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New Labour Codes : नए लेबर कोड से क्या घट जाएगी आपकी टेक-होम सैलरी, क्या है '50% वेज रूल' का चक्कर?

New Labour Codes Impact : नए लेबर कोड में 50% वेज रूल लागू होने से टेक-होम सैलरी कम हो सकती है, लेकिन PF, ग्रैच्युटी और पेंशन के बड़े फायदे मिलेंगे.

New Labour Codes Impact : नए लेबर कोड में 50% वेज रूल लागू होने से टेक-होम सैलरी कम हो सकती है, लेकिन PF, ग्रैच्युटी और पेंशन के बड़े फायदे मिलेंगे.

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FE Hindi Desk
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New Labour Codes impact on take home salary and PF benefits explained in Hindi

New Labour Codes : नए लेबर कोड लागू, टेक-होम सैलरी और PF-ग्रैच्युटी पर होगा बड़ा असर. (File Photo : Reuters)

New Labour Codes impact on take home salary and PF benefits explained in Hindi: नए लेबर कोड लागू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब आपकी हाथ में आने वाली सैलरी यानी टेक-होम पे कम हो जाएगी. दरअसल, सरकार ने वेज की एक समान परिभाषा तय कर दी है और इसी के कारण PF और ग्रैच्युटी के कैलकुलेशन में बड़ा बदलाव आता दिख रहा है. यह बदलाव भले ही अभी थोड़ा भारी लगे, लेकिन यह आपकी लंबी अवधि की बचत को काफी मजबूत बनाएगा.

क्या है नया ‘50% वेज रूल’

नए लेबर कोड के तहत वेजेज (wages) के कैलकुलेशन में अब मुख्य रूप से 3 चीजें शामिल होंगी - बेसिक पे (Basic Pay), डियरनेस अलाउंस (Dearness Allowance) और रिटेनिंग अलाउंस. सरकार के 21 नवंबर 2025 के नोटिफिकेशन के जरिये लागू किए गए सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 (THE CODE ON SOCIAL SECURITY, 2020) के मुताबिक, “वेज में अब बेसिक पे, डियरनेस अलाउंस और रिटेनिंग अलाउंस शामिल होंगे. कुल वेतन का कम से कम 50% हिस्सा (या सरकार द्वारा तय प्रतिशत) इन तीनों से मिलकर आना चाहिए, ताकि ग्रैच्युटी (Gratuity Corpus), पेंशन (Pension) और सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स के कैलकुलेशन में एकरूपता रहे.”

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अब अगर किसी कर्मचारी की सैलरी में इन तीनों हिस्सों को मिलाकर बनने वाली रकम 50% से कम होती है, तो बाकी अलाउंसेस में से रकम जोड़कर इसे 50% तक लाया जाएगा. यानी किसी भी हालत में कर्मचारी को मिलने वाली कुल रकम का कम से कम 50% हिस्से को ‘वेजेज’ मानकर EPF और ग्रैच्युटी का कैलकुलेशन किया जाएगा.

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रूल्स जारी होने पर और साफ होगी स्थिति  

हालांकि नोटिफिकेशन में ‘कम से कम 50% हिस्से’ के साथ ही साथ ‘या सरकार द्वारा तय प्रतिशत’ का जिक्र भी है. जिससे लगता है, सरकार चाहे तो इस 50% हिस्से में बदलाव भी कर सकती है. इस बारे में सरकार की तरफ से नए रूल्स और आम तौर पर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब (FAQ) जारी किए जाने के बाद और स्पष्टता आने की उम्मीद है.

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टेक-होम सैलरी क्यों घट सकती है?

कई कंपनियां अपने कर्मचारियों के बेसिक पे को कम रखकर सैलरी को कई अलाउंसेस में बांटती हैं. इससे PF और ग्रैच्युटी जैसी कटौतियां कम होती हैं और हाथ में आने वाली यानी ‘टेक होम सैलरी’ बढ़ जाती थी. लेकिन अब 50% वेज रूल लागू होने के बाद कंपनियों को बेसिक पे बढ़ाना पड़ सकता है. 

बेसिक पे बढ़ने पर कर्मचारियों का PF ज्यादा कटेगा. इसलिए कर्मचारी के हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है. लेकिन इसका पॉजिटिव असर ये होगा कि PF, ग्रैच्युटी और भविष्य में मिलने वाली पेंशन की रकम बढ़ जाएगी.

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कंपनियों के लिए क्या बदल जाएगा?

नए नियम के अनुसार बेसिक पे और DA मिलाकर कुल सैलरी का कम से कम आधा हिस्सा होना चाहिए. इसलिए कई कंपनियों को सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करना होगा. इससे कर्मचारियों के रिटायरमेंट बेनिफिट्स मजबूत होते नजर आएंगे. एंप्लॉयर का PF कंट्रीब्यूशन भी बढ़ेगा, जिससे कर्मचारियों का भविष्य ज्यादा सुरक्षित होगा.

PF, ग्रैच्युटी और पेंशन पर क्या होगा असर?

पहले कंपनियां बेसिक पे को कम रखकर कर्मचारी का फायदा तो दिखाती थीं, लेकिन इससे उनकी लंबी अवधि की सेफ्टी कमजोर रहती थी. अब सरकार ने लेबर रिफॉर्म्स के जरिये साफ कर दिया है कि सोशल सिक्योरिटी कर्मचारियों का हक है और इसे कमजोर नहीं किया जा सकता. नए फॉर्मूले से PF का बैलेंस बढ़ेगा, ग्रैच्युटी ज्यादा मिलेगी और पेंशन का आधार भी मजबूत होगा.

सरकार ने कहा है कि यह नियम एक “भविष्य के सुरक्षित कर्मचारी-परिवार” की दिशा में बड़ा कदम है. श्रम मंत्रालय के मुताबिक, “लेबर रेगुलेशन को मॉडर्न बनाते हुए और वर्कर्स वेलफेयर को बढ़ाते हुए यह कदम आत्मनिर्भर भारत के लिए मजबूत और फ्यूचर-रेडी वर्कफोर्स की नींव रखता है.”

क्या है बदलाव की बड़ी तस्वीर?

सरकार ने 29 पुराने लेबर कानूनों (Labour Laws) को आसान बनाते हुए उन्हें 4 बड़े कोड में बदल दिया है — वेजेज कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ कोड. इनका मकसद एक पारदर्शी, आसान और सुरक्षित लेबर सिस्टम बनाना है. 

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