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2025 में इनकम टैक्स से जुड़े कई बड़े बदलाव हुए, जिनका असर हर टैक्सपेयर पर पड़ा. (AI Generated Image)
Income Tax Highlights 2025, Year Ender 2025 : साल 2025 भारतीय टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े बदलाव लेकर आया. कहीं इनकम टैक्स के कानून बदले, तो कहीं टैक्स स्लैब और रिबेट को लेकर नई घोषणाएं हुईं. वहीं, आईटीआर फॉर्म में तकनीकी दिक्कतों की वजह से लाखों लोगों को रिफंड का इंतजार करना पड़ा. जैसे-जैसे 2026 की शुरुआत हो रही है, यह समझना जरूरी है कि 2025 में इनकम टैक्स से जुड़े कौन से बदलाव सबसे अहम रहे.
नया इनकम टैक्स एक्ट 2025
2025 का सबसे बड़ा बदलाव रहा नया इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act, 2025). यह कानून 60 साल से भी ज्यादा पुराने Income Tax Act, 1961 की जगह लेगा. नया टैक्स कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा.
इस कानून में एक अहम बदलाव यह है कि अब "Assessment Year" और "Previous Year" जैसे जटिल शब्दों की जगह सिर्फ "Tax Year" की कंसेप्ट लाई गई है. इसका मकसद टैक्स सिस्टम को ज्यादा आसान बनाना है, जिससे आम लोगों को इसे समझने में मुश्किल न हो.
ITR फॉर्म में बदलाव
आकलन वर्ष 2025-26 के लिए नए और अपडेटेड ITR फॉर्म लागू करने में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं. जुलाई 2024 में कैपिटल गेन से जुड़े नियमों में बदलाव के बाद ITR फॉर्म के स्ट्रक्चर में भी बड़े बदलाव किए गए.
इन्हीं बदलावों और सिस्टम अपडेट की वजह से कई टैक्सपेयर्स का रिफंड (Income Tax Refund) अटक गया या देरी से मिला. खासकर उन लोगों को ज्यादा परेशानी हुई, जिनकी आय में शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से जुड़े कैपिटल गेन शामिल थे.
बजट 2025 में बदले टैक्स स्लैब और रेट
मोदी सरकार के 2025 में पेश बजट (Union Budget 2025) में नए टैक्स रिजीम के तहत इनकम टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव किया गया. टैक्स-फ्री इनकम की सीमा बढ़ाई गई, जिससे मिडिल क्लास को सीधा फायदा मिला.
नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को चुनने वाले लोगों के लिए टैक्स रिबेट की सीमा 12 लाख रुपये कर दी गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ने के बाद सैलरीड टैक्सपेयर्स को 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ा.
Section 87A रिबेट पर क्या हुआ कन्फ्यूजन
सरकार ने Section 87A के तहत रिबेट को बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दिया और बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट 4 लाख रुपये कर दी. यह राहत उन लोगों के लिए थी, जिनकी इनकम नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक है.
लेकिन यहां कन्फ्यूजन इसलिए हुआ क्योंकि कैपिटल गेन को इनकम स्लैब से अलग माना जाता है. सैलरी, ब्याज या बिजनेस इनकम पर रिबेट मिल सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर यह रिबेट लागू नहीं होता.
इस वजह से कई मामलों में ऐसा हुआ कि कुल इनकम 12 लाख रुपये से कम होने के बावजूद कैपिटल गेन पर टैक्स देना पड़ा, जिससे टैक्सपेयर्स को झटका लगा.
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कैपिटल गेन्स टैक्स में बड़े बदलाव
2025 में कैपिटल गेन्स टैक्स के नियमों में भी अहम बदलाव किए गए. इक्विटी पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया. वहीं, टैक्स फ्री लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) का दायरा बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये तक कर दिया गया.
1.25 लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर अब 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होगा. बजट के बाद यह सवाल उठा कि अगर सैलरी इनकम पर रिबेट मिल रहा है, लेकिन कैपिटल गेन जोड़ने से कुल इनकम 12 लाख रुपये से ऊपर चली जाए, तो रिबेट का फायदा मिलेगा या नहीं. इस पर अलग-अलग विशेषज्ञों की अलग राय सामने आई.
GST 2.0 ने भी बटोरी सुर्खियां
GST New Rates : हालांकि GST सीधे इनकम टैक्स का हिस्सा नहीं है, लेकिन 2025 में GST 2.0 की शुरुआत ने इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव किया. टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया, बहुत सारी जरूरी वस्तुओं और सर्विसेज पर टैक्स में राहत मिली और कंप्लायंस प्रक्रिया को आसान किया गया. इसका इनडायरेक्ट असर आम लोगों और कारोबारियों, दोनों की टैक्स प्लानिंग पर पड़ा.
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