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रिटायरमेंट के बाद ₹1 लाख प्रति माह कमाने के लिए कितनी बचत जरूरी है?

रिटायरमेंट में ₹1 लाख प्रति माह कमाना संभव है यदि जल्दी निवेश शुरू करें, नियमित रूप से निवेश करें, विकास और सुरक्षा का संतुलन बनाएं, कंपाउंडिंग का लाभ उठाएं और बढ़ते खर्चों, खासकर मेडिकल खर्चों, के लिए योजना बनाएं.

रिटायरमेंट में ₹1 लाख प्रति माह कमाना संभव है यदि जल्दी निवेश शुरू करें, नियमित रूप से निवेश करें, विकास और सुरक्षा का संतुलन बनाएं, कंपाउंडिंग का लाभ उठाएं और बढ़ते खर्चों, खासकर मेडिकल खर्चों, के लिए योजना बनाएं.

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Aanya Desai
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Retirement saving

जल्दी निवेश और स्मार्ट प्लानिंग से रिटायरमेंट में ₹1 लाख मासिक आय सुनिश्चित करें. Photograph: (Gemini)

कई लोग मानते हैं कि सेवानिवृत्ति (retirement) के बाद ₹1 लाख प्रति माह की आय एक आरामदायक और निश्चिंत जीवन का प्रतीक है जहाँ आप जीवन का आनंद ले सकते हैं, यात्रा कर सकते हैं, और बिना किसी आर्थिक चिंता के अपने खर्च पूरे कर सकते हैं. यह एक ऐसा टारगेट प्रतीत होता है जो चुनौतीपूर्ण भी है, लेकिन वास्तविकता में हासिल भी किया जा सकता है.

हालांकि, इस टारगेट के "कम्फर्ट" के पीछे कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न छिपे हैं जैसे कि जब नियमित वेतन बंद हो जाएगा तो यह स्थायी आय कैसे उत्पन्न होगी? इस सवाल का उत्तर मुद्रास्फीति (inflation), जीवन की अवधि (longevity) और आपकी जीवनशैली से जुड़ी आवश्यकताओं पर निर्भर करता है.

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आइए मीरा का उदाहरण लेते हैं. वह वर्तमान में 35 वर्ष की हैं और उन्होंने सोचा है कि जब वह रिटायर होंगी, तो उन्हें महीने के खर्चे पूरे करने के लिए ₹1 लाख की ज़रूरत होगी, ताकि वे आराम से जिंदगी बिता सकें. लेकिन जो राशि आज उन्हें वित्तीय सुरक्षा (financial comfort) जैसी लगती है, वह 25 साल बाद इतनी पर्याप्त नहीं रह जाएगी.  इसका मतलब यह है कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आज से ही आर्थिक तैयारी (financial planning) शुरू करना जरूरी है.

Step 1: भविष्य में ₹1 लाख की असली कीमत कितनी होगी?

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि समय के साथ ₹1 लाख की असली कीमत (value) कितनी बदल जाएगी.

आज के समय में ₹1 लाख की मासिक आय से आप किराया, किराना, बिजली-पानी जैसे बिल और कुछ लग्ज़री खर्च आराम से उठा सकते हैं. लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक "साइलेंट वेल्थ डिस्ट्रॉयर " भी होता है जिसे हम मुद्रास्फीति (inflation) कहते हैं. यह धीरे-धीरे हमारी परचेजिंग पावर को कम कर देता है. उदाहरण के लिए, अगर मुद्रास्फीति दर सालाना 6% भी रहे जो अपेक्षाकृत कम मानी जाती है तब भी किसी वस्तु की कीमत सिर्फ 12 साल में दोगुनी हो जाती है.

अगर आपकी उम्र अभी 35 वर्ष है और आप 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं, तो आज का ₹1 लाख भविष्य में लगभग ₹4.3 लाख प्रति माह के बराबर होगा. यानी, भले ही आपकी जीवनशैली न बदले, फिर भी आपके मासिक खर्च करीब चार गुना बढ़ जाएंगे.

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Step 2: अंदाज़ा लगाएँ कि आपको यह आय कितने समय तक चाहिए होगी

आपको यह सोचने की ज़रूरत है कि आप इस आय पर कितने साल तक निर्भर रहेंगे. आमतौर पर, रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति की जीवन अवधि 20 से 25 साल मानी जाती है. आजकल कई लोग 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र तक स्वस्थ जीवन जी रहे हैं. उदाहरण के लिए, अगर आप 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होने की योजना बना रहे हैं, तो आपको अपनी रिटायरमेंट आय की जरूरत कम से कम 85 वर्ष की उम्र तक माननी चाहिए. इसका मतलब है कि आपके पास लगभग 25 साल (या करीब 300 महीने) तक के मासिक खर्च पूरे करने की जिम्मेदारी होगी यानी बिना नियमित नौकरी की आय के, इतने लंबे समय तक खुद को वित्तीय रूप से सुरक्षित रखना होगा.

अगर आप अनुमान लगाते हैं कि रिटायरमेंट के समय आपका मासिक खर्च ₹4.3 लाख होगा (जो आज के ₹1 लाख के बराबर है), तो इसका मतलब हुआ आपकी वार्षिक खर्च राशि करीब ₹51 लाख होगी. अब अगर आप 25 साल तक रिटायरमेंट के बाद जीवित रहते हैं, तो कुल खर्च लगभग ₹12 से ₹13 करोड़ के बीच हो सकता है.

आपके निवेश (investments) रिटायरमेंट के बाद भी बढ़ते रहेंगे और रिटर्न (returns) देते रहेंगे. इसका मतलब यह है कि आपको सिर्फ एक मजबूत और सुव्यवस्थित शुरुआती कोष (well-structured initial corpus) तैयार करना होगा, जिससे आगे की आय उत्पन्न होती रहे.

नोट: आसानी से समझाने के लिए यहाँ हमने रिटायरमेंट के बाद की मुद्रास्फीति (post-retirement inflation) को शामिल नहीं किया है. फिलहाल आप यह मान सकते हैं कि आपके निवेशों से मिलने वाला रिटर्न मुद्रास्फीति के प्रभाव को संतुलित कर देगा यानी आपके पैसों की परचेजिंग पावर बनी रहेगी.

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Step 3: अपने निवेश को आपके लिए काम करने दें

रिटायरमेंट की तैयारी में सबसे अहम बात यह है कि आपका पैसा सिर्फ बचत खाते (savings account) में पड़ा न रहे, बल्कि आपके लिए काम करे और बढ़े. केवल ब्याज कमाना पर्याप्त नहीं होता; ज़रूरी है कि आपके निवेश ऐसे साधनों में लगाए जाएँ जो मुद्रास्फीति (inflation) के साथ-साथ उससे ज़्यादा रिटर्न दे सकें.ऐसे कई निवेश विकल्प हैं जो आपके पैसे को समय के साथ बढ़ा सकते हैं, जैसे इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity Mutual Funds), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) या पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF). ये निवेश औसतन अच्छा रिटर्न दे सकते हैं और आपके धन को लंबे समय में बढ़ाने में मदद करते हैं. इसे ही कंपाउंडिंग कहा जाता है जहाँ आपके निवेश से हुई कमाई खुद आगे चलकर नई कमाई उत्पन्न करती है. यही प्रक्रिया आपकी संपत्ति को तेज़ी से और गुणात्मक रूप से (exponentially) बढ़ाती है.

जल्दी निवेश शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि समय आपके पक्ष में काम करता है. उदाहरण के तौर पर, अगर आप हर महीने ₹35,000 का निवेश करें और उस पर औसतन 12% वार्षिक रिटर्न मिले (मान लेते हैं), तो 25 साल में यह राशि लगभग ₹6.6 करोड़ तक बढ़ सकती है.

अब मान लीजिए, 25 साल बाद आप इस पूरी राशि को किसी ऐसे निवेश या फिक्स्ड डिपॉज़िट में डालते हैं जो 8% वार्षिक ब्याज देता है. इस स्थिति में आपको हर महीने लगभग ₹4 लाख की आय प्राप्त होगी. तो यह योजना आपको वही रिटायरमेंट इनकम दिला सकती है जिसकी आपने शुरुआत में कल्पना की थी.

बेशक, इस गणना में कुछ और तत्वों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. उदाहरण के लिए, टैक्सेशन (taxation) का प्रभाव और जैसा पहले बताया गया, रिटायरमेंट के बाद की मुद्रास्फीति (post-retirement inflation) का असर. लेकिन मोटे तौर पर समझने का तरीका यही है कि रिटायरमेंट के समय आपके पास एक बड़ा पूंजी कोष (large pool of capital) होना चाहिए, क्योंकि उस समय आपकी जरूरतें और खर्चे आज की तुलना में कहीं अधिक होंगे.

Step 4: जितनी देर करेंगे, तैयारी उतनी कठिन होगी

समय आपके लिए रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी संपत्ति है और अगर आप इसे सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करते, तो यह आपका सबसे बड़ा जोखिम भी बन सकता है. हर साल जब आप आवश्यक राशि का निवेश नहीं करते, तो भविष्य में उसे पूरा करना और भी मुश्किल हो जाता है. इसे समझने के लिए उदाहरण देखें: अगर आप 35 साल की उम्र में रिटायरमेंट के लिए हर महीने लगभग ₹35,000 निवेश करना शुरू करते हैं, तो इस तरह आप एक पर्याप्त कोष (appropriate corpus) तैयार कर पाएंगे, जो आपकी रिटायरमेंट की जरूरतों को पूरा कर सके.

हालांकि, अगर आप निवेश शुरू करने में 40 साल की उम्र तक देर कर देते हैं, तो आपको हर महीने लगभग ₹65,000 निवेश करने की जरूरत होगी. और अगर आप इसे और आगे 45 साल की उम्र तक टाल देते हैं, तो यह राशि लगभग ₹1.25 लाख प्रति माह तक पहुँच सकती है.

यह वृद्धि सीधे कंपाउंडिंग की पावर के कारण होती है जो एक छुपी हुई लेकिन बेहद शक्तिशाली पावर है, जो समय के साथ आपके निवेश की कीमत को गुणात्मक रूप से बढ़ा देती है. कंपाउंडिंग का काम पहाड़ से नीचे लुढ़कती हुई स्नोबॉल जैसा ही होता है. जितनी जल्दी यह अपनी यात्रा शुरू करती है, उतनी ही तेज़ गति से भागती है और उतनी ही बड़ी होती जाती है. आपके निवेश भी इसी तरह काम करते हैं: जितनी लंबी अवधि तक आपका पैसा निवेशित रहता है, उतनी ही कम राशि आपको हर महीने निवेश करनी पड़ती है और उतना ही आसान होता है अपनी संपत्ति को बढ़ाना.

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Step 5: विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाएं

आय बढ़ाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपके निवेश को पहले से ऊँची दर पर बढ़ाने का मौका मिलता है.
स्मार्ट निवेशक कहते हैं कि एक सफल रिटायरमेंट प्लान केवल धन कमाने तक सीमित नहीं है बल्कि उस धन की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

विकास और सुरक्षा का संतुलित मिश्रण बिना किसी अनावश्यक जोखिम के आपके निवेशों में स्थिर वृद्धि (steady growth) सुनिश्चित करता है. इस तरह, आप अपने पैसे को बढ़ाते हुए उसे सुरक्षित भी रख सकते हैं और रिटायरमेंट के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं.

अपने वर्किंग ईयर्स में जल्दी निवेश शुरू करें और ऐसा निवेश चुनें जो ग्रोथ को बढ़ावा दे, जैसे कि इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS). ये निवेश समय के साथ आमतौर पर उच्च रिटर्न देने की संभावना रखते हैं. जैसे-जैसे आप रिटायरमेंट के करीब आते हैं, धीरे-धीरे अपने निवेश को सुरक्षित साधनों में स्थानांतरित करना शुरू करें. इसके लिए आप डेब्ट आधारित फंड्स, सरकारी योजनाएँ या अन्य स्थिर और आय उत्पन्न करने वाले निवेश चुन सकते हैं.

Step 6: बढ़ते खर्चों के लिए तैयारी करें, खासकर मेडिकल खर्चों के लिए

मेडिकल खर्च आमतौर पर अन्य खर्चों की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं. भारत में हेल्थकेयर की वार्षिक मुद्रास्फीति लगातार बढ़ रही है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि आज का ₹5 लाख का इलाज रिटायरमेंट के समय ₹10 से ₹20 लाख या उससे अधिक खर्च कर सकता है. इसका मतलब है कि रिटायरमेंट की योजना बनाते समय आपको मेडिकल खर्चों को भी अलग से ध्यान में रखना होगा, ताकि भविष्य में अचानक बड़े खर्चों का सामना करने पर आपकी वित्तीय सुरक्षा प्रभावित न हो.

जीवन के आरंभिक वर्षों में सही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में निवेश करना जरूरी है. इसके साथ ही, एक अलग मेडिकल सेविंग्स अकाउंट बनाएँ और रोज़मर्रा के खर्चों में भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना को ध्यान में रखें. हालांकि, 5-6% वार्षिक वृद्धि जीवन यापन की लागत में थोड़ी कम लग सकती है, लेकिन समय के साथ यह राशि काफी बड़ी हो सकती है. यदि आप इस बढ़ोतरी को अपने कॅल्क्युलेशन्स में शामिल करते हैं, तो आप यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि आपकी अनुमानित ₹1 लाख प्रति माह की आय वास्तव में आरामदायक और पर्याप्त होगी, और रिटायरमेंट के समय कोई आर्थिक चिंता नहीं होगी.

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Step 7: एक स्मार्ट निकासी (Withdrawal) योजना बनाएं

जब आप रिटायर होते हैं, तो आपका लक्ष्य सिर्फ बड़ा कोष रखना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि यह कोष लंबे समय तक चले. इसलिए आप सिस्टमेटिक विदड्रॉल प्लान का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह योजना आपको नियमित मासिक आय देती है, जबकि आपकी बाकी राशि निवेशित रहती है, जिससे आपके रिटायरमेंट फंड में और वृद्धि होने की संभावना बनी रहती है.

आपको अपने कोष का लगभग 4-5% वार्षिक रूप से निकालने की योजना बनानी चाहिए और हर साल इसे इन्फ्लेशन के अनुसार थोड़ा समायोजित करना चाहिए. इससे आपको स्टेबल फाइनेंसियल सिचुएशन बनाए रखने में मदद मिलेगी, चाहे मार्केट की परिस्थितियाँ कैसी भी हों. साथ ही, यह आपके रिटायरमेंट फंड को जल्दी खत्म होने से भी बचाएगा ताकि आप लंबे समय तक अपनी आय और जीवनशैली सुरक्षित रख सकें.

रिटायरमेंट में ₹1 लाख प्रति माह कमाना कोई सपना नहीं है यह एक वित्तीय लक्ष्य (financial goal) है जिसे आप जल्दी शुरुआत और नियमित निवेश के साथ हासिल कर सकते हैं. इसका मूल मंत्र है: विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना, कंपाउंडिंग की पावर का लाभ उठाना और बढ़ते खर्चों से खुद को सुरक्षित रखना.

डिसक्लेमर
नोट : इस लेख में फंड रिपोर्ट्स, इंडेक्स इतिहास और सार्वजनिक सूचनाओं का उपयोग किया गया है. विश्लेषण और उदाहरणों के लिए हमने अपनी मान्यताओं का इस्तेमाल किया है.

इस लेख का उद्देश्य निवेश के बारे में जानकारी, डेटा पॉइंट्स और विचार साझा करना है. यह निवेश सलाह नहीं है. यदि आप किसी निवेश विचार पर कदम उठाना चाहते हैं, तो किसी योग्य सलाहकार से सलाह लेना अनिवार्य है. यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है. व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं और उनके वर्तमान या पूर्व नियोक्ताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

To read this article in English, click here.

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