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New Labour Codes : सैलरीड कर्मचारियों को अब किस हिसाब से मिलेगी ग्रेच्युटी? नए नियमों से क्या होगा फायदा

Gratuity Rules in New Labour Code : नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी के नियम बदल गए हैं. अब कर्मचारियों को 1 साल की नौकरी के बाद भी मिलेगा ग्रेच्युटी का फायदा. क्या हैं नए नियम और कैलकुलेशन का तरीका.

Gratuity Rules in New Labour Code : नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी के नियम बदल गए हैं. अब कर्मचारियों को 1 साल की नौकरी के बाद भी मिलेगा ग्रेच्युटी का फायदा. क्या हैं नए नियम और कैलकुलेशन का तरीका.

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Viplav Rahi
New Update
New Labour Code Gratuity Rules Big Update for Salaried and Contract Employees

New Labour Code Gratuity Rules Big Update : नए लेबर कोड में लागू ग्रेच्युटी के नियमों से कर्मचारियों को होगा बड़ा फायदा (File Photo : PTI)

Gratuity Rules Big Update in New Labour Code: नए लेबर कोड की आजकल काफी चर्चा है. खास तौर पर ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में हुए बदलाव नौकरी करने वालों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. पहले ग्रेच्युटी सिर्फ उन लोगों को मिलती थी जो किसी कंपनी में कम से कम 5 साल तक काम करते थे. लेकिन अब सरकार ने कामकाज के बदलते माहौल को देखते ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. जिनसे तमाम कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिलेगा. खासकर कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए ये नया लेबर कोड बड़ी खुशखबरी लेकर आया है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नया बदलाव क्या है और इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा.

ग्रेच्युटी होती क्या है?

किसी कंपनी में लंबे समय तक काम करने के बदले कर्मचारियों को एक तरह का बोनस दिया जाता है, जिसे ग्रेच्युटी कहते हैं. पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 (Payment of Gratuity Act 1972) के तहत ये पेमेंट किसी के रिटायर होने पर या नौकरी छोड़ने पर किया जाता है. इसे नौकरी छूटने पर या बदलते समय मिलने वाला सेफ्टी कुशन भी कहा जा सकते हैं. नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों (Gratuity Rules) में बड़ा बदलाव किया गया है.

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नए लेबर कोड में क्या है बड़ा बदलाव?

21 नवंबर 2025 से लागू किए गए नए लेबर कोड्स में कोड ऑन वेजेस (Code on Wages 2019), इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड (Industrial Relations Code 2020), सोशल सिक्योरिटी कोड (Social Security Code -2020) और ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन्स कोड (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code 2020) शामिल हैं. इन कोड्स के जरिये ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों बड़े अपडेट किए गए हैं:

अब 1 साल में मिलेगी ग्रेच्युटी 

पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल लगातार नौकरी करना जरूरी था.
अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए यह सीमा घटाकर 1 साल कर दी गई है.
मतलब अब ग्रेच्युटी सिर्फ स्थाई कर्मचारियों का हक नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम करते हैं.

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कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को मिलेगा स्थाई कर्मचारियों जैसा लाभ

कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को भी अब ग्रेच्युटी, प्रॉविडेंट फंड (PF) और दूसरे सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स मिलेंगे. यानी अब कंपनियों को सिर्फ परमानेंट स्टाफ को ही नहीं, बल्कि बाकी कर्मचारियों को भी सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट देने होंगे.

एक्सपोर्ट सेक्टर के कर्मचारियों को भी फायदा

नए नियमों के तहत एक्सपोर्ट यूनिट्स में फिक्स्ड-टर्म पर काम करने वालों को भी ग्रेच्युटी मिलेगी. इससे इन सेक्टर में काम करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी.

कैसे होता है ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन? (Gratuity Calculation)

इसके लिए तय फॉर्मूला है:

आखिरी महीने का वेतन × 15 / 26 × नौकरी के पूरे हुए वर्षों की संख्या (Last Drawn Monthly Wage × 15 / 26 × Completed Years of Service)

इसमें अंतिम महीने का वेतन (Last Drawn Wage) = बेसिक सैलरी (Basic Salary) + महंगाई भत्ता (Dearness Allowance)

ये फॉर्मूला नौकरी में पूरे किए गए हर साल के एवज में 15 दिनों की सैलरी दिए जाने पर आधारित है. 6 महीने से ज्यादा की अवधि को राउंड-ऑफ करके पूरा साल माना जाता है. 6 महीने से कम की अवधि को नहीं गिना जाता.

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लाखों कर्मचारियों को होगा फायदा

नौकरी करने वालों में बार-बार कंपनी बदलना अब आम बात है. ऐसे में ग्रेच्युटी के लिए 5 साल पूरे करने की शर्त के कारण बहुत सारे लोगों को ग्रेच्युटी का फायदा नहीं मिल पाता था. लेकिन लेबर रिफॉर्म (Labour Reforms) के तहत से लाए गए नए लेबर कोड के लागू होने पर अब ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को यह लाभ मिल पाएगा. इसके अलावा कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के साथ ही साथ एक्सपोर्ट सेक्टर में काम करने वाले लाखों लोगों के लिए भी नया लेबर कोड काफी फायदेमंद साबित होगा.

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