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PGIM India NFO : अनिश्चितता से भरी दुनिया में, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड क्लेरिटी, डाइवर्सिफिकेशन और लचीलापन प्रदान करते हैं. (Pixabay)
PGIM India Multi Asset Allocation Fund : पीजीआईएम इंडिया एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (PGIM India Asset Management) ने अपना एनएफओ (New Fund Offer) पीजीआईएम इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड लॉन्च करने की घोषणा की है. यह एक ओपन-एंडेड योजना है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य लंबे समय में निवेशकों की दौलत में इजाफा करना है. इसके लिए यह फंड कई तरह की एसेट क्लास में सोच-समझकर निवेश करके विविधता लाएगा.
यह नया फंड ऑफर (NFO) सब्सक्रिप्शन के लिए 11 नवंबर, 2025 को खुलेगा और 25 नवंबर, 2025 को बंद हो जाएगा. यह योजना बाद में, 3 दिसंबर, 2025 से, फिर से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल जाएगा.
किस एसेट क्लास में होगा निवेश
यह फंड (PGIM India NFO) निवेशकों को कई तरह की एसेट क्लास में निवेश का मौका देगा, जैसे कि: शेयर (Equity) , डेट (Debt) , गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) , सिल्वर ईटीएफ (Silver ETFs) , रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) , इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) इस फंड में, बाजार के उतार-चढ़ाव (मार्केट साइकिल्स) के हिसाब से, निवेश को इन एसेट क्लास के बीच बदला जाता रहेगा.
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क्यों चुनें मल्टी एसेट फंड?
मल्टी एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी निवेशकों को बाजार की अनिश्चितता से निकलने में मदद करता है, साथ ही सभी एसेट क्लास में अवसरों को पकड़ने के लिए इसे तैयार किया गया है. इससे निवेशक बिना रिटर्न कम किए अपने जोखिम को कम कर सकते हैं.
अनिश्चितता से भरी दुनिया में, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड क्लेरिटी, डाइवर्सिफिकेशन और लचीलापन प्रदान करते हैं. बाजार में भारी उतार-चढ़ाव होने पर, डाइवर्सिफिकेशन सिर्फ एक रणनीति नहीं है, बल्कि एक जरूरत है.
बहुत से निवेशक अपना निवेश पुराना प्रदर्शन देखकर करते हैं. वे उन जगहों पर पैसा लगाते हैं, जहां हाल ही में अच्छे रिटर्न मिले हों. इसी ट्रेंड के कारण वे अक्सर कमजोर प्रदर्शन वाले निवेश बेच देते हैं और उन विकल्पों में निवेश करते हैं, जिनकी कीमत पहले ही बहुत बढ़ चुकी होती है. इससे लंबे समय में कम रिटर्न मिल सकता है.
आमतौर पर, जब किसी एसेट क्लास में तेज बढ़त होती है, तो बहुत सारे लोग उसमें पैसा लगाने लगते हैं, इसका मतलब है कि अधिकतर लोग तब निवेश करते हैं जब कीमतें पहले से ही काफी ऊपर जा चुकी होती हैं.
दूसरी तरफ, जब बाजार गिरता है या प्रदर्शन कमजोर होता है, लोग जल्दी से निवेश बेच देते हैं. यह तरीका यानी महंगा खरीदना और सस्ता बेचना, निवेश पोर्टफोलियो को लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है.
बाजार के हालिया उतार-चढ़ाव को देखकर बार-बार निवेश बदलने के बजाय, बेहतर है कि निवेशक एक स्थिर, लॉन्ग टर्म रणनीति अपनाएं. यह भावनात्मक फैसले कम करता है और निवेश को संतुलित बनाता है.
मल्टी एसेट एलोकेशन फंड के लाभ
• अलग-अलग तरह का प्रदर्शन : अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियों में, अलग-अलग एसेट क्लास का प्रदर्शन भी अलग-अलग होता है.
• इक्विटी (शेयर) और डेट : शेयर लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए बहुत अच्छे विकल्प हैं, लेकिन बाजार के गिरावट वाले दौर के दौरान ये लगभग कोई सुरक्षा नहीं देते। जबकि, डेट स्थिर रिटर्न दे सकता है, लेकिन यह बाजार के तेजी वाले दौर का फायदा उठाने में पीछे रह जाता है.
• कीमती धातुएं (जैसे सोना-चांदी) : बाज़ार में गिरावट आने पर कीमती धातुएं ज्यादा सुरक्षा दे सकती हैं.
• रिस्क एडजस्टेड रिटर्न : प्रमुख एसेट क्लास के मिक्स वाला एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो लंबी अवधि में जोखिम को नियंत्रित करते हुए अच्छा रिटर्न पाने में मदद कर सकता है.
• टैक्स में लाभ : अगर फंड द्वारा इक्विटी में निवेश 65% या उससे अधिक है, तो इसे इक्विटी-ओरिएंटेड माना जाता है, जिससे टैक्स में फायदा मिल सकता है.
• भावनात्मक नियंत्रण : प्रोफेशनल मैनेजमेंट के कारण समय-समय पर सही तरीके से निवेश को बदलने और भावनात्मक फैसलों से बचने में मदद मिलती है.
• कीमती धातुओं में रणनीतिक निवेश : कीमती धातुओं में समझदारी से निवेश किया जाता है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से शेयर बाजार की गिरावट के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया है (जैसे: 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट, 2010 का यूरो जोन कर्ज संकट).
अन्य प्रमुख बातें
इस योजना के फंड मैनेजर्स : विवेक शर्मा (इक्विटी हिस्सा), आनंदा पद्मनाभन अंजनैय्या (इक्विटी हिस्सा), उत्सव मेहता (इक्विटी हिस्सा), पुनीत पाल (डेट हिस्सा)
इस फंड की तुलना (बेंचमार्क) इन इंडेक्स के मिक्स से की जाएगी : निफ्टी 500 टीआरआई का 60%, क्रिसिल शॉर्ट टर्म बॉन्ड इंडेक्स का 20%, सोने की घरेलू कीमतों का 10%, चांदी की घरेलू कीमतों का 10%
• प्लान / विकल्प : आईडीसीडब्ल्यू (IDCW) : इनकम डिस्ट्रीब्यूशन / कैपिटल विद्ड्रॉल विकल्प — पैसा निकाला जा सकता है या दोबारा निवेश हो सकता है। ग्रोथ विकल्प : जहां होने वाली कमाई को दोबारा निवेश होती है।
• न्यूनतम निवेश : पहली बार निवेश / स्विच-इन : कम से कम 5,000 रुपये और उसके बाद 1 रुपये के मल्टीपल में। अतिरिक्त निवेश : कम से कम 1,000 रुपये और उसके बाद 1 रुपये के मल्टीपल में।
• एग्जिट लोड : यूनिट मिलने के 90 दिनों के अंदर बेचने पर : 0.50% शुल्क 90 दिनों के बाद बेचने पर : कोई शुल्क नहीं
(नोट : न्यू फंड ऑफर (NFO) के दौरान ऊपर दिया गया यह प्रोडक्ट लेबलिंग योजना की विशेषताओं या मॉडल पोर्टफोलियो के आंतरिक मूल्यांकन पर आधारित है, फंड में वास्तविक निवेश होने के बाद इसमें बदलाव हो सकता है.)
(Disclaimer : हमने यह आर्टिकल जानकारी के लिए दिया है. अगर आपको यह समझ नहीं आ रहा कि यह प्रोडक्ट आपके लिए सही है या नहीं, तो अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें. NFO के समय दिए गए लेबल और जानकारी स्कीम की शुरुआती आंतरिक समझ पर आधारित है. वास्तविक निवेश के बाद इसमें बदलाव हो सकता है.)
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