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Gold Silver Rate Regulation : सोने और चांदी की खुदरा कीमतों को क्या सरकार रेगुलेट करेगी? संसद में वित्त मंत्रालय ने दिया इस सवाल का जवाब. (AI Generated Image)
Gold, Silver Retail Price Issue Raised in Parliament : भारतीय परिवारों के लिए सोना और चांदी सिर्फ कीमती मेटल नहीं, बल्कि बचत, सुरक्षा और परंपरा का प्रतीक हैं. लेकिन बीते कुछ सालों में इनकी कीमतें जिस तेजी से बढ़ी हैं, उसने आम खरीदार की चिंता जरूर बढ़ा दी है. इसी को लेकर संसद में सवाल उठा कि क्या सरकार खुदरा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों को रेगुलेट करने या उनमें दखल देने की तैयारी कर रही है. वित्त मंत्रालय ने इस पर साफ और विस्तृत जवाब दिया है.
Gold, Silver Retail Price : कौन तय करता है खुदरा कीमतें
संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) के दौरान लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने साफ कहा कि सोने और चांदी की कीमतें सरकार तय नहीं करती. राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि घरेलू कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रहे दाम, रुपये और डॉलर के एक्सचेंज रेट और टैक्स पर निर्भर करती हैं. उन्होंने कहा, “सोने-चांदी जैसे कीमती मेटल्स की कीमतें बाजार द्वारा तय होती हैं और सरकार कीमत तय करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं है.”
कीमतों में तेजी पर सरकार ने क्या कहा
वित्त मंत्रालय ने सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय फैक्टर्स को जिम्मेदार बताया है. वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि हाल के समय में जियो-पोलिटिकल टेंशन, ग्लोबल लेवल पर आर्थिक अस्थिरता और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की बढ़ी मांग ने सोने-चांदी की कीमतों को ऊपर की ओर धकेला है. उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों (Gold Rate) में तेजी आई है. इसका सीधा असर भारत जैसे इंपोर्ट पर निर्भर देश पर पड़ता है.
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इंपोर्ट घटा, इंपोर्ट बिल बढ़ा
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत ने सोना-चांदी के इंपोर्ट की मात्रा (Quantity) में तो कटौती की है, लेकिन कीमतें बढ़ने के कारण कुल मिलाकर ज्यादा विदेशी मुद्रा चुकानी पड़ रही है. साल 2014-15 में भारत ने करीब 9.15 लाख किलो सोना आयात किया था, जो 2024-25 में घटकर करीब 7.57 लाख किलो रह गया. इसके बावजूद सोने का इंपोर्ट बिल 34.4 अरब डॉलर से बढ़कर 58 अरब डॉलर तक पहुंच गया. चांदी में भी यही कहानी दिखती है, जहां इंपोर्ट की मात्रा में तेज गिरावट के बावजूद इंपोर्ट बिल (Import Bill) बढ़ा है.
कंज्यूमर को राहत देने के लिए क्या किया
हालांकि सरकार कीमतें तय नहीं करती, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं. वित्त मंत्रालय ने याद दिलाया कि जुलाई 2024 में सोने पर कस्टम ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी गई. पंकज चौधरी ने कहा, “उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत की.” इससे सोने की घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों के ज्यादा करीब आईं और तस्करी पर भी लगाम लगी.
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फिजिकल गोल्ड पर निर्भरता घटाने की कोशिश
सरकार ने यह भी बताया कि फिजिकल गोल्ड की मांग कम करने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) जैसी योजनाएं चलाई गईं. इनका मकसद घरों में पड़े बेकार सोने को सिस्टम में लाना और नए इंपोर्ट की जरूरत को कम करना है. मंत्रालय के मुताबिक बैंकों और कुछ खास एजेंसियों के जरिए ही इंपोर्ट करने से कीमतों में अचानक उछाल का खतरा भी घटा है.
RBI का सोना और रुपये की मजबूती
वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास मौजूद सोने का भंडार रुपये में भरोसा बढ़ाने का काम करता है. 31 मार्च 2025 तक आरबीआई के पास 879.58 टन सोना था, जो एक साल में 57.48 टन बढ़ा है. सरकार के मुताबिक यह भंडार देश की बाहरी स्थिरता और रुपये की मजबूती में मदद करता है. यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि पिछले 1 साल में सोने और चांदी की कीमतों (Silver Price) में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है.
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