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Investment Tips : शेयर, प्रॉपर्टी से लेकर रिटायरमेंट तक - हर जगह कैसे काम आता है 7% का ये रूल

Long Term Investment Strategy : 7% Rule से शेयर में नुकसान कम करने, रिटायरमेंट प्लानिंग और रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट में मिलती है मदद, लेकिन आंख बंद करके फॉलो न करें कोई भी नियम.

Long Term Investment Strategy : 7% Rule से शेयर में नुकसान कम करने, रिटायरमेंट प्लानिंग और रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट में मिलती है मदद, लेकिन आंख बंद करके फॉलो न करें कोई भी नियम.

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Viplav Rahi
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7% investment rule for stocks, real estate, and retirement planning in Hindi

Stock Market-Property Investment Tips : एक नंबर जो आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग को कर सकता है मजबूत (Image : Pixabay)

Long Term Investment Strategy: निवेश से जुड़े फैसले करना जितना आसान लगता है, उतना है नहीं. गलत फैसले कभी-कभी पूरी प्लानिंग बिगाड़ देते हैं. इसीलिए कई पॉपुलर इनवेस्टमेंट रूल यानी निवेश के नियम इस्तेमाल किए जाते हैं ताकि फैसले करना आसान हो सके. ऐसा ही एक नियम है “7% Rule” यानी 7% का नियम. यह एक ऐसा रूल है, जिसे शेयर बाजार ट्रेडिंग से लेकर रिटायरमेंट प्लानिंग और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट तक, इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन ऐसे किसी भी नियम को सिर्फ एक इंडिकेटिव टूल की तरह लेना चाहिए. इन्हें आंख मूंदकर फॉलो करना ठीक नहीं होता.

शेयर बाजार में 7% का रूल 

ट्रेडिंग करते समय भावनाओं में बहकर फैसला करना सही नहीं होता. कई बार हमारे स्टॉक्स (Share) या निवेश की कीमत गिरती रहती है, लेकिन हम स्टॉप लॉस (Stop Loss) पर अमल करने की जगह रिकवरी की उम्मीद में इंतजार करते रह जाते हैं. इस चक्कर में कई बार बड़ा नुकसान हो जाता है. स्टॉक मार्केट इनवेस्टमें में 7% रूल का मतलब ये है कि आपने कोई शेयर जिस प्राइस पर खरीदा है, उससे 7% नीचे गिरने पर उसे बेच दें. यानी 7% का स्टॉप लॉस लगाएं. इससे आप अपनी पूंजी को आगे चलकर होने वाले बड़े नुकसान से बचा पाएंगे.

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यहां 7% की लिमिट इसलिए रखी गई है, क्योंकि आंकड़ों पर आधारित कई रिसर्च में ये पाया गया है कि बाजार में माहौल सामान्य हो, तो कोई शेयर 7-8% से ज्यादा गिरने का मतलब उस कंपनी में कोई गंभीर दिक्कत हो सकता है. यानी यह लेवल एक अलार्म की तरह काम करता है. इस नियम से ट्रेडिंग में डिसिप्लिन आता है और भावनाओं को कंट्रोल करके सही फैसला किया जा सकता है.

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स्टॉक मार्केट और शेयर की चाल देखकर करें फैसला

हालांकि हर शेयर एक जैसा नहीं होता. कुछ ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले होते हैं. ऐसे में 7% की जगह कभी-कभी 8-10% की दूरी रखनी पड़ सकती है. जबकि स्टेबल ब्लू-चिप स्टॉक्स के लिए 7% काफी है. यानी रूल वही है, लेकिन उसका इस्तेमाल स्टॉक मार्केट (Stock Market) और शेयर की चाल देखकर करना चाहिए.

रिटायरमेंट प्लानिंग में 7% विदड्रॉल रूल

रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) करते समय एक बड़ा सवाल ये होता है कि रिटायरमेंट फंड में जमा पैसे कितने साल तक चल पाएंगे? इस सवाल का जवाब देने में भी 7% का रूल इस्तेमाल किया जाता है. यहां इस रूल का मतलब है कि आप अपनी कुल रिटायरमेंट सेविंग का 7% हिस्सा पहले साल में निकाल सकते हैं. यानी अगर आपके पास 1 करोड़ रुपये हैं, तो पहले साल 7 लाख रुपये निकाल सकते हैं. इसके बाद हर साल महंगाई के असर को देखते हुए थोड़ी बढ़ोतरी कर सकते हैं.

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रिटायरमेंट प्लानिंग में 7% विदड्रॉल रूल कितना सही

हालांकि रिटायरमेंट प्लानिंग के मामले में 7% विदड्रॉल का रूल बहुत एग्रेसिव माना जा सकता है. अगर कॉर्पस की बची रकम पर रिटर्न थोड़ा कम मिले या बाजार में गिरावट आ जाए तो इतना ज्यादा पैसा निकालना आपके फंड को जल्दी खत्म कर सकता है. खासकर अगर रिटायरमेंट के बाद लंबे समय तक उस फंड पर निर्भर रहना हो. आमतौर पर 4% विदड्रॉल बेहतर और लॉन्ग टर्म के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. यानी  7% रूल को आंख मूंदकर फॉलो करने की जगह निवेश पर मिल रहे रिटर्न और आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए.

प्रॉपर्टी सेलेक्शन में 7% रिटर्न का रूल 

अगर आप किराये पर देने के लिए प्रॉपर्टी (Property) खरीदना चाहते हैं, तो इस रूल से तुरंत अंदाजा लग जाता है कि डील फायदेमंद है या नहीं. इसके अनुसार किसी भी प्रॉपर्टी से एक साल में मिलने वाली रेंटल इनकम प्रॉपर्टी की वैल्यू के कम से कम 7% के बराबर होनी चाहिए. यानी अगर किसी घर या दुकान की कीमत 1 करोड़ रुपये है, तो उससे एक साल में कम से कम 7 लाख रुपये किराया मिलना चाहिए. यह रूल प्रॉपर्टी खरीदते समय अच्छे ऑप्शन की पहचान करना आसान बनाता है.

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रूल से सिर्फ मदद लें, फैसला खुद करें

7% रूल शेयर बाजार, प्रॉपर्टी परचेज और रिटायरमेंट जैसे तीन बड़े आर्थिक फैसलों में आपकी मदद कर सकता है. लेकिन हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, उम्र और जोखिम उठाने की क्षमता अलग-अलग होती है. इसके अलावा मार्केट कंडीशन्स और भविष्य की संभावनाओं पर आधारित आउटलुक भी बदलते रहते हैं. इसलिए इस रूल को समझकर, जरूरत के हिसाब से एडजस्ट करके चलें. निवेश के बारे में सही फैसला तभी ले पाएंगे, जब किसी नियम पर आंख बंद करके यकीन करने की जगह सभी पहलुओं पर विचार करके कदम उठाएंगे.

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