई भत्ता मिलाकर अभी 40,000 रुपये है.
ग्रेच्युटी की रकम = (अंतिम सैलरी) x (15/26) x (कंपनी में कितने साल काम किया).
यहां महीने में 26 दिन ही गिने जाते हैं, क्योंकि माना जाता है कि 4 दिन छुट्टी होती है. एक साल में 15 दिन के आधार पर ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन होता है. इस फॉर्मूले में ऊपर दिए उदाहरण की रकम भरने पर कैलकुलेशन इस तरह होगा:
कुल ग्रेच्युटी की रकम = (40,000) x (15/26) x (12) = 2,76,923 रुपये
यानी लेटेस्ट 40,000 रुपये बेसिक सैलरी वाला कर्मचारी अगर 12 साल तक नौकरी कर लेता है तो अबतक उसकी ग्रेच्युटी की रकम 2,76,923 रुपये (Gratuity Corpus) हो चुकी होगी.
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6 महीने से कम या ज्यादा
इस फार्मूले के तहत, अगर कोई कर्मचारी 6 महीने से ज्यादा काम करता है तो उसका कैलकुलेशन एक साल के तौर पर किया जाएगा. जैसे अगर कोई कर्मचारी 11 साल 7 महीने काम करता है तो उसे 12 साल मान लिया जाएगा और इसी आधार पर ग्रेच्युटी की रकम बनेगी. वहीं, अगर 11 साल 5 महीने काम करता है तो उसे 11 साल ही माना जाएगा. अगर किस कर्मचारी की रिटायरमेंट या जॉब छोड़ने से पहले ही डेथ हो जाती है, तो ग्रेच्युटी का भुगतान कंपनी कर्मचारी के नॉमिनी को करेगी.
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत यह लाभ उन संस्थानों के हर कर्मचारी को मिलता है जहां 10 से ज्यादा लोग काम करते हैं. अगर कर्मचारी नौकरी बदलता है, रिटायर हो जाता है या किसी कारणवश नौकरी छोड़ देता है, लेकिन वह ग्रेच्युटी के नियमों को पूरा करता है तो उसे ग्रेच्युटी का लाभ मिलता है. एक बार जब कोई संगठन या प्रतिष्ठान ग्रेच्युटी एक्ट के अंतर्गत आ जाता है, तो उस पर इसके प्रावधान लागू होते हैं, भले ही बाद में कर्मचारियों की संख्या 10 से कम हो जाए.
ग्रेच्युटी के लिए अप्लाई करने से पहले आपको ये देख लेना चाहिए कि आपकी कंपनी ग्रेच्युटी एक्ट के तहत रजिस्टर है या नहीं. क्योंकि अगर आपकी कंपनी रजिस्टर है, तो उसे नियमों के अनुसार आपको ग्रेच्युटी का भुगतान करना होगा, लेकिन अगर कंपनी रजिस्टर नहीं है तो ग्रेच्युटी का भुगतान करना या नहीं करना कंपनी की इच्छा पर निर्भर करता है.
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