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Income Tax Refund Delay: 31 दिसंबर 2025 तक ITR प्रोसेस नहीं हुआ तो क्या सच में रिफंड नहीं मिलेगा? (AI Generated Image)
Income Tax Refund Delay : इस साल बहुत से टैक्सपेयर्स को अपने इनकम टैक्स रिफंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. और अब तो यह साल बीतने में कुछ ही घंटे बचे हैं. ऐसे में कई टैक्सपेयर्स के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर उनका ITR 31 दिसंबर 2025 तक प्रोसेस नहीं हुआ, तो उनके इनकम टैक्स रिफंड का क्या होगा? कहीं उनका रिफंड अटक तो नहीं जाएगा? खासकर तब, जब किसी ने रिवाइज्ड ITR या बिलेटेड ITR फाइल किया हो. बहुत बार सोशल मीडिया के जरिये मिलने वाली आधी-अधूरी जानकारी इस डर को और बढ़ा देती है. लेकिन इस बार में सही स्थिति क्या है? इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास ITR प्रॉसेस करने के लिए कितना समय होता है और टैक्सपेयर्स के अधिकार क्या हैं? इसे साफ-साफ समझना जरूरी है.
ITR फाइल करना ही आखिरी कदम नहीं है
अक्सर लोग मान लेते हैं कि ITR फॉर्म सबमिट होने के साथ ही उनका काम खत्म हो जाता है. जबकि हकीकत ये है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग (Income Tax Return Filing) का काम सही मायने में तब पूरा होता है, जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को प्रोसेस करके सेक्शन 143(1) के तहत इंटिमेशन जारी कर देता है. इस दौरान डिपार्टमेंट आपके द्वारा दी गई जानकारी को सिस्टम से मैच करता है और तय करता है कि रिफंड (Income Tax Refund) बनता है या नहीं, या फिर कोई टैक्स बकाया है.
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31 दिसंबर 2025 की तारीख पर क्या है असमंजस
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कमाई गई इनकम के लिए रिवाइज्ड ITR और बिलेटेड ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 है. यहीं से सबसे बड़ा भ्रम शुरू होता है. बहुत से टैक्सपेयर्स मान लेते हैं कि अगर इस तारीख तक ITR प्रोसेस नहीं हुआ, तो रिफंड चला जाएगा. जबकि कानून ऐसा नहीं कहता.
असल में यह तारीख ITR फाइल करने की डेडलाइन है, न कि ITR प्रोसेस करने की. दोनों में फर्क है, और यही फर्क समझना सबसे जरूरी है.
ITR प्रोसेसिंग के लिए कितना समय होता है
इनकम टैक्स कानून की धारा 143(1) के तहत सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर यानी CPC को ITR प्रोसेस करने के लिए समय दिया गया है. नियम के मुताबिक जिस वित्त वर्ष में ITR फाइल किया जाता है, उसके खत्म होने के 9 महीने के भीतर CPC को ITR की प्रोसेसिंग पूरी करनी होती है.
यानी अगर किसी टैक्सपेयर ने 31 जुलाई 2025, 16 सितंबर 2025 या फिर 31 दिसंबर 2025 को ITR फाइल किया है, तो ये सभी ITR वित्त वर्ष 2025-26 में फाइल माने जाएंगे. इस वित्त वर्ष का अंत 31 मार्च 2026 को होगा. इसके बाद 9 महीने जोड़ने पर CPC के पास 31 दिसंबर 2026 तक का समय होता है.
मतलब साफ है, ITR कब फाइल किया गया है, इससे प्रोसेसिंग की डेडलाइन नहीं बदलती. जुलाई में फाइल हो या दिसंबर में, CPC के पास उसे प्रॉसेस करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय है.
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डेडलाइन तक ITR प्रोसेस नहीं होने पर क्या होगा
अगर CPC तय समय सीमा के भीतर यानी 31 दिसंबर 2026 तक भी ITR प्रोसेस नहीं कर पाता, तो कानून के मुताबिक ITR उसी रूप में फाइनल मान लिया जाता है, जैसा टैक्सपेयर ने फाइल किया था. इसके बाद CPC उसमें सेक्शन 143(1) के तहत कोई एडजस्टमेंट नहीं कर सकता, चाहे वो टैक्स डिमांड भेजने का मामला हो या कुछ और.
यानी तय समय निकल जाने के बाद डिपार्टमेंट की ओर से कोई नया दावा या कटौती नहीं जोड़ी जा सकती. यह नियम टैक्सपेयर के हित में है.
क्या ऐसे में इनकम टैक्स रिफंड रुक जाएगा
सबसे अहम सवाल यही है. जवाब साफ है, नहीं. अगर ITR के मुताबिक टैक्स रिफंड बनता है और CPC तय समय में प्रोसेस नहीं करता, तो टैक्सपेयर का रिफंड पाने का अधिकार पूरी तरह से बना रहता है. इतना ही नहीं, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 244A के तहत टैक्सपेयर को ब्याज के साथ रिफंड दिया जाता है. यह ब्याज उस तारीख से गिना जाता है, जिस दिन से रिफंड बनता है, और रिफंड जारी होने की तारीख तक चलता है.
अगर लंबे समय तक कोई इंटिमेशन न मिले तो क्या करें
कई मामलों में टैक्सपेयर्स को आईटीआर फाइलिंग (ITR Filing) महीनों तक न तो रिफंड मिलता है और न ही कोई इंटिमेशन. ऐसे में चुप बैठने की जरूरत नहीं है. टैक्सपेयर ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसके अलावा e-Nivaran या CPGRAMS के जरिए भी शिकायत की जा सकती है.
यह कदम CPC को रिफंड क्लेम को प्रॉसेस करने की याद दिलाने का काम करता है. कई बार इसके बाद प्रोसेसिंग तेज हो जाती है.
डर नहीं, जानकारी जरूरी
31 दिसंबर की तारीख को लेकर अगर कोई डर है, तो उसकी वजह सही जानकारी नहीं मिलना है. कानून इस मामले में टैक्सपेयर्स के हितों की रक्षा करता है. अगर आपने समय पर ITR फाइल कर दिया है, तो रिफंड आपका हक है. देरी होने पर भी रिफंड रुकता नहीं है, बल्कि ब्याज के साथ मिलता है. इसलिए घबराने की जगह नियमों को ठीक से समझें और सही माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराएं.
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