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NFO Alert : मिरे एसेट बीएसई 500 डिविडेंड लीडर्स 50 ईटीएफ में 2 से 10 दिसंबर 2025 तक निवेश किया जा सकता है. (AI Generated)
Mirae Asset BSE 500 Dividend Leaders 50 ETF : अगर आप डिविडेंड देने वाले मजबूत स्टॉक्स का एक मजबूत पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं, तो आपके पास अच्छा मौका है. मिरे एसेट म्यूचुअल फंड ने अपना न्यू फंड ऑफर (NFO) लॉन्च किया है. ये नई स्कीम मिरे एसेट बीएसई 500 डिविडेंड लीडर्स 50 ईटीएफ नाम से लॉन्च हुई है.
इस स्कीम का निवेश उद्देश्य यह है कि खर्चों से पहले ऐसा रिटर्न दिया जाए जो BSE 500 Dividend Leaders 50 Total Return Index के प्रदर्शन के अनुरूप हो, बशर्ते कि ट्रैकिंग एरर की सीमा के भीतर रहे. स्कीम किसी भी तरह का रिटर्न गारंटी नहीं करती है. यह भी जरूरी नहीं है कि स्कीम (Mutual Fund) अपना निवेश उद्देश्य हासिल कर ही ले.
NFO (न्यू फंड ऑफर) डिटेल
NFO ओपन होने की तारीख : 2 दिसंबर, 2025
NFO बंद होने की तारीख : 10 दिसंबर, 2025
स्कीम दोबारा खरीद/बिक्री के लिए खुलेगी : 16 दिसंबर, 2025
NFO अवधि के दौरान निवेश राशि : मिनिमम निवेश 5,000 रुपये प्रति एप्लीकेशन, उसके बाद 1 रुपये के मल्टीपल में अतिरिक्त निवेश
कैटेगरी : इक्विटी थिमैटिक डिविडेंड यील्ड
लॉक इन पीरियड : कुछ नहीं
एग्जिट लोड : कुछ नहीं
रिस्क : वेरी हाई
बेंचमार्क : BSE 500 Dividend Leaders 50 Total Return Index
फंड मैनेजर्स : एकता गाला और अक्षय उदेशी
निवेश का क्या है स्ट्रैटेजी?
स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट के अनुसार मिरे एसेट बीएसई 500 डिविडेंड लीडर्स 50 ईटीएफ (New Fund Offer) को पैसिव तरीके से मैनेज किया जाएगा. यानी, स्कीम उन्हीं शेयरों में और उसी रेश्यो में निवेश करेगी, जिनमें BSE 500 Dividend Leaders 50 Index निवेश करता है. स्कीम की रणनीति यह होगी कि इंडेक्स में शामिल शेयरों की एक टोकरी में उसी वेटेज के अनुसार निवेश किया जाए.
स्कीम की मुख्य रणनीति ट्रैकिंग एरर को कम से कम रखना होगी. इसके लिए पोर्टफोलियो को समय-समय पर री-बैलेंस किया जाएगा, ताकि इंडेक्स में शेयरों के वेट में बदलाव, नई खरीद और रिडेम्प्शन को सही तरीके से मैच किया जा सके.
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स्कीम की कुछ राशि डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में भी निवेश की जा सकती है, ताकि लिक्विडिटी यानी नकदी की जरूरतों को पूरा किया जा सके.
लागू नियमों और गाइडलाइंस के अनुसार, स्कीम अन्य म्यूचुअल फंड स्कीमों में भी निवेश कर सकती है. निवेश रणनीति, स्कीम की एसेट एलोकेशन पॉलिसी के अनुरूप ही होगी.
स्टैंडर्ड रिस्क फैक्टर्स
• म्यूचुअल फंड यूनिट्स में निवेश करने में कई तरह के जोखिम होते हैं, जैसे ट्रेडिंग वॉल्यूम का रिस्क, सेटलमेंट रिस्क, लिक्विडिटी रिस्क, डिफॉल्ट रिस्क, और मूल धन खोने का जोखिम.
• जिन सिक्योरिटीज में स्कीम निवेश करती है, उनकी कीमत / वैल्यू / ब्याज दर में उतार-चढ़ाव होता रहता है. इसलिए स्कीम का वैल्यू भी ऊपर या नीचे हो सकता है, यह कैपिटल मार्केट और मनी मार्केट की स्थितियों पर निर्भर करता है.
NFO Alert : बंधन म्यूचुअल फंड ने लॉन्च किया गोल्ड ETF और सिल्वर ETF
• स्पॉन्सर / AMC / म्यूचुअल फंड के पिछले प्रदर्शन से स्कीम के भविष्य के प्रदर्शन की कोई गारंटी नहीं मिलती.
• स्कीम का नाम किसी भी तरह से इसकी क्वालिटी, इसके भविष्य के रिटर्न या संभावनाओं को नहीं दर्शाता.
• स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट के अनुसार स्पॉन्सर केवल फंड की स्थापना के लिए दिए गए शुरुआती 1 लाख रुपये तक ही जिम्मेदार है. इसके अलावा स्कीम में होने वाले किसी भी नुकसान के लिए वह जिम्मेदार नहीं है.
• यह स्कीम किसी भी तरह का गारंटीड या एश्योर्ड रिटर्न नहीं देती.
(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का मकसद सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सलाह देना नहीं. निवेश का कोई भी फैसला अपने इनवेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह-मशविरा करने के बाद ही करें)
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