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Mutual Fund Investment : शेयर बाजार की तेजी के बीच म्यूचुअल फंड में निवेश की क्या है सही रणनीति? (Image : Pixabay)
Mutual Funds Investment Strategy When Markets Are High : जब भी शेयर बाजार अपने रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंचता है, निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आगे क्या किया जाए. क्या SIP जारी रखें, एकमुश्त पैसा लगाया जाए, सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान को आजमाएं या फिर अब मुनाफा वसूली का सही समय आ गया है? बाजार की मौजूदा स्थिति भी कुछ ऐसी ही है. निफ्टी अपने ऑल-टाइम हाई के करीब है, लेकिन कई सेक्टरों में उतार-चढ़ाव और वैल्यूएशन की गर्मी लोगों को उलझन में डाल रही है. ऐसे माहौल में समझदारी भरे फैसले आपकी लंबी अवधि की वेल्थ क्रिएशन पर बड़ा असर डाल सकते हैं.
तेजी के बावजूद SIP रोकना क्यों सही नहीं
बाजार ऊंचाई पर हो तो कई निवेशक नई खरीद को लेकर सतर्क हो जाते हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हाल के महीनों में SIP फ्लो में कोई कमी नजर नहीं आई. इसका मतलब है कि निवेशक अपने इनवेस्टमेंट को बिना किसी डर के जारी रख रहे हैं. और यह बिल्कुल सही तरीका भी है, क्योंकि SIP आपको उतार-चढ़ाव में एवरेजिंग का फायदा देती है. बाजार ऊंचाई पर हो या नीचे हो, लंबे समय में SIP ही सबसे असरदार रणनीति साबित होती है.
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एकमुश्त निवेश की जगह STP क्यों बेहतर
तेजी के समय अधिकतर निवेशक एकमुश्त पैसा लगाने (Lump Sum Investment) से बचते हैं और यही सही भी है. मौजूदा माहौल में नए एकमुश्त निवेश पर केवल तभी विचार करना चाहिए जब बाजार में कोई बड़ा करेक्शन दिखाई दे. ऐसे माहौल में सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (Systematic Transfer Plan) यानी STP की रणनीति भी कारगर साबित होती है. इसमें निवेशक एकमुश्त रकम को धीरे-धीरे इक्विटी में ट्रांसफर करते हैं, (How STP Works) ताकि गलत समय पर खरीदारी का जोखिम कम हो जाए.
मुनाफा वसूली या रिबैलेंसिंग?
तेजी में पोर्टफोलियो का इक्विटी हिस्सा कभी-कभी जितना होना चाहिए, उससे ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे समय पर जरूरत होती है पोर्टफोलियो को वापस अपने मूल एसेट एलोकेशन पर लाने की. इसे मुनाफा वसूली के बजाय रिबैलेंसिंग समझना ज्यादा सही है. यह जोखिम को संतुलित रखने का एक स्मार्ट तरीका है. अगर किसी निवेशक का कोई बड़ा फाइनेंशियल गोल अगले दो-तीन साल में नहीं है, तो केवल बाजार ऊंचा होने की वजह से मुनाफा वसूली करने की जरूरत नहीं है.
किस तरह के फंड्स बेहतर हो सकते हैं
बाजार में जब वैल्यूएशन ऊंचे हों, तो स्टेबिलिटी देने वाले लार्ज कैप और डायवर्सिफाइड फंड ज्यादा आकर्षक बन जाते हैं. यही कारण है कि निवेशक फिलहाल लार्ज कैप और फ्लेक्सी कैप फंड्स (Flexi Cap Funds) पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. इनकी वैल्यूएशन भी मिड और स्मॉल कैप की तुलना में काफी संतुलित दिख रही है. मिडकैप का P/E जहां 29 के आसपास है और स्मॉलकैप लगभग 26 के करीब, वहीं निफ्टी 50 का P/E अब भी अपने लॉन्ग टर्म एवरेज के करीब है.
तेजी के इस माहौल में मल्टी-एसेट फंड्स की लोकप्रियता भी बढ़ रही है. ये फंड इक्विटी, डेट और गोल्ड जैसे एसेट में संतुलन बनाए रखते हैं, जिससे रिस्क कम होता है. गोल्ड और सिल्वर में सीधे निवेश करने के बजाय इनमें मल्टी-एसेट फंड्स के जरिए पैसे लगाना बेहतर तरीका हो सकता है. और अगर कोई सीधे निवेश भी करता है तो कुल पोर्टफोलियो का 20% से ज्यादा हिस्सा इनमें नहीं लगाना चाहिए.
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क्या अभी सेक्टर बदलने का समय है?
हाल के महीनों में कई सेक्टर्स ने बहुत तेज रैली दिखाई है. खासतौर पर PSU बैंक, डिफेंस और रियल एस्टेट सेगमेंट में बड़ी तेजी आई है. दूसरी तरफ IT सेक्टर अभी भी वैल्यूएशन के मामले में आकर्षक दिख रहा है. हालांकि, सिर्फ वैल्यूएशन देखकर कोई फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है. बाजार का इतिहास बताता है कि सेक्टर-स्पेसिफिक निवेश की तुलना में डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड ज्यादा सुरक्षित और स्टेबल ऑप्शन होते हैं.
मौजूदा हालात में सबसे समझदारी भरा कदम है कि आप अपने इनवेस्टमेंट के रूटीन में बिना घबराहट के बने रहें. SIP जारी रखें, एकमुश्त निवेश में सावधानी बरतें, पोर्टफोलियो को समय-समय पर रिबैलेंस करते रहें, और अपने लंबी अवधि के लक्ष्यों पर फोकस बनाए रखें.
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