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New Labour Codes: कामगारों के लिए बदले नियम, मिलेगा अब 20 लाख टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी, ओवरटाइम पर डबल सैलरी और 20 दिन में 1 छुट्टी का तोहफा

New Labour Codes: 20 लाख की टैक्स फ्री ग्रेच्यूटी, ओवरटाइम पर डबल सैलरी और हर 20 दिन पर एक छुट्टी जैसे नए नियम अब देश के 50 करोड़ से ज्यादा कामगारों को ज्यादा कमाई, ज्यादा हक और बेहतर काम का माहौल देने का क्लेम करते हैं.

New Labour Codes: 20 लाख की टैक्स फ्री ग्रेच्यूटी, ओवरटाइम पर डबल सैलरी और हर 20 दिन पर एक छुट्टी जैसे नए नियम अब देश के 50 करोड़ से ज्यादा कामगारों को ज्यादा कमाई, ज्यादा हक और बेहतर काम का माहौल देने का क्लेम करते हैं.

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FE Hindi Desk
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New Labour Codes: नए लेबर कोड देश के कामगारों के लिए कई अहम बदलाव लेकर आए हैं, क्योंकि ये उनकी कमाई और कामकाजी जिंदगी दोनों को पहले से बेहतर बनाने का दावा कर रहे हैं. (Image: X/@narendramodi)

भारत के नए लेबर कोड देश के 50 करोड़ से ज्यादा मजदूरों की ज़िंदगी बदलने वाले हैं. ये नए नियम मजदूरी, काम के घंटे, सोशल सिक्योरिटी और काम की जगह की सुविधाओं से जुड़े पुराने कानूनों को पूरी तरह नए ढंग से व्यवस्थित करते हैं.

इनमें तीन बदलाव खास तौर पर हर कर्मचारी को सीधे राहत देते हैं—पहला, ग्रेच्युटी की सीमा पहले की तरह 20 लाख रुपये ही रहेगी; दूसरा, ओवरटाइम की मजदूरी दोगुनी ही मिलेगी; और तीसरा, छुट्टी मिलने का नियम अब काफी आसान हो गया है. अब कर्मचारी केवल 180 दिन काम करने के बाद हर 20 दिन पर एक छुट्टी का हकदार होगा. ये तीनों बदलाव मिलकर मज़दूरों के अधिकारों में दशकों बाद सबसे बड़ा सुधार माने जा रहे हैं.

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नए लेबर कोड में पहले की 29 अलग-अलग मज़दूरी और श्रम से जुड़े कानूनों को समेटकर चार कोड बनाए गए हैं—वेज़ कोड 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और ऑक्युपेशनल सेफ़्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020.

श्रम मंत्रालय ने कहा कि यह ऐतिहासिक सुधार कंपनियों के लिए नियमों का पालन आसान बनाता है, पुराने और उलझे प्रावधानों को आधुनिक बनाता है और एक साफ-सुथरा एवं प्रभावी ढांचा तैयार करता है, जिसमें कारोबार करना भी आसान होगा और मजदूरों के अधिकार और हित भी सुरक्षित रहेंगे.

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ग्रेच्यूटी की 20 लाख टैक्स-फ्री लिमिट बरकरार

सरकार ने टैक्स-फ्री ग्रेच्यूटी की सीमा को 20 लाख रुपये पर ही बनाए रखा है, जो खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है जो लंबे समय से नौकरी कर रहे हैं और रिटायरमेंट के करीब हैं.

यह 20 लाख रुपये वाली सीमा दरअसल वह रकम है जिस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना पड़ता. 2018 में यह सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई थी. इसका मतलब साफ है कि अगर आपकी ग्रेच्यूटी 20 लाख रुपये से ज्यादा है तो जितनी भी राशि इस सीमा से ऊपर होगी, वह आपकी टैक्सेबल इनकम में जोड़ दी जाएगी और उसी हिसाब से टैक्स लगेगा, जिस स्लैब में आपकी आय आती है.

5 साल नहीं, अब सिर्फ 1 साल की नौकरी पर मिलेगा ग्रेच्यूटी का फायदा

ग्रेच्यूटी पाने का नियम अब कर्मचारियों के पक्ष में बिल्कुल बदल गया है. पहले किसी कंपनी में लगातार 5 साल काम करना जरूरी था तभी कर्मचारी ग्रेच्यूटी का हकदार बनता था, लेकिन अब यह अवधि घटाकर सिर्फ 1 साल कर दी गई है. यानी संगठित हो या असंगठित, किसी भी सेक्टर में काम करने वाला कर्मचारी अगर अपनी कंपनी में 1 साल पूरा करता है तो वह ग्रेच्यूटी पाने का हकदार होगा.

फिक्स्ड-टर्म यानी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी अब बिना 5 साल की शर्त पूरी किए ग्रेच्यूटी मिलेगी. इससे ग्रेच्यूटी का लाभ बहुत बड़े वर्ग तक पहुँच जाएगा.

यह बदलाव इसलिए भी सबसे ज़्यादा सराहा जा रहा है क्योंकि ग्रेच्यूटी रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों की जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा होती है और अब ज्यादा लोग इस सुरक्षा का फायदा उठा सकेंगे.

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अब हर 20 दिन काम पर मिलेगी 1 छुट्टी, पात्रता सिर्फ 6 महीने में पूरी

सरकार ने नए ओक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड के तहत कर्मचारियों के लिये पेड लीव पाना पहले से कहीं आसान बना दिया है.

240 दिनों के बजाय 180 दिनों के बाद छुट्टी के लिए पात्रता

पहले सालाना छुट्टी पाने के लिये 240 दिन काम करना जरूरी था, लेकिन अब यह शर्त घटाकर 180 दिन कर दी गई है. यानी नया कर्मचारी भी छह महीने काम करने के बाद लीव बेनिफिट का हकदार बन जाएगा.

अब हर 20 दिन काम पर मिलेगा 1 दिन का अवकाश

दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि अब हर 20 दिन काम करने पर एक दिन की अर्जित छुट्टी मिलेगी. इससे कर्मचारियों के लिये छुट्टियाँ जमा करना पहले से ज्यादा आसान और न्यायसंगत हो जाएगा.

तय घटों से ज्यादा काम करने पर मिलेगी दोगुनी सैलरी

यह सुधार खास तौर पर कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स, सीजनल मजदूरों, माइग्रेंट वर्कर्स और उन इंडस्ट्री में काम करने वालों के लिए बड़ी राहत है जहां कर्मचारियों की आवाजाही बहुत ज्यादा होती है और पहले 240 दिन की शर्त पूरी करना मुश्किल होता था.

ओवरटाइम के नियमों को जिस तरह मजबूत किया गया है, वह दिहाड़ी मजदूरों और फैक्ट्री में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. नए लेबर कोड के तहत अब तय काम के घंटों से ज्यादा काम कराने पर नियोक्ता को दोगुनी मजदूरी देनी होगी. साथ ही कंपनियों को ओवरटाइम का पूरा और साफ रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा और किसी भी कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना ओवरटाइम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.

अब तक दोगुनी दर पर ओवरटाइम का नियम तो था, लेकिन अमल कमजोर था और कई जगह इसका पालन नहीं होता था. नए कानून में स्पष्ट नियम, सख्त मॉनिटरिंग और ऑनलाइन निरीक्षण व्यवस्था होने से अब कर्मचारियों के पास अपने हक का ओवरटाइम पाने का मजबूत कानूनी आधार होगा.

मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, सिक्योरिटी सर्विसेज और हॉस्पिटैलिटी जैसी इंडस्ट्री, जहां लंबे शिफ्ट आम बात है, वहां यह सुधार मजदूरों की कुल कमाई पर बड़ा फर्क डालेगा.

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सभी के लिए मिनिमम वेतन की गारंटी

भारत में पहली बार ऐसा हो रहा है कि हर तरह के कर्मचारी, चाहे वे किसी भी सेक्टर में हों या किसी भी तरह का काम करते हों, सभी के लिए न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी तय की गई है. वेज कोड के तहत अब एक राष्ट्रीय फ़्लोर वेज तय किया जाएगा, ताकि अलग-अलग राज्यों में मजदूरी में होने वाला बड़ा फर्क कम हो सके.

सरकार हर पाँच साल में न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा करेगी, महिलाओं और पुरुषों को समान काम के लिए समान वेतन देना अनिवार्य होगा और समय पर मजदूरी देना सभी नियोक्ताओं के लिए जरूरी होगा.

इस बदलाव का मतलब यह है कि अब गिग वर्कर, ऐप बेस्ड प्लेटफॉर्म वर्कर, दिहाड़ी मजदूर, छोटे दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी और असंगठित क्षेत्र के सभी लोग न्यूनतम मजदूरी की सुरक्षा से बाहर नहीं रहेंगे. यह सुधार देश के सबसे बड़े और असुरक्षित श्रमिक वर्ग को आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम है.

मिलेगी बेहतर सोशल सिक्योरिटी कवरेज

सामाजिक सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दिया गया है. सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत अब EPF, ESIC, पेंशन, इंश्योरेंस और मातृत्व लाभ जैसी सुविधाएँ बहुत बड़े दायरे के कर्मचारियों तक पहुँचाई जाएंगी. सबसे अहम बदलावों में यह शामिल है कि ESIC की सुविधा अब 566 जिलों से बढ़ाकर देश के हर जिले तक पहुंचा दी गई है.

EPF का लाभ अब सिर्फ संगठित क्षेत्र ही नहीं बल्कि असंगठित क्षेत्र और खुद का काम करने वाले यानी self-employed लोगों तक भी फैलाया जा रहा है. असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की पहचान और उन्हें लाभ देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा डेटाबेस तैयार किया जा रहा है.

गिग वर्कर्स और ऐप आधारित प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों के लिए एक अलग सोशल सिक्योरिटी फंड भी बनाया गया है, ताकि उन्हें भी बीमा, पेंशन और अन्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सके.

इन बदलावों का मकसद साफ है कि देश में चाहे कोई औपचारिक नौकरी में हो या अनौपचारिक काम में, हर व्यक्ति को वित्तीय सुरक्षा का बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो.

बेहतर वर्कप्लेस, नियुक्ति पत्र और रात्रि पाली के अधिकार

नए लेबर कोड्स के साथ अब काम करने की जगहों पर कर्मचारियों के लिए माहौल ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाया गया है. हर कर्मचारी को अब कंपनी की तरफ से अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा, ताकि नौकरी की शर्तें और जिम्मेदारियाँ साफ-साफ लिखित रूप में मिल सकें. साल में एक बार सभी कर्मचारियों का मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण भी कराना होगा.

महिलाओं को अब सभी तरह की कंपनियों और संस्थानों में काम करने का हक मिलेगा, और यदि वे चाहें तो सुरक्षित इंतजाम और अपनी सहमति के साथ नाइट शिफ्ट में भी काम कर सकेंगी. इसके अलावा, एक राज्य से दूसरे राज्य में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के अधिकार भी मजबूत किए गए हैं और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को ज्यादा आसान और पोर्टेबल बनाया गया है.

कुल मिलाकर, ये बदलाव देश में कामकाजी माहौल को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में वह सुधार हैं जिसकी कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी.

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देश के कामगारों को सरकार का बड़ा तोहफा

भारत के वर्कफोर्स के लिए यह बदलाव एक अहम मोड़ की तरह है. दशकों से लंबित श्रम सुधारों को अब नए लेबर कोड के रूप में एक साथ, साफ, सरल और आधुनिक ढांचे में बदल दिया गया है. कर्मचारियों के नजरिये से देखें तो इन सुधारों का मतलब है लंबी अवधि में ज्यादा बचत जैसे 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्यूटी, मेहनत का सही मूल्य जैसे दोगुनी दर से ओवरटाइम, काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन जैसे आसान अर्जित छुट्टी के नियम, सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार और कार्यस्थल पर अधिक अधिकार और सम्मान.

इन सुधारों की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन्हें जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है. लेकिन सरकार की मंशा और सुधारों की संरचना साफ दिखाती है कि देश अब एक ऐसे दौर की ओर बढ़ रहा है जहां कामगारों के हितों को पहले से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

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