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Insurance Laws Amendment Bill 2025 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बीमा में 100% FDI की छूट देने वाला बिल पेश किया. (File Photo : PTI)
Insurance Laws Amendment Bill 2025 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में बीमा सेक्टर में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की इजाजत देने वाला बिल पेश कर दिया. इस बीमा अधिनियम संशोधन विधेयक 2025 (Insurance Laws (Amendment) Bill, 2025) को सरकार ने “सबका बीमा, सबकी रक्षा” के टाइटल के साथ पेश किया है. सरकार के मुताबिक इस बिल का मकसद बीमाधारकों की सुरक्षा को मजबूत करना, ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बीमा पहुंचाना और बीमा सेक्टर की रफ्तार तेज करना है.
यह बिल एक नहीं, बल्कि तीन बड़े कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव रखता है. इसमें Insurance Act, 1938, LIC Act, 1956 और IRDAI Act, 1999 शामिल हैं. सरकार का कहना है कि ये बदलाव उसकी दीर्घकालिक सोच, यानी 2047 तक ‘सबके लिए बीमा’ (Insurance for All) के लक्ष्य के अनुरूप हैं. साथ ही, इससे बीमा कंपनियों के लिए कारोबार करना भी आसान होगा.
बीमा सेक्टर में 100% FDI का प्रस्ताव
संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) में पेश इस बिल (Insurance Bill 2025) की सबसे बड़ी और चर्चित बात है बीमा कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव. सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय के लिए विदेशी पूंजी आएगी. साथ ही, नई तकनीक, बेहतर प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी देश में आएगा. इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा, क्योंकि बीमा की पहुंच बढ़ेगी और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी.
पॉलिसीधारकों की सुरक्षा पर खास जोर
बिल में उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए Policyholders’ Education and Protection Fund बनाने का प्रस्ताव है. इस फंड का काम लोगों को बीमा के प्रति जागरूक करना और पॉलिसीधारकों के अधिकारों की रक्षा करना होगा. इसके अलावा, बीमा नियामक IRDAI को यह अधिकार देने की बात कही गई है कि वह गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे को वापस ले सके. यानी अगर किसी कंपनी या बिचौलिए ने गैरकानूनी फायदा उठाया है, तो regulator उस रकम की वसूली कर सकेगा.
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बीमा में डिजिटल ढांचे को मिलेगी कानूनी ताकत
बिल में बीमा सेक्टर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का स्पष्ट कानूनी ढांचा देने का प्रस्ताव है. इसका फोकस पॉलिसीधारकों के डेटा की सुरक्षा पर रहेगा. इससे एक तरफ नई तकनीक और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा, तो दूसरी तरफ डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी.
कारोबार करना होगा आसान
बीमा एजेंटों और बिचौलियों के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन का प्रावधान लाने की बात कही गई है. इससे बार-बार रजिस्ट्रेशन की झंझट खत्म होगी और ग्राहकों को सेवाएं बिना रुकावट मिलती रहेंगी.
साथ ही, बीमा कंपनियों में शेयर ट्रांसफर के लिए IRDAI की मंजूरी की सीमा को 1% से बढ़ाकर 5% करने का प्रस्ताव है, जिससे निवेश और फैसले लेना आसान होगा.
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री-इंश्योरेंस सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
इस बिल में विदेशी री-इंश्योरेंस कंपनियों के लिए Net Owned Fund की शर्त को 5000 करोड़ रुपये से घटाकर 1000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है. इससे ज्यादा वैश्विक री-इंश्योरेंस कंपनियां भारत में आ सकेंगी और घरेलू री-इंश्योरेंस क्षमता मजबूत होगी.
LIC को मिलेगी ज्यादा आजादी
सरकार ने LIC को भी ज्यादा ऑपरेशनल फ्रीडम देने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत LIC अपने जोनल ऑफिस खोल सकेगी और विदेशों में अपने कारोबार को वहां के स्थानीय कानूनों के अनुसार ढाल सकेगी.
नियमों और पेनल्टी में पारदर्शिता
बिल में IRDAI के तहत नियम बनाने के लिए Standard Operating Procedure (SOP) लाने की बात कही गई है. इसके अलावा, पेनल्टी लगाने के लिए एक साफ और तार्किक ढांचा तय करने का प्रस्ताव है, ताकि सजा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दी जा सके. कुल मिलाकर, यह बिल बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव की नींव रखता है. इससे ज्यादा लोग बीमा सुरक्षा के दायरे में आएंगे, नए खिलाड़ी और निवेश बढ़ेगा और पॉलिसीधारकों का भरोसा और मजबूत होगा.
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