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Gratuity Rules New Labour Code : नए लेबर कोड लागू होने के बाद सैलरी और टैक्स स्ट्रक्चर में क्या होगा बदलाव? Photograph: (Image : Freepik)
New Labour Laws India Explained : नए लेबर कोड को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसकी वजह से आपकी घर ले जाने वाली सैलरी कम हो जाएगी और क्या आपको टैक्स में कोई राहत मिलेगी. सरकार ने 21 नवंबर से चार नए लेबर कोड लागू करने का फैसला किया है, लेकिन इनके असर को लेकर कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के मन में कई सवाल हैं. खासतौर पर टेक-होम सैलरी, EPF कंट्रीब्यूशन, ग्रेच्युटी और टैक्स देनदारी पर इन बदलावों का क्या सीधा असर पड़ेगा, यह चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा है.
नए नियम कब और कैसे लागू होंगे
सरकार ने वेज कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड को पुराने 29 लेबर कानूनों की जगह पर लागू करने का फैसला किया है. हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से डिटेल नोटिफिकेशन आने अभी बाकी हैं. इसी वजह से इन बदलावों को अब तक पूरी तरह से अमल में लाया नहीं जा सका है. लेबर सेक्रेटरी वंदना गुरनानी ने भी हाल में इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा था कि नए नियमों को पूरी तरह नोटिफाई करने में अभी ढाई-तीन महीने लग सकते हैं.
आपकी सैलरी स्ट्रक्चर में क्या होगा बदलाव
नए लेबर कोड का सबसे बड़ा बदलाव ‘वेज’ (Wages) की डेफिनिशन यानी परिभाषा में है. अब कर्मचारियों के बेसिक वेज में बेसिक पे (Basic Pay) के साथ-साथ डियरनेस अलाउंस (Dearness Allowance) और रिटेनिंग अलाउंस (Retaining Allowance) को जोड़ा जाएगा. नए नियमों के अनुसार आपकी कुल सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा वेज में माना जाएगा. यानी कंपनियां अब बेसिक पे को 30-40 प्रतिशत तक सीमित नहीं रख सकतीं. इसका सीधा असर आपके PF, ग्रेच्युटी और भविष्य में मिलने वाले सोशल सेफ्टी बेनिफिट्स के कैलकुलेशन पर पड़ेगा, क्योंकि सभी कैलकुलेशन इसी वेज पर आधारित होंगे.
इसके साथ ही अगर किसी कर्मचारी के HRA, कन्वेयंस, ओवरटाइम जैसे भत्तों को जोड़ने पर कुल रकम उसकी सैलरी के 50 प्रतिशत से ज्यादा होगी, तो 50 फीसदी से ऊपर की रकम को वेज में जोड़ दिया जाएगा. इससे आपका ‘कम्पल्सरी PF बेस’ बढ़ जाएगा और कंपनियों को पूरे स्ट्रक्चर पर नए सिरे से सोचना पड़ेगा.
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क्या नए कर्मचारियों के लिए लागू होंगे बदलाव
नहीं. लेबर कोड सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू हैं. फिर चाहे वे नए हों या कई सालों से काम कर रहे हों. कंपनियों को पुराने कर्मचारियों के CTC स्ट्रक्चर में भी बदलाव करने होंगे ताकि नए नियमों के तहत कैलकुलेशन सही तरीके से हो सके. इसका असर आपकी टेक-होम सैलरी पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बेसिक वेज बढ़ने से PF कंट्रीब्यूशन अपने आप बढ़ जाता है.
EPF कंट्रीब्यूशन पर कैसे होगा असर
अगर आपकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से कम है, तो EPF के 12 प्रतिशत कंट्रीब्यूशन के कारण टेक-होम सैलरी घट सकती है. लेकिन जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ऊपर है, उन्हें ‘excluded employee’ माना जाता है और वे मिनिमम 1,800 रुपये के कंट्रीब्यूशन का ऑप्शन चुन सकते हैं. कई बड़ी कंपनियां अपनी मर्जी से पूरे 12 प्रतिशत की रेट से कंट्रीब्यूशन देती हैं, जिससे ऐसे कर्मचारियों का EPF कंट्रीब्यूशन भी बढ़ सकता है और टेक-होम सैलरी कम हो सकती है.
क्या टैक्स देनदारी में मिलेगी राहत
EPF में अधिक कंट्रीब्यूशन का बड़ा फायदा तो बड़े रिटायरमेंट कॉर्पस के रूप में मिलेगा. लेकिन इसका एक लाभ पहले की तुलना में कम टैक्स देनदारी के रूप में भी मिल सकता है. यानी आपका PF बढ़ेगा तो आपकी टैक्स देनदारी घटेगी. नए और पुराने दोनों टैक्स रिजीम में PF से जुड़ी कटौतियों का फायदा मिलता है. नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) चुनने पर भी EPF में एंप्लॉयर का कंट्रीब्यूशन टैक्स-फ्री है, बशर्ते कुल एंप्लॉयर कंट्रीब्यूशन सालाना 7.5 लाख रुपये से ऊपर न हो. पुरानी टैक्स रिजीम में कर्मचारियों को ईपीएफ में अपने कंट्रीब्यूशन पर भी सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये की लिमिट में टैक्स छूट मिलती है.
यानी PF कंट्रीब्यूशन बढ़ने से मौजूदा टेक-होम सैलरी कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय में मजबूत रिटायरमेंट फंड के अलावा कम टैक्स देनदारी जैसे फायदे भी हो सकते हैं.
क्या सभी कर्मचारियों को मिलेगी 1 साल में ग्रेच्युटी?
नहीं. अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक एक साल में ग्रेच्युटी का फायदा केवल कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए या ‘fixed-term employees’ के लिए है. स्थायी कर्मचारियों के लिए 5 साल की लगातार सर्विस की शर्त अब भी पहले की तरह बनी हुई है.
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