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Market 2025 : IPO और Nifty से लेकर स्मॉल कैप तक, बाजार और निवेशकों के लिए कैसा रहा साल

Market 2025 Review : IPO और Nifty 50 से लेकर स्मॉल कैप तक, बाजार के अलग-अलग मोर्चों पर इस साल कैसा रहा हाल, किन फैक्टर्स ने डाला सबसे ज्यादा असर.

Market 2025 Review : IPO और Nifty 50 से लेकर स्मॉल कैप तक, बाजार के अलग-अलग मोर्चों पर इस साल कैसा रहा हाल, किन फैक्टर्स ने डाला सबसे ज्यादा असर.

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FE Hindi Desk
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Indian Stock Market 2025 review Nifty Large Cap Small Cap IPO : Market 2025 में IPO, Nifty और Small Cap का कैसा रहा प्रदर्शन

Market 2025 : उतार-चढ़ाव भरे साल में IPO और लार्ज कैप बने रहे मजबूत (Image : AI Generated Image)

Market 2025 Review : गुजरता साल यानी कैलेंडर इयर 2025 शेयर बाजार के निवेशकों के लिए आसान साल नहीं रहा है. इस साल भारतीय शेयर बाजार में तेजी से ज्यादा ठहराव दिखा. और स्मॉल कैप में तो काफी हद तक गिरावट का रुझान रहा. कुल मिलाकर पूरे साल बाजार ने निवेशकों को यही सिखाया कि उतार-चढ़ाव के दौर में टाइमिंग नहीं, बल्कि अनुशासन बनाए रखना ही सबसे सही रणनीति होती है. आइए देखते हैं कि IPO और Nifty से लेकर स्मॉल कैप तक - बाजार के अलग-अलग मोर्चों पर 2025 का साल कैसा रहा है.

Nifty 2025: रिटर्न मिला, लेकिन उम्मीद से कम

2025 में भारतीय इक्विटी बाजार कंसॉलिडेशन मोड में रहा. Nifty 50 ने पूरे साल में करीब 9.4% का रिटर्न दिया, जो निवेशकों की उम्मीदों से भले ही कम रहा हो, लेकिन बाजार के हाल को देखते हुए काफी संतोषजनक कहा जा सकता है. ऊंचे वैल्यूएशन, कमजोर होती खपत और कॉरपोरेट कमाई की सुस्त रफ्तार ने बाजार की चाल को सीमित रखा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो 21 बड़े इंडेक्स में Nifty 50 तीसरा सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा. 2024 में जहां इसकी रैंकिंग 13वें नंबर पर थी, वहीं 2025 में यह फिसलकर 19वें स्थान पर पहुंच गया. 

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 कमजोरी सिर्फ कुछ सेक्टर्स तक सीमित नहीं

2025 की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कमजोरी सिर्फ कुछ सेक्टर्स तक सीमित नहीं रही. 100 करोड़ रुपये से ज्यादा मार्केट कैप वाली 2,617 कंपनियों में से करीब 69% शेयरों ने निगेटिव रिटर्न दिया. पिछले साल 2024 में यह आंकड़ा सिर्फ 28% था. फॉरेन इनवेस्टर्स के आउटफ्लो, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और जियो-पोलिटिकल टेंशन ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ को लेकर दिए गए बयानों ने भी बाजार में बेचैनी बढ़ाई.

कॉरपोरेट की कमाई में सुस्ती

शेयर बाजार की असली ताकत कॉरपोरेट अर्निंग होती है, लेकिन 2025 में यही कड़ी कमजोर रही. Nifty 50 में शामिल कंपनियों की कमाई लगातार 6 तिमाही तक सिंगल डिजिट में बनी रही. सितंबर 2025 में तिमाही के दौरान सालाना आधार पर (YoY) ग्रोथ सिर्फ 2% रही.
शहरी मांग की कमजोरी, लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव और एक्सपोर्ट से जुड़ी चुनौतियों ने कंपनियों के मुनाफे पर असर डाला. यही वजह रही कि बाजार में तेज उछाल देखने को नहीं मिला.

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लार्ज कैप टिके रहे, स्मॉल कैप फिसले

2025 में निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय स्टेबिलिटी को तरजीह दी. मजबूत ब्रांड और अनुमानित कमाई वाली बड़ी कंपनियों में भरोसा दिखा. Nifty 50 ने जहां 9.4% रिटर्न दिया, वहीं Nifty Midcap 150 सिर्फ 4.2% बढ़ पाया. स्मॉल कैप (Small Cap) के लिए साल मुश्किल भरा रहा और Nifty Smallcap 250 इंडेक्स करीब 8.4% गिर गया. मुनाफावसूली, कमाई के कमजोर अनुमान और करेंसी व सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतों ने स्मॉल कैप शेयरों पर ज्यादा दबाव बनाया.

सरकार और RBI ने ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए उठाए कदम

2025 में सरकार और RBI ने ग्रोथ को सहारा देने के लिए कई कदम उठाए. RBI ने रेपो रेट में कुल मिलाकर 125 बेसिस प्वाइंट (bps) की कटौती की. बजट में मिडिल क्लास को इनकम टैक्स से बड़ी राहत दी गई और सितंबर में GST की दरों में बड़ी कटौती की गई. इन नीतियों का पॉजिटिव असर पड़ना तो तय है, लेकिन बाजार और कमाई के आंकड़ों में इनका फायदा फौरन नजर नहीं आया. अच्छी बात ये रही कि महंगाई दर जनवरी में 4.3% से घटकर दिसंबर में 0.71% पर आ गई. चालू खाते का घाटा यानी करेंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit) भी GDP के 2.2% से घटकर 1.3% रह गया.

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FPI की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का सपोर्ट

2025 में फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाते दिखे. NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, FPIs ने साल भर में करीब 1.58 खरब रुपये के शेयर बेचे और 12 में से 8 महीनों में नेट सेलर रहे.
इसके उलट, घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने बाजार को मजबूती दी. उन्होंने करीब 4.85 खरब रुपये का निवेश किया. SIP के जरिए निवेश लगातार बढ़ा और SIP AUM का हिस्सा जनवरी के 19.6% से बढ़कर नवंबर में 20.5% हो गया. यह बताता है कि लंबी अवधि के निवेशकों ने बाजार के उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज करके लॉन्ग टर्म नजरिये के साथ सपोर्ट बनाए रखा.

2025 में IPOs ने जमाया रंग

2025 भारतीय बाजार के लिए एक मामले में ऐतिहासिक रहा - IPO के हिसाब से यह बेहद कामयाब साल बना. 101 मेनबोर्ड IPOs के जरिए 1.74 खरब रुपये से ज्यादा जुटाए गए. टाटा कैपिटल, HDB फाइनेंशियल सर्विसेज और LG इलेक्ट्रॉनिक्स ने अकेले 22% से ज्यादा फंड जुटाया.
खास बात यह रही कि सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशकों ने IPOs में करीब 73,000 करोड़ रुपये लगाए. इससे भारत की मजबूत कैपिटल मार्केट इमेज और पुख्ता हुई.

नियमों में बदलाव, बाजार की बुनियाद मजबूत

2025 में सेबी ने कई अहम सुधार किए. रिटेल एल्गो ट्रेडिंग के लिए सख्त नियम, T+0 सेटलमेंट की शुरुआत और डेरिवेटिव्स में रिस्क कंट्रोल पर खास जोर दिया. IPO से नियमों को भी ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाया गया, जिससे बड़ी कंपनियों और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ सके. इन बदलावों से बाजार को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लाने की कोशिश की गई.

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