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Income Tax Notice: जमीन खरीदने पर क्यों मिल सकता है इनकम टैक्स का नोटिस? परेशानी से बचने के लिए क्या करें

Income Tax Notice : महंगी जमीन खरीदने पर मिल सकता है इनकम टैक्स का नोटिस, क्या हो सकती है इसकी वजह? ऐसी नौबत न आए इसके लिए पहले से कर सकते हैं उपाय

Income Tax Notice : महंगी जमीन खरीदने पर मिल सकता है इनकम टैक्स का नोटिस, क्या हो सकती है इसकी वजह? ऐसी नौबत न आए इसके लिए पहले से कर सकते हैं उपाय

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Viplav Rahi
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Income Tax Notice on Buying Land : इनकम टैक्स विभाग 30 लाख से ज्यादा महंगी जमीन की खरीद पर पैनी नजर रखता है. (Image : Pixabay)

Income Tax Notice on Land Purchase : जमीन खरीदना हर आम आदमी के लिए एक बड़ा फैसला होता है. लेकिन कई बार यही फैसला परेशानियों में बदल जाता है, जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नोटिस आ जाता है. खासकर तब, जब जमीन की कीमत ज्यादा हो और खरीदने में खर्च की गई रकम आपकी घोषित इनकम से मेल नहीं खाती हो. दरअसल, टैक्स विभाग के पास अब हर प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन का डेटा मौजूद रहता है. इसलिए इनकम और खर्च के बेमेल आंकड़े आसानी से उनकी नजर में आ जाते हैं. आइए समझते हैं कि जमीन खरीदने पर कब आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस और इससे बचने का सबसे आसान तरीका क्या है.

30 लाख से ज्यादा की जमीन पर रहती है नजर 

जमीन या प्लॉट की खरीद अगर 30 लाख रुपये से ज्यादा हो, तो यह जानकारी रजिस्ट्रार ऑफिस द्वारा सेक्शन 285BA के तहत सीधे इनकम टैक्स विभाग को भेज दी जाती है. यह रिकॉर्ड आपके एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (Annual Information Statement - AIS) में भी दर्ज हो जाता है. इसके बाद विभाग यह चेक करता है कि आपकी घोषित इनकम इस खरीद को सपोर्ट कर रही है या नहीं.

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पिछले कुछ सालों में टैक्स निगरानी काफी सख्त हो चुकी है. हर जमीन खरीद का डेटा सिस्टम में दर्ज होता है और अगर आपकी इनकम के हिसाब से खरीद बड़ी दिखती है, तो इनकम टैक्स विभाग सीधे आपसे “धन का स्रोत” (Source of Funds) पूछने के लिए नोटिस भेज सकता है. कई बार ऐसे नोटिस उन लोगों को भी मिल जाते हैं, जिन्होंने जमीन खरीदने के लिए अपनी वाजिब बचत के पैसे निवेश किए हैं.

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टैक्स नोटिस आने की सबसे आम वजहें क्या हैं?

अक्सर नोटिस आने की सबसे बड़ी वजह आय और निवेश के बीच असमानता होती है. टैक्स विभाग देखता है कि आप अपनी घोषित आय से ज्यादा खर्च तो नहीं कर रहे. अगर हां, तो उन्हें टैक्स चोरी का शक हो सकता है.

कई बार आय के कुछ स्रोत अपने आप टैक्स सिस्टम में दर्ज नहीं हो पाते. ऐसे में विभाग आपसे सबूत मांग सकता है. ये स्रोत हो सकते हैं:

  • आपने जबसे रिटर्न भरना शुरू किया, उससे पहले की बचत के पैसे

  • माता-पिता या रिश्तेदारों से मिली रकम

  • विरासत में मिली रकम या घर

  • दोस्तों/रिश्तेदारों से लिया पर्सनल लोन

  • सोना, शेयर या किसी अन्य एसेट की बिक्री से आई रकम

अगर आपने जमीन कम कीमत पर दिखाई है जबकि स्टांप ड्यूटी की वैल्यू ज्यादा है, या फिर खरीद की कीमत में भारी डिस्काउंट दिख रहा है, तो भी नोटिस आने की संभावना रहती है.

ऐसे मामलों में विभाग आपसे 3 साल पहले तक की इनकम डिटेल्स मांग सकता है. अगर निवेश 50 लाख रुपये से ज्यादा का है, तो यह जांच 10 साल पीछे भी जा सकती है. इतना ही नहीं, स्टांप ड्यूटी वैल्यू अगर खरीद कीमत से 10% से ज्यादा हो तो इस अंतर को “Income from Other Sources” मानकर टैक्स भी लगाया जा सकता है.

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नोटिस आने पर क्या करें? 

सबसे जरूरी बात - नोटिस को नजरअंदाज कभी न करें. और घबराएं नहीं, उसमें पूछे गए सवालों के सही ढंग से जवाब दें. सबसे पहले नोटिस को ध्यान से पढ़ें और समझें कि विभाग कौन सी जानकारी या दस्तावेज की मांग कर रहा है.

इसके बाद ये दस्तावेज इकट्ठा करें:

  • बैंक स्टेटमेंट

  • लोन एग्रीमेंट

  • गिफ्ट डीड

  • गोल्ड/शेयर बेचने के सबूत

  • परिवार से मिले पैसों या विरासत के कागज

अगर समय कम है, तो कम से कम एक एक्नॉलेजमेंट (acknowledgement) फाइल करके समय बढ़ाने के लिए रिक्वेस्ट करें. गंभीर मामलों में टैक्स एक्सपर्ट या CA की मदद जरूर लें.

अगर आपने नोटिस को अनदेखा किया तो पेनल्टी भी लग सकती है. और अगर विभाग (Income Tax Department) को लगता है कि आय छिपाई गई है, तो नया नोटिस भेजकर आपकी इनकम का री-असेसमेंट भी किया जा सकता है.

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शहरी और गांव की जमीन से क्या फर्क पड़ता है?

अगर खरीदी गई जमीन शहरी सीमा के अंदर है, तो उसे कैपिटल एसेट माना जाता है और उसकी खरीद-फरोख्त पूरी तरह रिपोर्टेबल है. गांव की खेती वाली जमीन में भी अगर खरीद मूल्य ज्यादा है या इनकम का सोर्स साफ नहीं है, तो विभाग वहां भी सवाल पूछ सकता है.

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टैक्स नोटिस से बचने के सबसे आसान उपाय

आज जब हर लेन-देन डिजिटल रूप से दर्ज हो रहा है, तो बेहतर यही है कि खरीद से पहले ही अपनी तैयारी पुख्ता कर लें.

1. मनी ट्रेल बनाएं - यानी हर बड़ी रकम का रिकॉर्ड रखें. कैश में पेमेंट बिल्कुल न करें.

2. हर दस्तावेज तैयार रखें - चाहे माता-पिता से मदद मिल रही हो या रिश्तेदार से लोन, हर लेन-देन का लिखित प्रमाण रखें.

3. ITR अपडेट करें - अगर गिफ्ट, विरासत या अचानक मिली रकम को ITR में शामिल नहीं किया है, तो खरीद से पहले ITR अपडेट कर लें.

4. किसी भी बड़ी खरीद के फैसले से पहले अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से इस बारे में से सलाह-मशविरा कर लें.

5. अगर आपकी इनकम के सोर्स एक से ज्यादा हैं, तब तो प्रोफेशनल सलाह लेना बेहद जरूरी है. 

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