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Income Tax Alert : 15 दिसंबर से पहले आपको भी भरना पड़ सकता है एडवांस टैक्स, समय रहते चेक कर लें नियम और कैलकुलेशन

Income Tax 15 December Deadline : एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की डेडलाइन 15 दिसंबर है. किन टैक्सपेयर्स के लिए ऐसा करना अनिवार्य है, किन्हें छूट मिलती है और कौन-सी इनकम पर अगले क्वार्टर में टैक्स भर सकते हैं?

Income Tax 15 December Deadline : एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की डेडलाइन 15 दिसंबर है. किन टैक्सपेयर्स के लिए ऐसा करना अनिवार्य है, किन्हें छूट मिलती है और कौन-सी इनकम पर अगले क्वार्टर में टैक्स भर सकते हैं?

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Viplav Rahi
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Advance tax December 15 deadline : एडवांस टैक्स डेडलाइन 15 दिसंबर

Advance Tax Deadline : 15 दिसंबर तक एडवांस टैक्स भरना किनके लिए है जरूरी? (Image : Pixabay)

Advance Tax December 15 Deadline : इनकम टैक्स भरने वालों के लिए अपना एडवांस टैक्स जमा करने की अगली अंतिम तारीख 15 दिसंबर अब बेहद करीब आ चुकी है. ऐसे में कई टैक्सपेयर्स यह समझना चाहते हैं कि क्या उनके लिए भी एडवांस टैक्स भरना जरूरी है. आयकर नियम (Income Tax Rules) साफ कहते हैं कि अगर TDS घटाने के बाद आपकी सालाना टैक्स लायबिलिटी 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो एडवांस टैक्स जमा करना जरूरी है. हालांकि कुछ मामलों में इस नियम से छूट भी दी गई है. आइए समझते हैं कि एडवांस टैक्स किन्हें देना है, किन्हें नहीं और कौन-कौन सी इनकम पर इसे अगले क्वार्टर में भी भरा जा सकता है.

एडवांस टैक्स क्या है और क्यों जरूरी है?

एडवांस टैक्स (Advance Tax) वह टैक्स है जिसे आपको वित्त वर्ष खत्म होने का इंतजार किए बिना, पहले से ही किस्तों में जमा करना होता है. आयकर अधिनियम 1961 के अनुसार जिन टैक्सपेयर्स की नेट टैक्स लायबिलिटी (कुल अनुमानित टैक्स – TDS) 10,000 रुपये से अधिक है, उनके लिए एक वित्त वर्ष के दौरान चार किश्तों में एडवांस टैक्स पेमेंट करना जरूरी है.

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किन्हें नहीं देना होगा एडवांस टैक्स?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अनिवार्य रूप से एडवांस टैक्स भरने का नियम सभी पर लागू नहीं होता. सैलरीड कर्मचारियों की सारी टैक्स लायबिलिटी TDS के जरिए कवर हो जाए और उनकी सैलरी के अलावा कोई टैक्सेबल इनकम न हो, तो उन्हें भी एडवांस टैक्स भरने से छूट मिलती है. यानी अगर आपके वेतन से पूरा टैक्स TDS के रूप में कट चुका है और सैलरी के अलावा आपकी कोई एक्सट्रा इनकम नहीं है, तो आपको एडवांस टैक्स नहीं भरना होगा.

लेकिन जिन लोगों को किसी और तरीके से इनकम होती है, जैसे कि कैपिटल गेन, फ्रीलांस इनकम, बिजनेस इनकम, या डिविडेंड, उनके लिए एडवांस टैक्स देना जरूरी हो सकता है. बशर्ते इस अतिरिक्त इनकम को जोड़ने पर उनकी नेट टैक्स लायबिलिटी 10,000 रुपये से ज्यादा बनती हो.

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किन्हें एडवांस टैक्स भरने से पूरी छूट है?

एडवांस टैक्स भरने के मामले में वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को बड़ी राहत दी गई है. अगर आपकी उम्र 60 साल या उससे ज्यादा है और आपकी कोई बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम नहीं है, तो आपको एडवांस टैक्स भरने की जरूरत नहीं है. भले ही आपकी टैक्स लायबिलिटी 10,000 रुपये से अधिक क्यों न हो.

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किस इनकम पर अगले क्वार्टर में जमा कर सकते हैं एडवांस टैक्स?

कुछ इनकम ऐसी होती हैं जिनका सही अनुमान पहले से लगाना मुश्किल होता है. इसलिए ऐसी इनकम पर एडवांस टैक्स पेमेंट अगले क्वार्टर में करने की छूट दी जाती है. ऐसी इनकम में शामिल हैं:

  • कैपिटल गेन – जैसे शेयर बेचने पर होने वाला मुनाफा.

  • लॉटरी या गेम्स (रेस, कार्ड गेम, पज़ल वगैरह) से जीती गई रकम .

  • पहली बार मिली बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम

  • डिविडेंड इनकम (Deemed Dividend के अलावा)

सेक्शन 234C के प्रावधान टैक्सपेयर्स को जुर्माने के तौर पर लगने वाले इंटरेस्ट से बचाते हैं अगर उस इनकम पर पहले से टैक्स का अनुमान लगाना संभव न हो. ऐसे मामलों में टैक्स उसी क्वार्टर में भरना होता है, जिसमें इनकम मिली हो.

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कब-कब भरनी होती हैं एडवांस टैक्स की 4 किस्तें

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एडवांस टैक्स की तय डेडलाइन इस प्रकार है:

  • 15 जून तक : कुल अनुमानित टैक्स का 15%

  • 15 सितंबर तक : कुल अनुमानित टैक्स का 45% (पहली किस्त को घटाकर)

  • 15 दिसंबर तक : कुल अनुमानित टैक्स का 75% (पहले दिए गए टैक्स को घटाकर)

  • 15 मार्च तक : 100% टैक्स भुगतान (पहली तीन किस्तों के बाद बची टैक्स देनदारी)

अब 15 दिसंबर की तारीख करीब है. इसलिए जिनकी टैक्स लायबिलिटी TDS घटाने के बाद भी 10,000 रुपये से ऊपर है, उन्हें एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त भरने की तैयारी कर लेनी चाहिए.

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कैसे तय करें कि आपको एडवांस टैक्स देना है या नहीं?

सिंपल तरीका यह है कि साल की कुल इनकम का अनुमान लगाकर उस पर टैक्स देनदारी निकालें और फिर देखें कि आपका जो TDS कट चुका है, उसे घटाने के बाद कितना टैक्स बाकी है. अगर यह देनदारी 10,000 रुपये या उससे ज्यादा है, तो ऊपरी बताई गई शर्तों को ध्यान में रखते हुए एडवांस टैक्स भरना पड़ सकता है.

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