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मिडकैप फंड्स जोखिम और रिटर्न में ऊपर वाले फंड्स होते हैं, लेकिन स्मॉलकैप फंड्स से थोड़ा कम जोखिम वाले।
इस वर्ष भारतीय इक्विटी बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, मिडकैप्स ने 5 नवंबर 2025 तक 5.2% का एब्सोल्यूट रिटर्न देने में सफलता पाई है.
निवेशक धन सृजन की दिशा में प्रयास करते हुए मिडकैप (और स्मॉलकैप) शेयरों की ओर आकर्षित हुए हैं. अगस्त 2025 में, AMFI के आंकड़ों के अनुसार, मिडकैप फंड्स में अब तक की सबसे अधिक मासिक इनफ़्लो ₹53.31 बिलियन (bn) देखी गई. इसके बाद सितंबर महीने में ₹50.85 bn की दूसरी सबसे अधिक इनफ़्लो दर्ज की गई.
इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि मिडकैप शेयर लंबे समय में बढ़िया रिटर्न देते आए हैं. निफ्टी मिडकैप 150 TRI ने पिछले 5 साल में 27.9% और 10 साल में 18.7% का सालाना रिटर्न दिया है (5 नवंबर 2025 तक).
विशेष रूप से कोविड के निचले स्तरों के बाद का समय मिडकैप्स के लिए काफी प्रभावशाली रहा है.
इसके चलते मिडकैप फंड्स का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) भी तेजी से बढ़ा है. सितंबर 2020 में जहाँ AUM ₹904.16 बिलियन था, वह सितंबर 2025 तक बढ़कर ₹4.34 ट्रिलियन हो गया यानी लगभग 5 गुना बढ़ोतरी, या करीब 37% की सालाना ग्रोथ (CAGR) हुई.
फिर भी, वैल्यूएशन (कीमतें) को लेकर सावधान रहना ज़रूरी है. 5 नवंबर 2025 तक निफ्टी मिडकैप 150 का ट्रेलिंग PE 34 से ऊपर है, जो कि इसके 5 साल के औसत 30 से ज़्यादा है. हाँ, साल 2025 की शुरुआत में यह PE 44 था, वहाँ से थोड़ा कम हुआ है लेकिन फिर भी निवेश करते समय सावधानी ज़रूरी है.
मिडकैप म्यूचुअल फंड्स को नियम के अनुसार कम से कम 65% पैसा मिडकैप कंपनियों में ही निवेश करना होता है.
मिडकैप कंपनियाँ वे होती हैं जो मार्केट कैप के हिसाब से 101 से 250 नंबर की रैंक पर आती हैं. ये लार्जकैप से एक स्तर नीचे होती हैं, जहाँ लार्जकैप आमतौर पर टॉप 100 कंपनियाँ मानी जाती हैं.
लार्जकैप या ब्लूचिप कंपनियों के मुकाबले- जो पहले से ही बड़ी, मज़बूत और हर जगह पहुंच रखने वाली होती हैं और जिन्हें पैसे जुटाने में भी आसानी होती है- मिडकैप कंपनियों के पास उतने मौके और संसाधन नहीं होते. उनकी क्षमता सीमित होती है और उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, वे आर्थिक उतार-चढ़ाव के प्रति ज़्यादा संवेदनशील होती हैं. यानी, जब अर्थव्यवस्था अच्छी चल रही हो तो ये तेजी से आगे बढ़ती हैं, लेकिन स्थिति बिगड़ते ही इन पर असर जल्दी पड़ता है.
इस बात को ध्यान में रखते हुए, अगर आप मिडकैप म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको कम से कम 7–8 साल का लंबा समय लेकर चलना चाहिए. साथ ही, आपको ज्यादा जोखिम उठाने के लिए तैयार रहना होगा और ऐसे फंड चुनने होंगे जो रिस्क के हिसाब से अच्छा रिटर्न दे चुके हों.
हर मिडकैप फंड में पैसा डालकर अच्छे रिटर्न की उम्मीद नहीं की जा सकती. सोच-समझकर और प्लानिंग के साथ चुनाव करना ज़रूरी है.
इस एडिटोरियल में हम आपको 3 ऐसे मिडकैप म्यूचुअल फंड्स के बारे में बताएँगे, जिन्होंने लंबी अवधि की रोलिंग रिटर्न में अच्छा प्रदर्शन किया है और रिस्क-रिटर्न मापदंड जैसे स्टैंडर्ड डिविएशन, शार्प रेशियो, और सॉर्टिनो रेशियो पर भी बेहतर नतीजे दिए हैं.
सीधे शब्दों में कहें तो, इन फंड्स ने जोखिम को काबू में रखते हुए निवेशकों को बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न दिया है.
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#1 HDFC Mid Cap Fund
जून 2007 में लॉन्च हुआ यह फंड जिसे पहले HDFC Mid-Cap Opportunities Fund के नाम से जाना जाता था, मिडकैप कैटेगरी में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय और AUM के हिसाब से सबसे बड़ा फंड है. सितंबर 2025 के पोर्टफोलियो के अनुसार, यह फंड ₹848 बिलियन से ज़्यादा की संपत्ति मैनेज कर रहा है.
यह फंड उन शेयरों में निवेश करता है जिनमें अच्छी ग्रोथ की संभावनाएँ, मज़बूत वित्तीय स्थिति, टिकाऊ बिज़नेस मॉडल, और उचित वैल्यूएशन हो.
पोर्टफोलियो बनाने के लिए यह फंड बॉटम-अप अप्रोच अपनाता है—यानी फंड मैनेजर ट्रेंड्स या शॉर्ट-टर्म फड्स के पीछे नहीं भागते. इसके बजाय, वे कंपनी के असली बिज़नेस, मैनेजमेंट की गुणवत्ता, और लंबे समय में कमाई बढ़ने की क्षमता पर ध्यान देते हैं.
HDFC Mid Cap Fund आमतौर पर 70–80 शेयरों का बड़ा पोर्टफोलियो रखता है और किसी भी एक शेयर में निवेश को 5% से कम ही रखता है.
सितंबर 2025 के पोर्टफोलियो के अनुसार, फंड में कुल 73 शेयर शामिल हैं, जिनमें लगभग 66% मिडकैप, 20% स्मॉलकैप और 8% लार्जकैप कंपनियाँ हैं.
फंड के टॉप 10 शेयरों का कुल वजन 32.3% है, जिनमें Max Financial Services (4.7%), Balkrishna Industries (3.5%), Indian Bank (3.3%) जैसे नाम शामिल हैं.
कई सेक्टर्स में निवेश होने के बावजूद, फंड का सबसे बड़ा हिस्सा तीन सेक्टर्स में लगा है — ऑटो और उससे जुड़े बिज़नेस 16.3%, बैंकिंग 13.4%, और हेल्थकेयर 12.6%. ये तीनों मिलकर पोर्टफोलियो का 42.2% बनाते हैं.
फिलहाल, फंड लगभग 6% पैसा कैश और कैश जैसी सुरक्षित जगहों में रखे हुए है.
फंड एक बाय-एंड-होल्ड रणनीति अपनाता है, इसलिए फंड मैनेजर बेवजह पोर्टफोलियो में ज्यादा बदलाव नहीं करते. पिछले एक साल में पोर्टफोलियो टर्नओवर सिर्फ 14–25% के बीच रहा है, जो यह दिखाता है कि फंड मैनेजर अपने चुने हुए शेयरों पर मजबूत भरोसा रखते हैं.
फंड की रणनीति ऐसे शेयर चुनने की है जो बुनियादी तौर पर मजबूत हों और आगे अच्छे ग्रोथ की संभावना रखते हों. इसी वजह से फंड ने बेहतरीन रिटर्न दिए हैं. 3 साल और 5 साल की कंपाउंडेड रोलिंग रिटर्न क्रमशः 27.4% और 31% रही है, जो कैटेगरी के औसत और Nifty Midcap 150 – TRI दोनों से काफी बेहतर है (5 नवंबर 2025 तक).
फंड का जोखिम भी काफी नियंत्रित रहा है. इसका स्टैंडर्ड डिविएशन 13.6 है, जो कैटेगरी में सबसे कम में से एक है और Nifty Midcap 150 – TRI से काफी नीचे है.
इस वजह से रिस्क-एडजस्टेड आधार पर भी यह फंड बेहतर साबित होता है, जो इसके Sharpe Ratio (0.43) और Sortino Ratio (0.91) से साफ दिखाई देता है. ये दोनों आंकड़े बताते हैं कि फंड ने न सिर्फ अच्छे रिटर्न कमाए, बल्कि बेहतर तरीके से जोखिम को भी संभाला, और अपने बेंचमार्क और बाकी फंड्स से अच्छा प्रदर्शन किया.
HDFC Mid Cap Fund ने तेज़ी (bullish) और मंदी (bearish) दोनों तरह के बाज़ारों में लगातार मजबूत प्रदर्शन दिखाया है.
#2 Invesco India Midcap Fund
यह फंड अप्रैल 2007 में लॉन्च हुआ था और अपनी लगातार अल्फा जनरेट करने की क्षमता और सख्त जोखिम प्रबंधन (risk management) के लिए जाना जाता है.
मार्च 2020 के बाद से इसके AUM में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है. सितंबर 2025 तक यह फंड ₹85.18 बिलियन से ज्यादा की संपत्ति मैनेज कर रहा है.
मिडकैप कंपनियों में निवेश करते समय यह फंड उन कंपनियों को चुनता है जिनके पास टिकाऊ प्रतिस्पर्धी बढ़त, स्केलेबल बिज़नेस मॉडल, मज़बूत बैलेंस शीट, बेहतरीन कॉरपोरेट गवर्नेंस, और लंबी अवधि की साफ़ ग्रोथ विज़िबिलिटी हो. फंड का उद्देश्य ऐसे शेयरों में निवेश करना है जो लंबे समय में बेहतर रिटर्न दें और कम उतार-चढ़ाव (volatility) के साथ स्थिर प्रदर्शन कर सकें.
यह फंड भी ज्यादातर दूसरे मिडकैप फंड्स की तरह बॉटम-अप अप्रोच अपनाता है. यानी शेयर चुनते समय यह फंड मैनेजर कंपनी की असली वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और कैपिटल एफिशिएंसी पर फोकस करते हैं. उनका लक्ष्य ऐसे हाई-कन्विक्शन आइडिया चुनना होता है जो बुनियादी तौर पर मजबूत हों.
फंड का पोर्टफोलियो भी अच्छा खासा डाइवर्स है. यह आम तौर पर 45–50 शेयरों में निवेश करता है. सितंबर 2025 के पोर्टफोलियो के अनुसार, फंड में कुल 48 स्टॉक्स हैं जिनमें लगभग 64% मिडकैप, 18% स्मॉलकैप, और 15% लार्जकैप कंपनियाँ शामिल हैं.
फंड के टॉप 10 शेयर कुल पोर्टफोलियो का 41.1% हिस्सा बनाते हैं. इनमें Swiggy (5.1%), AU Small Finance Bank (5.1%), L&T Finance (4.9%) जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं.
फंड के शीर्ष तीन सेक्टर फाइनेंस (21.1%), हेल्थकेयर (18.3%), और रिटेल (14%) हैं. ये मिलकर कुल पोर्टफोलियो का 53.4% बनाते हैं, जो कुछ अन्य फंड्स की तुलना में थोड़ा ज़्यादा केंद्रित (concentrated) है.
फंड लगभग पूरी तरह निवेशित है, क्योंकि इसके कुल एसेट्स में कैश और कैश जैसी होल्डिंग्स सिर्फ 0.3% हैं.
पिछले एक साल में फंड का पोर्टफोलियो टर्नओवर 36% से 80% के बीच रहा है, जिसका मतलब है कि भले ही फंड लंबे समय के नजरिए से निवेश करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसमें कुछ हद तक खरीद-बिक्री (churning) भी होती है.
इसके बावजूद, फंड कोशिश करता है कि पोर्टफोलियो टर्नओवर संतुलित रहे यानी जितना ज़रूरी हो उतना ही बदलाव किया जाए, ताकि अधिकतम रिटर्न मिलें, जोखिम कम हो और साथ ही बार-बार खरीद-बिक्री की लागत भी नियंत्रण में रहे.
इस रणनीति की वजह से Invesco India Midcap Fund ने मजबूत प्रदर्शन किया है. 5 नवंबर 2025 तक, फंड ने 3 साल में 27.3% और 5 साल में 29.9% की कंपाउंडेड एनुअलाइज्ड रोलिंग रिटर्न हासिल की है. ये रिटर्न न सिर्फ कैटेगरी के औसत से बेहतर हैं, बल्कि Nifty Midcap 150 – TRI को भी अच्छे अंतर से पछाड़ते हैं.
फंड ने अपने निवेशकों को कैटेगरी औसत और Nifty Midcap 150 – TRI की तुलना में थोड़ा ज्यादा जोखिम में रखा है, क्योंकि इसका स्टैंडर्ड डिविएशन 16.19 है. इसके बावजूद, जब जोखिम के मुकाबले रिटर्न की बात आती है यानी रिस्क-एडजस्टेड बेसिस पर तो फंड ने इस जोखिम को अच्छी तरह जस्टिफाई किया है. इसके Sharpe Ratio (0.41) और Sortino Ratio (0.79) यह दिखाते हैं कि ज्यादा जोखिम होने के बावजूद फंड ने निवेशकों को संतुलित और बेहतर रिटर्न देने में सफलता हासिल की है.
मौजूदा बुल रन में इस फंड ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिसके कारण इसे काफी नए निवेशक भी मिले हैं. फंड का रिस्क-एडजस्टेड प्रदर्शन इसकी सही स्टॉक सिलेक्शन और उचित सेक्टर पोज़िशनिंग की वजह से मजबूत बना हुआ है.
#3 Nippon India Growth Mid Cap Fund
यह फंड अक्टूबर 1995 मेंReliance Growth Fund के नाम से लॉन्च हुआ था. बाद में, अक्टूबर 2019 में Nippon Life द्वारा Reliance Capital की एसेट मैनेजमेंट कंपनी में 75% हिस्सेदारी खरीदने के बाद इसका नाम बदलकर Nippon India Growth Mid Cap Fund कर दिया गया. यह मिडकैप फंड कैटेगरी की सबसे पुरानी स्कीम मानी जाती है.
इस फंड ने 2017 तक मल्टी-कैप रणनीति अपनाई थी, जिसमें यह बड़े, मिड और स्मॉल–कैप शेयरों में संतुलित निवेश करता था. लेकिन जब म्यूचुअल फंड कैटेगराइजेशन और नए नियम लागू हुए, तो फंड ने खुद को दोबारा पोज़िशन किया और आधिकारिक तौर पर मिड-कैप फंड की कैटेगरी में आ गया.
शुरुआत से ही इस फंड का रिकॉर्ड शानदार रहा है. महामारी के बाद इसके AUM में जबरदस्त तेजी आई है.
सितंबर 2025 के पोर्टफोलियो के अनुसार, यह फंड ₹393 बिलियन से अधिक की संपत्ति मैनेज कर रहा है — जो मिडकैप फंड्स (Midcap Funds) की सबकैटेगरी में तीसरा सबसे बड़ा फंड है.
फंड Growth at Reasonable Price (GARP) रणनीति अपनाता है, यानी ऐसे स्टॉक्स चुनता है जिनमें अच्छी ग्रोथ की क्षमता हो लेकिन उनकी कीमत भी बहुत ज़्यादा न हो. यह फंड बॉटम-अप अप्रोच पर काम करता है, जहाँ फोकस कंपनी की बुनियादी मजबूती पर होता है, न कि मार्केट ट्रेंड्स पर.
यह फंड मोमेंटम पर चलने वाले शेयरों से दूरी बनाकर रखता है और इसके बजाय क्वालिटी स्टॉक्स में निवेश करता है जो उचित वैल्यूएशन पर उपलब्ध हों. इन शेयरों को यह लंबे समय तक होल्ड करके चलता है.
इसी सोच ने फंड को अलग-अलग आर्थिक चक्रों में भी अच्छा प्रदर्शन करने में मदद की है. भारत की ग्रोथ स्टोरी के दौरान इस फंड ने कई उभरते हुए सेक्टर्स—जैसे इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो कंपोनेंट्स, और कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी—में उभरते हुए लीडर्स को जल्दी पहचाना और उनसे फायदा उठाया. आज भी ये सेक्टर्स अर्थव्यवस्था में तेज़ी पकड़ते जा रहे हैं, जिससे फंड को मजबूत सपोर्ट मिलता है.
इस फंड की सबसे बड़ी ताकत इसकी मजबूत पोर्टफोलियो क्वालिटी और पूरी तरह रिसर्च-आधारित निवेश रणनीति है.
यह फंड आमतौर पर 90–100 शेयरों का बड़ा और अच्छी तरह फैला हुआ पोर्टफोलियो रखता है. सितंबर 2025 तक फंड में 95 स्टॉक्स शामिल थे, जिनमें 65% मिडकैप, 21% लार्जकैप, और 10% स्मॉलकैप कंपनियाँ थीं.
फंड के टॉप 10 शेयर कुल पोर्टफोलियो का सिर्फ 22.9% बनाते हैं, जिससे यह दिखता है कि पोर्टफोलियो काफी विविध और संतुलित है. इन टॉप होल्डिंग्स में Fortis Healthcare (3.3%), BSE (2.6%), और Cholamandalam Financial Holdings (2.6%) जैसे नाम शामिल हैं.
कई सेक्टर्स में निवेश होने के बावजूद, फंड का सबसे बड़ा हिस्सा फाइनेंस (15.1%), ऑटो और उससे जुड़े उद्योग (13.3%), और हेल्थकेयर (11.5%) में लगा है. ये तीन सेक्टर्स मिलकर फंड के पोर्टफोलियो का 39.9% बनाते हैं.
फंड इस समय अपने कुल एसेट्स का करीब3% कैश और कैश जैसी होल्डिंग्स में रख रहा है. यानी लगभग पूरा पैसा मार्केट में लगा हुआ है.
यह फंड बार-बार खरीद-फरोख्त करने की बजाय ज़्यादातर समय buy-and-hold रणनीति अपनाता है. पिछले एक साल में इसका पोर्टफोलियो टर्नओवर सिर्फ 6–19% के बीच रहा है, जो बताता है कि फंड बहुत कम बदलाव करता है और अच्छे स्टॉक्स को लंबे समय तक पकड़े रखता है.
इस स्थिर और सोच-समझकर बनाए गए तरीके ने निवेशकों को अच्छा फायदा भी दिया है.
3 साल का रोलिंग रिटर्न 26.1% और 5 साल का 31.1% रहा है (5 नवंबर 2025 तक), जो न सिर्फ कैटेगरी एवरेज बल्कि Nifty Midcap 150 – TRI से भी बेहतर है.
हाँ, जोखिम के मामले में यह फंड थोड़ा ज्यादा एक्सपोज़र देता है—इसका स्टैंडर्ड डिविएशन 15.09 है, जो कैटेगरी और बेंचमार्क दोनों से ऊपर है. लेकिन अच्छी बात यह है कि फंड ने इस जोखिम को बेहतर रिटर्न से जस्टिफाई भी किया है.
फंड के Sharpe ratio (0.38) और Sortino ratio (0.77) दोनों ही कैटेगरी एवरेज और इंडेक्स से बेहतर हैं. खासतौर पर Sortino ratio, जो गिरते हुए मार्केट में नुकसान से बचाने की क्षमता को बताता है, उसमें फंड Nifty Midcap 150 – TRI से काफी आगे है.
3 सर्वश्रेष्ठ मिड कैप म्यूचुअल फंड्स का प्रदर्शन
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5 नवंबर 2025 तक का डेटा
रोलिंग पीरियड रिटर्न Direct Plan–Growth विकल्प के आधार पर कैलकुलेट किए गए हैं. 1 साल से अधिक की अवधि वाले रिटर्न एनुअलाइज़्ड कंपाउंडेड हैं.
स्टैंडर्ड डिविएशन जोखिम को दर्शाता है, जबकि शार्प रेशियो और सॉर्टिनो रेशियो यह बताते हैं कि फंड ने जोखिम को ध्यान में रखते हुए कितना बेहतर रिटर्न दिया (रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न). ये तीन साल की अवधि पर 6% प्रति वर्ष के जोखिम-मुक्त रिटर्न को मानकर निकाले गए हैं.
कैटेगरी एवरेज निकालते समय सभी मिड कैप फंड्स को शामिल किया गया है.
ध्यान रखें, यहाँ दिए गए रिटर्न पुराने (पिछले) रिटर्न हैं.
बीता हुआ प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता.
यहाँ दिए गए सिक्योरिटीज सिर्फ उदाहरण के तौर पर हैं, इन्हें किसी तरह की सिफारिश न माना जाए.
निवेश करने से पहले अपने इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र से सलाह जरूर लें.
म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन हैं. किसी भी योजना से जुड़े दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें.
स्रोत: ACE MF
आपको क्या जानना चाहिए
मिडकैप फंड्स में जोखिम काफी ज़्यादा होता है. यह जोखिम स्मॉलकैप से थोड़ा कम होता है, लेकिन फिर भी ये काफी तेज़ चढ़ाव-उतार वाले होते हैं. आसान भाषा में कहें तो इनमें जोखिम ज्यादा होता है इसलिए ये हर निवेशक के लिए नहीं होते. साथ ही, सारे मिडकैप फंड्स अच्छे रिटर्न (अल्फ़ा) नहीं कमा पाते और कई तो अपनी कैटेगरी के औसत से भी बेहतर प्रदर्शन नहीं करते.
इसके अलावा, मिडकैप स्टॉक्स भी ऊपर-नीचे होते रहते हैं. जब मार्केट चढ़ता है, तो ये बहुत तेज़ चलते हैं,
लेकिन जब मार्केट गिरता है, तो ये लार्जकैप्स से ज्यादा तेज़ और गहरी गिरावट दिखाते हैं.
इसलिए, हाल के कुछ महीनों या सालों के रिटर्न पर ज़्यादा भरोसा मत कीजिए — क्योंकि आगे भी वैसे ही रिटर्न मिलेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं होती.
आजकल जैसे मार्केट ऊपर-नीचे हो रहा है, ऐसे समय में लम्पसम (एक साथ बड़ी रकम) लगाने से बेहतर है कि SIP करें.
SIP में हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश होता है, जिससे रुपये की औसत लागत (rupee-cost averaging) काम करती है और जोखिम कम होता है.
हमेशा समझदारी से निवेश करें.
खुशहाल निवेश करें!
डिसक्लेमर
नोट : इस लेख में फंड रिपोर्ट्स, इंडेक्स इतिहास और सार्वजनिक सूचनाओं का उपयोग किया गया है. विश्लेषण और उदाहरणों के लिए हमने अपनी मान्यताओं का इस्तेमाल किया है.
इस लेख का उद्देश्य निवेश के बारे में जानकारी, डेटा पॉइंट्स और विचार साझा करना है. यह निवेश सलाह नहीं है. यदि आप किसी निवेश विचार पर कदम उठाना चाहते हैं, तो किसी योग्य सलाहकार से सलाह लेना अनिवार्य है. यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है. व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं और उनके वर्तमान या पूर्व नियोक्ताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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