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ITR Refund after missing deadline : 31 दिसंबर 2025 की डेडलाइन चूकने के बाद भी टैक्स रिफंड पाने का रास्ता खुला है. (AI Generated Image)
How to Claim Tax Refund After Missing 31 December 2025 ITR Filing Deadline: अगर आप 31 दिसंबर 2025 तक अपना संशोधित या लेट इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आपसे चूक तो हो गई है, लेकिन ऐसा नहीं है कि अब आप इसे सुधार ही नहीं सकते. इनकम टैक्स कानून में ऐसी स्थिति के लिए एक वैलिड तरीका मौजूद है, जिसके जरिए आप गलती सुधार सकते हैं और अगर रिफंड बनता है तो वह भी पा सकते हैं.
31 दिसंबर के बाद कौन से विकल्प बंद हो जाते हैं?
वित्त वर्ष 2024-25 यानी असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए संशोधित रिटर्न (Revised ITR) और लेट रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 थी. इस तारीख के बाद आप सेक्शन 139(5) के तहत संशोधित रिटर्न या सेक्शन 139(4) के तहत लेट रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते, भले ही आपका रिटर्न अभी CPC ने प्रोसेस न किया हो. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब कोई उपाय नहीं बचा.
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CPC के इंटिमेशन के बाद भी गलती सुधार सकते हैं
अगर आपका इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) प्रोसेस हो चुका है और आपको सेक्शन 143(1) के तहत CPC से इंटिमेशन मिला है, जिसमें साफ-साफ कोई गलती नजर आ रही है, तो आप सेक्शन 154 के तहत रेक्टिफिकेशन यानी सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं.
यह तरीका खास तौर पर उन्हीं गलतियों के लिए है जो रिकॉर्ड में साफ दिख रही हैं. जैसे कैलकुलेशन में गलती, टैक्स या ब्याज का गलत कैलकुलेशन, TDS या TCS का क्रेडिट न मिलना, या लॉस का सही कैरी फॉरवर्ड न होना.
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टैक्स रिफंड से जुड़े मामलों में क्या करें?
अगर CPC की इंटिमेशन में ऐसी गलती है, जिसकी वजह से आपका रिफंड (Income Tax Refund) कम हो गया है या मिला ही नहीं है, तो ITR-U दाखिल करने की बजाय सेक्शन 154 के तहत रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट डालना बेहतर विकल्प है. इसकी वजह ये है कि रेक्टिफिकेशन के जरिए न सिर्फ गलती सुधरती है, बल्कि रिफंड मिलने या बढ़ने की पूरी संभावना रहती है.
ITR-U आमतौर पर तब काम आता है जब आपने इनकम कम दिखाई हो या कोई जरूरी इनकम छोड़ दी हो, न कि तब जब गलती सिस्टम या प्रोसेसिंग की हो.
सेक्शन 154 का सीमित दायरा
सेक्शन 154 के तहत रेक्टिफिकेशन का दायरा सीमित होता है. इसके तहत आप नई छूट, नया डिडक्शन या नई इनकम नहीं जोड़ सकते. किसी विवादित कानूनी मुद्दे को भी इसमें नहीं उठाया जा सकता. सिर्फ वही गलती सुधारी जा सकती है जो रिकॉर्ड में पहले से मौजूद है और जिसे लेकर किसी बहस की जरूरत न हो.
अच्छी बात यह है कि सेक्शन 154 के तहत आवेदन CPC का इंटिमेशन जारी होने वाले वित्त वर्ष के अंत से 4 साल के भीतर किया जा सकता है. यानी यह ऑप्शन 31 दिसंबर 2025 के बाद भी उपलब्ध रहता है.
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रिटर्न प्रोसेस करने की टाइम लिमिट
अगर आपने वित्त वर्ष 2025-26 में असेसमेंट ईयर 2025-26 का रिटर्न दाखिल किया है, तो CPC के पास उसे प्रोसेस करने और सेक्शन 143(1) के तहत इंटिमेशन भेजने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय है.
अगर CPC इस तय समय सीमा के भीतर रिटर्न प्रोसेस नहीं कर पाता, तो बाद में कोई एडजस्टमेंट नहीं कर सकता. ऐसे मामलों में आपका रिटर्न वैसा ही मान लिया जाएगा, जैसा आपने दाखिल किया था. अगर उसमें रिफंड बन रहा है, तो वह देर होने पर ब्याज के साथ मिलना चाहिए.
रिटर्न प्रोसेसिंग में देर होने पर क्या करें
अगर आपका रिटर्न तय समय के भीतर प्रोसेस नहीं होता है, तो आप ई-फाइलिंग पोर्टल () पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं या e-Nivaran और CPGRAMS के जरिए फॉलो-अप कर सकते हैं. कई मामलों में इससे प्रोसेसिंग तेज हो जाती है.
कब और क्यों दाखिल करते हैं ITR-U
ITR-U यानी अपडेटेड रिटर्न एक अलग विकल्प है, लेकिन यह हर मामले में सही नहीं होता. इसे आप असेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीने के भीतर फाइल कर सकते हैं, लेकिन इसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है. समय बीतने के साथ यह अतिरिक्त टैक्स 25 फीसदी से बढ़कर 70 प्रतिशत तक हो सकता है.
इसलिए अगर गलती सिर्फ CPC के इंटिमेशन में दिख रही है, तो सेक्शन 154 ज्यादा आसान और कम खर्च वाला रास्ता है.
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