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NPS: रिटायरमेंट के बाद भी हर महीने आएगा पैसा, जानिए बुढ़ापे में कैसे मदद करता है एनपीएस

National Pension System: नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस एक ऐसी स्कीम है जो नौकरी के दौरान अनुशासित बचत करवाती है और रिटायरमेंट के बाद निश्चित मासिक पेंशन देती है, ताकि आय बंद होने पर भी खर्च चल सके.

National Pension System: नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस एक ऐसी स्कीम है जो नौकरी के दौरान अनुशासित बचत करवाती है और रिटायरमेंट के बाद निश्चित मासिक पेंशन देती है, ताकि आय बंद होने पर भी खर्च चल सके.

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FE Hindi Desk
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NPS: नेशनल पेंशन सिस्टम नौकरी के दौरान बचत को प्रोत्साहित करता है और रिटायरमेंट के बाद स्थिर पेंशन आय देता है. यह बचत को टिकाए रखकर आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है. (AI Generated Image)

National Pension System, NPS for Retirement: जरा सोचिए, जीवन का वह वक्त जब नौकरी खत्म हो चुकी हो लेकिन घर का खर्च, बिजली का बिल और दवाइयों का खर्च अब भी जारी हो. उस समय अगर हर महीने एक तयशुदा आमदनी आपके खाते में आती रहे तो कैसा सुकून मिलेगा. यही सुकून नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS आपको देता है. यह ऐसा निवेश है जो नौकरी के दिनों में अनुशासित बचत करवाता है और रिटायरमेंट के बाद निश्चित मासिक पेंशन सुनिश्चित करता है.

आज रिटायरमेंट प्लानिंग बाद में सोच लेंगे वाला फैसला नहीं रह गया है बल्कि यह आज की सबसे जरूरी वित्तीय योजना बन चुकी है. NPS खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो चाहते हैं कि उनके बुढ़ापे की जिंदगी आत्मनिर्भर और सुरक्षित हो.

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NPS: जानिए बुढ़ापे में कैसे मदद करता है एनपीएस

संतुलित विकास और स्थिरता

NPS में आपका पैसा तीन जगह लगाया जाता है – इक्विटी यानी शेयर मार्केट, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में. इससे एक तरफ आपके पैसे को ग्रोथ मिलती है और दूसरी तरफ जोखिम भी संतुलित रहता है.
युवा निवेशक ज्यादा इक्विटी रखकर तेजी से कंपाउंडिंग का फायदा उठा सकते हैं.

रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर सिस्टम अपने आप निवेश को सुरक्षित डेट फंड्स में शिफ्ट कर देता है. लाइफसाइकल ऑप्शन इसे पूरी तरह ऑटोमैटिक बना देता है यानी उम्र बढ़ने के साथ निवेश अपने आप समायोजित होता रहता है.

सबसे कम खर्च, सबसे ज्यादा कंपाउंडिंग

NPS की एक बड़ी खासियत यह है कि इसकी फंड मैनेजमेंट फीस बेहद कम है. इसका मतलब यह हुआ कि आपका ज्यादातर पैसा वास्तव में निवेशित रहता है. यही वजह है कि लंबे समय में यानी 15 से 25 साल में यह छोटी-सी लागत की बचत भी आपके रिटायरमेंट कॉर्पस को बड़ा बना देती है, वो भी बिना कोई अतिरिक्त जोखिम लिए.

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टैक्स में जबरदस्त बचत

NPS निवेशकों के लिए टैक्स बचाने का शानदार मौका भी देता है.

  • धारा 80C के तहत सामान्य कटौती मिलती है.
  • धारा 80CCD(1B) के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त विशेष छूट केवल NPS में उपलब्ध है.
  • नियोक्ता का योगदान भी टैक्स-फ्री हो सकता है.
  • रिटायरमेंट के समय आप अपने कॉर्पस का 60 प्रतिशत हिस्सा टैक्स-फ्री निकाल सकते हैं, जबकि शेष रकम से एन्युटी खरीदकर नियमित पेंशन पा सकते हैं.

इन टैक्स लाभों के चलते NPS के पोस्ट-टैक्स रिटर्न और भी आकर्षक बन जाते हैं.

निवेश में लचीलापन

NPS में आपको अपनी सुविधा के हिसाब से निवेश करने की आजादी मिलती है.

  • आप Active Choice लेकर खुद तय कर सकते हैं कि कितना पैसा शेयर में जाए और कितना डेट में.
  • या फिर Auto Choice चुन सकते हैं, जो आपकी उम्र के अनुसार निवेश का अनुपात बदलता रहता है.
  • चाहें तो फंड मैनेजर बदल सकते हैं, और जरूरत पड़ने पर सीमित आंशिक निकासी की भी अनुमति है जैसे घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई या मेडिकल इमरजेंसी में.

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रिटायरमेंट पर नियमित आय का भरोसा

जब आप 60 साल की उम्र में NPS से बाहर निकलते हैं तो जमा रकम का 60 प्रतिशत आप एकमुश्त निकाल सकते हैं और बाकी से एक एन्युटी खरीदकर आजीवन पेंशन प्राप्त कर सकते हैं.
इसमें कई विकल्प होते हैं – आजीवन पेंशन, पति या पत्नी के लिए संयुक्त पेंशन या खरीद मूल्य की वापसी का विकल्प. यह पेंशन आपकी जरूरतों के मुताबिक एक निश्चित आय का स्रोत बन जाती है जिससे आपकी बाकी बचतें अन्य जीवनशैली लक्ष्यों के लिए मुक्त रहती हैं.

अन्य निवेशों के साथ बेहतर तालमेल

NPS, EPF, PPF, VPF और म्यूचुअल फंड्स जैसे निवेशों का पूरक है. EPF जहां स्थिर ब्याज देता है वहीं म्यूचुअल फंड ग्रोथ लाते हैं. NPS इन दोनों के बीच पुल की तरह काम करता है जो कम लागत, टैक्स लाभ और आजीवन पेंशन के साथ आपके पोर्टफोलियो को मजबूत बनाता है.

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अगर आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी आपकी आय बनी रहे और जीवनशैली पर कोई असर न पड़े तो NPS आपके लिए सही और समझदारी भरा विकल्प हो सकता है.

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