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IPO की मजबूत पाइपलाइन, साल 2026 में 1.76 लाख करोड़ के आ सकते हैं आईपीओ : रिपोर्ट

2026 IPO Pipeline Looks Strong : इक्विरस कैपिटल के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच यानी 5 साल में कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 5,394 अरब रुपये जुटाए हैं, जो 2000 से 2020 के बीच जुटाए गए 4,558 अरब रुपये से ज्यादा है.

2026 IPO Pipeline Looks Strong : इक्विरस कैपिटल के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच यानी 5 साल में कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 5,394 अरब रुपये जुटाए हैं, जो 2000 से 2020 के बीच जुटाए गए 4,558 अरब रुपये से ज्यादा है.

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FE Hindi Desk
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IPo News : भारत के कैपिटल मार्केट्स के तेजी से बढ़ने से प्रमोटर और फाइनेंशियल निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचकर कमाई करने के बेहतर मौके मिले हैं. Photograph: (Image : Freepik)

Indian capital markets 2025 : भारत के कैपिटल मार्केट्स ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. पिछले 5 साल में रिकॉर्ड स्तर पर फंड जुटाया गया है. इक्विरस कैपिटल के लेटेस्‍ट आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 से 2025 के बीच यानी 5 साल में कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 5,394 अरब रुपये जुटाए हैं, जो कि साल 2000 से 2020 के बीच जुटाए गए कुल 4,558 अरब रुपये से भी ज्यादा है. 

इस तेजी को खास बनाने वाली बात यह है कि जहां पहले 20 सालों में बहुत ज्यादा आईपीओ लाने पड़े थे, वहीं अब कम आईपीओ में ही ज्यादा फंड जुटा लिया गया है. 2020 से 2025 के बीच केवल 336 IPO लॉन्‍च हुए, जबकि 2000 से 2020 के बीच 658 IPO जारी हुए थे.

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IPO का एवरेज साइज बढ़ रहा है

इक्विरस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, भावेश शाह ने कहा कि फंड जुटाने में इस बढ़ोतरी की एक वजह यह भी है कि पिछले 5 सालों में एवरेज आईपीओ साइज 1,605 करोड़ रुपये रहा है, जबकि 2000 से 2020 के बीच एवरेज आईपीओ साइज सिर्फ 692 करोड़ रुपये था. उन्‍होंने कहा कि साल 2026 में हमें IPO की मजबूत पाइपलाइन दिख रही है और उम्मीद है कि इस तरीके से लगभग 20 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई जाएगी.

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OFS का बढ़ता हिस्सा और बेहतर कमाई के अवसर

भारत के कैपिटल मार्केट्स के तेजी से बढ़ने से प्रमोटर और फाइनेंशियल निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचकर कमाई करने के बेहतर मौके मिले हैं. इसका असर आईपीओ में बढ़ते ऑफर फॉर सेल (OFS) के हिस्से में साफ दिखाई देता है.  

शाह ने कहा कि ऑफर फॉर सेल की स्वीकार्यता बढ़ने से प्राइवेट इक्विटी फंड्स को अपने निवेश से बाहर निकलने में मदद मिली है और प्रमोटरों को अपने सफल बिजनेस का कुछ हिस्सा बेचकर पैसा हासिल करने में भी आसानी हुई है. 

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 (Source: Equirus Capital)

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प्राइवेट इक्विटी (PE) के बाहर निकलने के तरीकों के रुझान भी इस तेजी को और मजबूत बनाते हैं. 2025 के पहले 10 महीनों में, PE एग्जिट में सेकेंडरी सेल का हिस्सा 2024 के 7% से बढ़कर 16% हो गया. हालांकि ब्लॉक डील्स अभी भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है, लेकिन उनका योगदान 2024 के 67% से घटकर जनवरी से अक्टूबर 2025 में 56% रह गया है. शाह का कहना है कि आने वाले सालों में यह डील वॉल्यूम और बढ़ेगा, क्योंकि 165 अरब डॉलर के PE निवेश मैच्योर हो रहे हैं और जल्द ही डिसइन्वेस्टमेंट के चरण में प्रवेश करेंगे.

2026 : आईपीओ मार्केट को दिशा देने वाले 3 ट्रेंड

1. न्यू एज और डिजिटल इकॉनमी वाली कंपनियों के आईपीओ के लिए निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी
2. बड़े आकार के आईपीओ जो नए रिकॉर्ड बनाएंगे और बाजार में अधिक लिक्विडिटी लाएंगे
3. छोटे शहरों तक कैपिटल मार्केट का विस्तार, यानी कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाले आईपीओ की संख्या और भागीदारी का बढ़ना

टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाले इश्यू अब कुल आईपीओ मूल्य का एक-चौथाई से भी ज्यादा हिस्सा रखते हैं, जबकि 2021 में यह हिस्सा सिर्फ 4% था.  

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भारत की तेज आर्थिक रफ्तार से भी सपोर्ट  

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है. इसका कारण मैन्युफैक्चरिंग में सुधार, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाएं, और मजबूत उद्यमिता है. भारत आज दुनिया में एक ऐसा देश बनकर उभरा है, जहां निवेशकों को लगातार और टिकाऊ विकास मिल सकता है. इस तेजी का असर कैपिटल मार्केट्स में घरेलू निवेश पर भी दिख रहा है. अब घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी, एनएसई में लिस्टेड कंपनियों में, विदेशी निवेशकों (FII) से भी अधिक हो गई है. 

(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का मकसद सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सलाह देना नहीं. निवेश का कोई भी फैसला अपने इनवेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह-मशविरा करने के बाद ही करें)

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