/financial-express-hindi/media/media_files/2025/11/21/double-salary-on-overtime-money-ie-image-2025-11-21-19-02-44.jpg)
New Labour Codes Gratuity Rules : नए लेबर कोड में पर्मानेंट कर्मचारियों के लिए क्या हैं ग्रेच्युटी के नियम? (Image: IE File)
New Labour Code Gratuity Rules Explained in Hindi : नए लेबर कोड्स के लागू होने के बाद कर्मचारियों में सबसे ज़्यादा चर्चा ग्रेच्युटी को लेकर है. खासकर इसलिए क्योंकि नए कोड में फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी अब सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद ही ग्रेच्युटी के हकदार बन जाएंगे. इस बदलाव ने बड़ी संख्या में लोगों को राहत दी है. लेकिन इस नए नियम के बारे में फिलहाल थोड़ा कनफ्यूजन भी है. उलझन ये है कि 1 साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी का ये फायदा क्या अब पर्मानेंट कर्मचारियों को भी मिलेगा? आइए जानते हैं कि इस बारे में नए लेबर कोड में क्या कहा गया है.
किसे मिलेगी 1 साल में ग्रेच्युटी?
नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) के तहत लागू कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 (Code on Social Security 2020) के तहत सरकार ने फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों (Fixed-Term Employees - FTEs) और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स (contract workers) के लिए बड़ा बदलाव किया है. नए नियम कहते हैं कि ये कर्मचारी अब 5 साल की बजाय सिर्फ एक साल की लगातार नौकरी के बाद ही ग्रेच्युटी (Gratuity) पाने के हकदार हो जाएंगे. ये फैसला उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत देने वाला है, जिन्हें लंबे समय तक एक ही कंपनी में टिक कर नौकरी करने का मौका नहीं मिल पाता.
Also read : 8th Pay Commission की किस बात से परेशान हैं 69 लाख पेंशनर? राज्यसभा में पूछे गए सवाल ने क्यों बढ़ाई चिंता
क्या पर्मानेंट कर्मचारी भी 1 साल बाद ग्रेच्युटी के हकदार होंगे?
सबसे बड़ी गलतफहमी इसी सवाल पर हो रही है कि क्या पर्मानेंट कर्मचारी भी 1 साल बाद ग्रेच्युटी पाने के हकदार बन जाएंगे? कई लोग मान रहे हैं कि अगर कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को 1 साल में ग्रेच्युटी मिल सकती है, तो शायद यह नियम पर्मानेंट कर्मचारियों पर भी लागू होगा.
लेकिन सच्चाई यह है कि पर्मानेंट कर्मचारियों के लिए नियम वही पुराने हैं. उन्हें अब भी ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल की लगातार नौकरी पूरी करनी होगी. नए लेबर कोड में पर्मानेंट स्टाफ के लिए किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है.
हां, एक छूट पहले भी मौजूद थी और अब भी लागू है - अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाए या वह स्थायी रूप से विकलांग हो जाए, तो 5 साल का नियम उस मामले में लागू नहीं होता.
ग्रेच्युटी क्या होती है?
ग्रेच्युटी एक तरह का बोनस है, जो कंपनी अपने कर्मचारी को लंबे समय तक सर्विस करने पर देती है. यह भुगतान अब तक पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 (Payment of Gratuity Act 1972) के तहत किया जाता रहा है.
इसके तहत जब कर्मचारी रिटायर होते हैं, इस्तीफा देते हैं, या किसी और तरह से नौकरी छोड़ते हैं, तब यह रकम उन्हें दी जाती है. इसके पीछे सोच ये है कि कंपनी उस कंपनी को लंबे समय तक सर्विस देने का इनाम देती है.
नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी पर क्या कहा गया है?
23 नवंबर 2025 की PIB रिलीज़ के अनुसार वेतन की नई परिभाषा में सिर्फ बेसिक सैलरी (basic pay) ही नहीं, बल्कि डियरनेस अलाउंस (Dearness Allowance) और रिटेनिंग अलाउंस (retaining allowance) भी शामिल हैं.
इसमें यह भी कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी को मिलने वाले सारे भत्ते मिलाकर कुल सैलरी के 50% से ज्यादा हो जाते हैं, तो 50% से ऊपर की रकम भी EPF और ग्रेच्युटी जैसे सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट के कैलकुलेशन के लिए बेसिक वेतन में शामिल मानी जाएगी. यानी कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक सैलरी माना जाएगा. यह बदलाव इसीलिए किया गया है ताकि PF, ग्रेच्युटी, बोनस जैसी सोशल सिक्योरिटी स्कीमें कर्मचारियों को पहले से ज्यादा फायदेमंद साबित हों.
Also read : SBI म्यूचुअल फंड की टॉप 5 स्कीम ने 5 साल में 3 से 4 गुना किए पैसे, लंपसम पर 32% तक रहा CAGR
ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन कैसे होता है?
ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन करने के लिए कर्मचारी की अंतिम सैलरी के आधार पर किया जाता है. इसके लिए यह फॉर्मूला इस्तेमाल होता है :
Gratuity = Last-Drawn Monthly Wage ×15 / 26 × Completed Years of Service.
इसका मतलब ये है कि सर्विस के हर एक साल के एवज में 15 दिन का वेतन ग्रेच्युटी के तौर पर दिया जाएगा. इस कैलकुलेशन के लिए 6 महीने से ज्यादा की अवधि को 1 साल माना जाएगा, जबकि 6 महीने से कम की अवधि को जोड़ा नहीं जाएगा.
Also read : Investment Tips : शेयर, प्रॉपर्टी से लेकर रिटायरमेंट तक - हर जगह कैसे काम आता है 7% का ये रूल
क्या ग्रेच्युटी CTC का हिस्सा होती है?
हां, कर्मचारी के एलिजिबल होने पर उसे ग्रेच्युटी देना कंपनी की आर्थिक देनदारी है, जो भविष्य में कंपनी के खर्च में शामिल है. इसलिए आमतौर पर कंपनियां इसे CTC के हिस्से के तौर पर दिखाती हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी को यह रकम हर साल सैलरी की तरह दी जाती है. लेकिन आगे चलकर कंपनी को यह रकम देनी पड़ सकती है.
/financial-express-hindi/media/agency_attachments/PJD59wtzyQ2B4fdzFqpn.png)
Follow Us