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Investment 2026 : निवेशकों को शॉर्ट टर्म रिटर्न के बजाय संतुलन, अनुशासन और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए. (Freepik)
Why Multi-Asset Investing Matters : साल 2025 वैश्विक और घरेलू स्तर पर निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा है. टैरिफ, जियो-पॉलिटिकल टेंशन, जीएसटी सुधार और आईपीओ की बढ़ती गतिविधियों के बीच शेयर बाजार लंबे समय तक सीमित दायरे में घूमता रहा. हालांकि साल के दूसरे हिस्से में बाजार में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखने लगे. इसी दौरान 2 एसेट क्लास सोना (Gold) और चांदी ने निवेशकों को सबसे ज्यादा अट्रैक्ट किया. जहां सोने ने इस कैलेंडर ईयर में अबतक 63% रिटर्न दिया, वहीं चांदी ने 100% से ज्यादा की तेजी दिखाई, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी एक बार फिर वैकल्पिक एसेट्स की ओर बढ़ी.
पीजीआईएम इंडिया एसेट मैनेजमेंट के सीईओ, अभिषेक तिवारी का कहना है कि बीते रिटर्न को देखकर निवेश करना अक्सर गलत फैसलों की वजह बनता है. तेजी के बाद निवेश करने का ट्रेंड, जिसे “रिटर्न के पीछे भागना” कहा जाता है, लंबे समय में नुकसान भी पहुंचा सकती है.
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ऐसे माहौल में विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार का सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय निवेशकों को लंबी अवधि की सोच, अनुशासन और मल्टी-एसेट डायवर्सिफिकेशन (Multi Asset Allocation) पर ध्यान देना चाहिए. अलग-अलग एसेट क्लास में संतुलित निवेश न सिर्फ रिस्क को कम करता है, बल्कि समय के साथ कंपाउंडिंग के जरिए बेहतर रिटर्न देने की क्षमता भी रखता है.
रिटर्न के पीछे भागना गलत स्ट्रैटेजी
लॉन्ग टर्म रिटर्न चार्ट देखें तो पता चलेगा कि सोने में निवेशकों का इंटरेस्ट तब तेजी से बढ़ता है, जब इसके रिटर्न तेजी से बढ़ने लगते हैं. लेकिन जैसे ही कीमतें गिरती हैं, यह इंटरेस्ट भी कम हो जाता है. यह प्रतिक्रिया पर आधारित तरीका साफ बताता है कि निवेश में अनुशासन और निरंतरता कितनी जरूरी है.
बाजार (Stock Market) का सही समय पकड़ने की कोशिश करने की बजाय, निवेशकों के लिए बेहतर है कि वे लंबी अवधि और डायवर्सिफाइड निवेश रणनीति अपनाएं, जिससे सेंटीमेंट के आधार पर फैसले लेने से बचा जा सके. इसे अपनाने का एक असरदार तरीका है आउटसोर्स्ड एसेट एलोकेशन, यानी ऐसे फंड्स में निवेश करना जो अलग-अलग एसेट क्लास में अपने आप निवेश को संतुलित करते हैं.
प्रमुख एसेट क्लास और उनका व्यवहार
आज के आपस में जुड़े हुए और उतार-चढ़ाव भरे ग्लोबल वित्तीय माहौल में, सिर्फ एक ही एसेट क्लास पर भरोसा करना निवेशकों के लिए बेवजह का जोखिम पैदा कर सकता है, चाहे उसने हाल ही में कितना भी अच्छा प्रदर्शन क्यों न किया हो. इस समय मुख्य एसेट क्लास किस तरह का व्यवहार कर रहे हैं:
सोना और चांदी : ये कीमती धातुएं पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश मानी जाती हैं. महंगाई के समय या जब सामान्य करेंसी (फिएट करेंसी) कमजार होती है, तब ये अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. चांदी (Silver) का इस्तेमाल इंडस्ट्री में भी होता है, इसलिए यह इकोनॉमिक साइकिल से ज्यादा प्रभावित होती है. इससे इसमें उतार-चढ़ाव भी ज्यादा होता है, लेकिन मौके भी मिलते हैं.
शेयर (इक्विटी) : शेयरों में बढ़त की अच्छी संभावना होती है, खासकर उन क्षेत्रों में जो नई तकनीक और इनोवेशन से जुड़े होते हैं. लेकिन ये ब्याज दरों, कंपनियों की कमाई के अनुमान और आर्थिक बदलावों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं. अलग-अलग देशों और इंडस्ट्री में इनका प्रदर्शन काफी अलग हो सकता है.
फिक्स्ड इनकम (बॉन्ड) : बॉन्ड अपेक्षाकृत स्थिरता और फिक्स्ड इनकम देते हैं. हालांकि ब्याज दरें बढ़ने पर बॉन्ड की कीमतों पर दबाव आ सकता है, फिर भी ये जोखिम कम करने और पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए बहुत जरूरी होते हैं. खासकर सतर्क निवेशकों या रिटायरमेंट के करीब लोगों के लिए ये काफी उपयोगी हैं.
रियल एसेट्स और वैकल्पिक निवेश : रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और कमोडिटीज महंगाई से बचाव करने और निवेश में डाइवर्सिफिकेशन लाने में मदद कर सकते हैं. वहीं प्राइवेट इक्विटी और हेज फंड जैसे वैकल्पिक निवेश रिटर्न बढ़ा सकते हैं, लेकिन इनमें जोखिम अधिक होता है और पैसा जल्दी निकालना आसान नहीं होता.
डायवर्सिफिकेशन क्यों जरूरी है?
सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले एसेट क्लास के पीछे भागना, चाहे तेजी के समय शेयर हों या गिरावट के समय सोना, अक्सर गलत समय पर निवेश करने और बाजार के अधिक उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ा देता है. डायवर्सिफिकेशन इन जोखिम को कम करता है, क्योंकि इसमें पैसा अलग-अलग एसेट्स में लगाया जाता है जो अलग परिस्थितियों में अलग तरह से व्यवहार करते हैं.
NSE 500 की कंपनियों में, 1 अप्रैल 2023 से 31 मई 2024 के दौरान, कमजोर क्वालिटी और धीमी ग्रोथ वाली कंपनियों ने अच्छी क्वालिटी और तेज ग्रोथ वाली कंपनियों के मुकाबले कहीं अधिक रिटर्न दिया.
लेकिन अब यह ट्रेंड फिर से बदल रहा है. जून 2024 से, बाजार ने एक बार फिर तेज ग्रोथ और अच्छी क्वालिटी वाली कंपनियों को बेहतर रिटर्न देना शुरू कर दिया है. इन कंपनियों ने अप्रैल 2023 से मई 2024 के दौरान हुए अपने खराब प्रदर्शन का एक-चौथाई से ज्यादा हिस्सा वापस हासिल कर लिया है. इसलिए निवेशकों को शेयरों में भी अलग-अलग स्टाइल में निवेश करके पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना चाहिए.
आज की दुनिया में, जहां बदलाव लगातार हो रहा है, समझदारी से किया गया डायवर्सिफिकेशन एक मजबूत पोर्टफोलियो बनाने के लिए सिर्फ अच्छा नहीं, बल्कि बहुत जरूरी है. निवेशकों को शॉर्ट टर्म रिटर्न के बजाय संतुलन, अनुशासन और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए. इसलिए, अलग-अलग एसेट्स में डायवर्सिफाइड मल्टी-एसेट पोर्टफोलियो को जोखिम और रिटर्न के सही संतुलन में मदद करने दें, ताकि समय के साथ कंपाउंडिंग अपना कमाल दिखा सके.
(नोट : यह आर्टिकल ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट के आधार पर जानकारी के उद्देश्य से दिया गया है. यह फाइनेंशियल एक्सप्रेस के निजी विचार नहीं हैं. किसी कैटेगरी में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई है. बाजार में जोखिम होते हैं, इसलिए निवेश के पहले एक्सपर्ट की सलाह लें.)
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