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NPS Big Update : PFRDA ने एनपीएस के नियमों में अहम बदलाव करके गैर-सरकारी निवेशकों को बड़ी राहत दी है. Photograph: (Financial Express)
National Pension System BIG Update : रिटायरमेंट के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में निवेश करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है. पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने 16 दिसंबर को एनपीएस के नियमों में अहम बदलावों का ऐलान किया है. इन बदलावों का मकसद गैर-सरकारी यानी प्राइवेट सेक्टर से जुड़े निवेशकों को पहले से ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देना है. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि NPS में गैर-सरकारी निवेशकों के लिए 5 साल का कंपल्सरी लॉक-इन पीरियड हटा दिया गया है. नए नोटिफिकेशन में साफ तौर पर लॉक-इन हटाने की बात नहीं कही गई है, लेकिन साथ ही इसमें कहीं भी एनपीएस से पैसे निकालने के संदर्भ में लॉक-इन का जिक्र नहीं है. इससे यही साफ होता है कि अब गैर-सरकारी निवेशकों को एकमुश्त पैसे निकालने के लिए कोई लॉक-इन खत्म होने का इंतजार नहीं करना होगा.
NPS से एग्जिट करना हुआ आसान
अब तक एनपीएस (NPS) से निकलते समय निवेशकों को कई सख्त नियमों का सामना करना पड़ता था. खासकर रिटायरमेंट पर मिलने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य रूप से एन्युटी में लगाना पड़ता था. पहले नियमों के तहत, रिटायरमेंट के समय कुल जमा रकम का अधिकतम 60 प्रतिशत ही एकमुश्त निकाला जा सकता था, जबकि कम से कम 40 प्रतिशत रकम से पेंशन प्लान यानी एन्युटी खरीदना जरूरी था.
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12 लाख रुपये से ज्यादा कॉर्पस वालों को बड़ी राहत
नए नियमों के तहत अगर किसी गैर-सरकारी निवेशक का एनपीएस कॉर्पस 12 लाख रुपये से ज्यादा है, तो अब वह 80 प्रतिशत रकम एकमुश्त निकाल सकता है. केवल 20 प्रतिशत रकम को ही एन्युटी में लगाना जरूरी होगा. इससे रिटायरमेंट के समय निवेशकों के हाथ में ज्यादा कैश रहेगा और वे अपनी जरूरत के हिसाब से पैसों का इस्तेमाल कर सकेंगे.
छोटे निवेशकों के लिए भी राहत के नियम
PFRDA ने छोटे निवेशकों को भी ध्यान में रखते हुए नियमों में बदलाव किया है. अगर किसी निवेशक का कुल एनपीएस कॉर्पस 8 लाख रुपये तक है, तो वह पूरी रकम एकमुश्त निकाल सकता है. वहीं जिनका कॉर्पस 8 लाख रुपये से ज्यादा लेकिन 12 लाख रुपये तक है, वे 6 लाख रुपये तक एक साथ निकाल सकते हैं. बची हुई रकम से कम से कम 6 साल की अवधि के लिए एन्युटी खरीदनी होगी.
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85 साल की उम्र तक निवेश का ऑप्शन
नए संशोधन के तहत अब निवेशक चाहें तो 85 साल की उम्र तक एनपीएस में बने रह सकते हैं. हालांकि, अगर वे चाहें तो तय शर्तों के तहत पहले भी एग्जिट ले सकते हैं. सामान्य एग्जिट अब 15 साल की सदस्यता पूरी होने के बाद या 60 साल की उम्र, रिटायरमेंट या सुपरएनुएशन में से जो पहले हो, उस पर ली जा सकती है.
5 साल का लॉक-इन पूरी तरह खत्म
गैर-सरकारी सेक्टर के निवेशकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि अब 5 साल का अनिवार्य लॉक-इन हटा दिया गया है. इससे उन लोगों को फायदा होगा जो किसी वजह से बीच में एनपीएस से बाहर निकलना चाहते हैं. हालांकि सरकारी कर्मचारियों के लिए यह लॉक-इन अभी भी लागू रहेगा.
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सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या हैं नियम
सरकारी कर्मचारियों के मामले में नियम पहले जैसे ही हैं. 60 साल की उम्र पर अगर एनपीएस कॉर्पस 5 लाख रुपये से कम है, तो पूरी रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है. अगर कॉर्पस 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो 40 प्रतिशत रकम से एन्युटी खरीदना जरूरी होगा और बाकी रकम निकाली जा सकेगी.
विशेष हालात में पूरे पैसे निकालना संभव
नए नियमों में कुछ खास स्थितियों के लिए भी राहत दी गई है. अगर कोई निवेशक भारतीय नागरिकता छोड़ता है, तो वह पूरा एनपीएस कॉर्पस एकमुश्त निकाल सकता है. निवेशक की मृत्यु होने पर जमा रकम नॉमिनी या कानूनी वारिस को दी जाएगी. अगर निवेशक लापता हो जाता है और मृत मान लिया जाता है, तो पहले 20 प्रतिशत रकम अंतरिम राहत के तौर पर दी जाएगी.
समय से पहले एनपीएस छोड़ने पर क्या होगा
अगर कोई निवेशक समय से पहले एनपीएस से बाहर निकलता है, तो आम तौर पर 80 प्रतिशत रकम एन्युटी में लगानी होगी. लेकिन अगर कुल जमा रकम 5 लाख रुपये से कम है, तो पूरी रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है. गंभीर रूप से दिव्यांग निवेशकों को मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर विशेष छूट भी दी गई है. कुल मिलाकर, PFRDA के ये नए नियम एनपीएस को ज्यादा लचीला और निवेशक के अनुकूल बनाते हैं. रिटायरमेंट प्लानिंग करने वालों के लिए यह बदलाव काफी अहम माने जा रहे हैं.
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