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Mutual Fund Guide : म्यूचुअल फंड के ग्रोथ या डिविडेंड ऑप्शन में क्या है बेहतर? आपके लिए क्या रहेगा फायदे का सौदा

Mutual Fund Growth vs IDCW Option Explained : म्यूचुअल फंड के ग्रोथ और डिविडेंड ऑप्शन में क्या है फर्क, किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा, फैसला गलत हो जाए तो कैसे स्विच करें?

Mutual Fund Growth vs IDCW Option Explained : म्यूचुअल फंड के ग्रोथ और डिविडेंड ऑप्शन में क्या है फर्क, किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा, फैसला गलत हो जाए तो कैसे स्विच करें?

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Viplav Rahi
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Mutual Fund Growth vs IDCW Option explained in Hindi – Difference between Growth Option and Dividend Option, Mutual Fund Investment Guide for investors

Mutual Fund Investment Tips: ग्रोथ और IDCW ऑप्शन में कौन देगा ज्यादा रिटर्न, निवेशकों के लिए जरूरी गाइड (AI Generated Image)

Mutual Fund Investment Tips, Growth vs Dividend Option : म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय कई बार निवेशकों को ये कनफ्यूजन हो सकता है कि किसी स्कीम का ग्रोथ ऑप्शन (Growth Option) चुनें या डिविडेंड ऑप्शन (Dividend Option) बेहतर रहेगा? सही ऑप्शन का चुनाव आपके रिटर्न को बढ़ा सकता है, जबकि गलत सेलेक्शन से आपका मुनाफा घट सकता है. यही वजह है कि समझदारी से लिया गया फैसला आपके इनवेस्टमेंट की ग्रोथ को कई गुना बढ़ा सकता है. आइए जानते हैं दोनों ऑप्शंस का फर्क, फायदे और स्विच करने के नियम.

ग्रोथ ऑप्शन के फायदे (Growth Option Benefits)

म्यूचुअल फंड के ग्रोथ ऑप्शन (Mutual Fund Growth Option) में आपके निवेश पर जो भी मुनाफा बनता है, वो आपको कैश में नहीं दिया जाता. बल्कि, वह पैसा दोबारा उसी म्यूचुअल फंड फिर से इनवेस्ट कर दिया जाता है. इसका फायदा यह होता है कि आपके मुनाफे पर भी मुनाफा जुड़ने लगता है, जिससे कंपाउंडिंग का बेनिफिट (Compounding Benefit) मिलता है.
समय के साथ कंपाउंडिंग की यह ताकत आपकी पूंजी को तेजी से बढ़ाने में मदद करती है. यही वजह है कि ग्रोथ ऑप्शन में फंड की नेट एसेट वैल्यू (Net Asset Value) यानी NAV ज्यादा तेजी से बढ़ती है.

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जो निवेशक लंबी अवधि के लिए पैसे लगाकर कैपिटल ग्रोथ (Capital Growth) हासिल करना चाहते हैं, उनके लिए ग्रोथ ऑप्शन सबसे सही होता है.

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डिविडेंड ऑप्शन क्या है (Dividend Option Explained)

पहले जिसे डिविडेंड ऑप्शन (Dividend Option) कहा जाता था, उसे अब ‘इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विदड्रॉल’ (Income Distribution cum Capital Withdrawal) ऑप्शन यानी IDCW का नाम दे दिया गया है. इसमें फंड से मिलने वाला मुनाफा समय-समय पर निवेशकों में बांट दिया जाता है. हालांकि पेआउट की यह फ्रीक्वेंसी (Payout Frequency) फिक्स नहीं होती.
लेकिन जब भी ऐसा भुगतान किया जाता है, फंड की NAV घट जाती है. इसका मतलब है कि लंबे समय में आपकी पूंजी उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाती जितनी ग्रोथ ऑप्शन में बढ़ सकती है.

सेबी (SEBI) ने डिविडेंड ऑप्शन का नाम बदलकर IDCW इसलिए रखा ताकि निवेशकों को यह समझ में आए कि इस पेआउट में कुछ हिस्सा आपकी अपनी पूंजी से निकलता है. यह कोई गारंटीड इनकम (Guaranteed Income) जैसा विकल्प नहीं है.

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कौन सा विकल्प आपके लिए सही है? (Growth vs IDCW Option: Which is Better)

ग्रोथ और डिविडेंड ऑप्शन में आपके लिए कौन सा विकल्प सही है, यह पूरी तरह आपके आर्थिक लक्ष्य (Financial Goals) और निवेश के मकसद (Investment Objective) से तय होता है.
अगर आप रिटायर्ड हैं या किसी वजह से रेगुलर इनकम (Regular Income) आपके लिए जरूरी है, तो IDCW ऑप्शन आपके लिए बेहतर हो सकता है.
लेकिन अगर आप लंबी अवधि के लिए पैसे लगा रहे हैं और चाहते हैं कि आपका पैसा लगातार बढ़ता रहे, तो ग्रोथ ऑप्शन सही रहेगा.

लंबे समय में देखा जाए तो ग्रोथ ऑप्शन आमतौर पर बेहतर रिटर्न देता है, क्योंकि इसमें कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है. वहीं, IDCW ऑप्शन उन निवेशकों के लिए है जो समय-समय पर पैसा निकालना चाहते हैं और रेगुलर इनकम चाहते हैं.

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गलत विकल्प चुन लिया हो तो क्या करें? (How to Switch Mutual Fund Option)

म्यूचुअल फंड में सही ऑप्शन चुनना उतना ही जरूरी है जितना सही फंड चुनना. दोनों की अपनी-अपनी खूबियां और सीमाएं हैं. 

कई निवेशक शुरुआत में रेगुलर इनकम पाने के लिए या किसी कनफ्यूजन की वजह से IDCW चुन लेते हैं. लेकिन बाद में उन्हें महसूस होता है कि अगर उनका पूरा मुनाफा फंड में ही दोबारा निवेश होता, तो लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिल सकता था. ऐसा होने पर निवेशक अपने पैसों को ग्रोथ ऑप्शन में स्विच कर सकते हैं. लेकिन उससे पहले म्यूचुअल फंड पर लागू होने वाले टैक्स के नियमों (Mutual Fund Tax Rules) और एग्जिट लोड (Exit Load Charges) के असर को समझना जरूरी है. 

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IDCW से ग्रोथ ऑप्शन में कैसे स्विच करें 

अगर आप अपने म्यूचुअल फंड इनवेस्टमेंट को डिविडेंड या IDCW ऑप्शन से ग्रोथ ऑप्शन (Growth Option) में स्विच करना चाहते हैं, तो इसके लिए एक फॉर्म भरना होता है. फंड स्विचिंग की यह प्रॉसेस (Fund Switching Process) आमतौर पर 24 घंटे में पूरी हो जाती है.
लेकिन याद रखें कि इस तरह का स्विच रिडेम्पशन (Redemption) और नई खरीदारी (Fresh Purchase) दोनों ही माना जाता है. इसका मतलब है कि आपको यूनिट होल्ड करने की अवधि के हिसाब से एग्जिट लोड और कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) देना पड़ सकता है. इसलिए फैसला करने से पहले पूरी टैक्स देनदारी को जरूर समझ लें.

(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का मकसद सिर्फ जानकारी देना है, निवेश की सलाह देना नहीं. निवेश का कोई भी फैसला स्कीम अपने इनवेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह-मशविरा करने के बाद ही करें)

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