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वहीं PIB फैक्ट चेक और वित्त मंत्रालय दोनों ने साफ कर दिया है कि मौजूदा नियमों के अनुसार पेंशन में संशोधन और महंगाई राहत (DR) आगे भी जारी रहेगी. (AI Image : ChatGPT)
जब से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) के टर्म्स ऑफ रेफरेंस सामने आए हैं, तब से केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच भविष्य में मिलने वाली सैलरी और पेंशन को लेकर कई तरह की शंकाएं पैदा हो गई हैं. इसी भ्रम की वजह से सोशल मीडिया पर डीए बढ़ोतरी, पेंशन, रिटायरमेंट लाभ और 8वें वेतन आयोग को लेकर कई भ्रामक और गलत संदेश वायरल होने लगे. इन अफवाहों ने देश के लाखों पेंशनर्स में बेवजह चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है.
वायरल दावा क्या है?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक संदेश में दावा किया गया है कि वित्त अधिनियम 2025 (Finance Act 2025) के तहत केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के डीए बढ़ोतरी और वेतन आयोग से जुड़े लाभ खत्म कर दिए हैं. संदेश में यह भी कहा गया है कि आगे चलकर पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग का कोई फायदा नहीं मिलेगा.
PIB फैक्ट चेक ने बताया सच
सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेकिंग इकाई PIB Fact Check ने इस वायरल दावे को पूरी तरह गलत बताया है. PIB फैक्ट चेक ने साफ कहा है कि केंद्र सरकार ने पेंशनर्स के डीए (DA), डीआर (DR) या वेतन आयोग से जुड़े किसी भी लाभ को खत्म नहीं किया है. यानी पेंशन, महंगाई भत्ता और भविष्य में वेतन आयोग से मिलने वाले लाभ पहले की तरह जारी रहेंगे.
सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि पेंशन और रिटायरमेंट लाभ से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें.
पेंशनर्स को आगे भी कौन-कौन से लाभ मिलते रहेंगे?
PIB Fact Check के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत केंद्र सरकार के पेंशनर्स को आगे भी ये लाभ मिलते रहेंगे:
पेंशन रिविजन (Pension Revision): भविष्य में जब भी नया वेतन आयोग लागू होगा, उसकी सिफारिशों के आधार पर पेंशन में संशोधन किया जाएगा.
डियरनेस रिलीफ (Dearness Relief – DR): महंगाई के असर की भरपाई के लिए हर साल जनवरी और जुलाई में डीआर में बढ़ोतरी जारी रहेगी.
असल में कौन-सा नियम बदला गया है?
इस पूरे भ्रम की जड़ CCS (Pension) Rules, 2021 में किया गया एक सीमित संशोधन है. PIB Fact Check ने स्पष्ट किया है कि Rule 37 में किया गया यह बदलाव सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों पर लागू होता है, जिन्हें किसी PSU में समायोजित (absorb) किए जाने के बाद गंभीर कदाचार (misconduct) के कारण सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाता है. इसका सामान्य पेंशनर्स, डीआर बढ़ोतरी या वेतन आयोग से मिलने वाले लाभों से कोई लेना-देना नहीं है.
यह संशोधन Supreme Court of India के एक आदेश के बाद किया गया था, जो सूरज प्रताप सिंह बनाम CMD बीएसएनएल मामले से जुड़ा है. इसका असर सामान्य पेंशनर्स या नियमित रूप से रिटायर हुए कर्मचारियों पर नहीं पड़ता और उनके पेंशन या अन्य रिटायरमेंट लाभ पूरी तरह सुरक्षित हैं.
सरकार ने संसद में भी स्थिति साफ की
इस बीच सरकार ने संसद में भी इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब दिया है. राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय ने कहा कि पेंशन को 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया गया है.
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने साफ तौर पर बताया कि 8वां वेतन आयोग सैलरी, भत्तों और पेंशन से जुड़े सभी पहलुओं पर अपनी सिफारिशें देगा. इससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि पेंशन संशोधन को बाहर करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है.
DA–DR मर्जर को लेकर क्या स्थिति है?
सरकार ने यह भी साफ किया है कि फिलहाल महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को बेसिक वेतन में मिलाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. सरकार का कहना है कि इस तरह का फैसला 8वां वेतन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा. रिपोर्ट के 2027 के आसपास आने की उम्मीद है. यानी अभी DA–DR मर्जर को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है और न ही तुरंत ऐसा होने की संभावना है.
भ्रम क्यों फैला?
यह भ्रम तब पैदा हुआ जब 8वां वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) 3 नवंबर 2025 को जारी किए गए. इनमें पेंशन का अलग से स्पष्ट उल्लेख नहीं था और “अनफंडेड पेंशन कॉस्ट” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. इसी वजह से कुछ कर्मचारी संगठनों को आशंका हुई कि कहीं पेंशन से जुड़े लाभों पर असर न पड़ जाए. इस अनिश्चितता का फायदा उठाकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और गलत दावे फैलाए गए, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स में बेवजह चिंता बढ़ गई.
सीधे शब्दों में कहें तो केंद्र सरकार के पेंशनर्स के डीए बढ़ोतरी, डीआर और 8वें वेतन आयोग से जुड़े सभी रिटायरमेंट लाभ पूरी तरह सुरक्षित हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा व्हाट्सऐप मैसेज भ्रामक और गलत है, जिसे PIB Fact Check और सरकार दोनों ने साफ तौर पर खारिज कर दिया है. इसलिए पेंशनर्स को किसी भी तरह की अफवाह या भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है.
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