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NPS, UPS, APY जैसी पेंशन स्कीम्स से जुड़े फंड्स अब गोल्ड-सिल्वर ETF और Nifty 250 में भी निवेश कर सकेंगे. (Image : Freepik)
Big Update in Pension Schemes : नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी पेंशन स्कीम्स में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ा अपडेट आया है. सरकार की पेंशन फंड्स को रेगुलेट करने वाली संस्था PFRDA यानी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (Pension Fund Regulatory and Development Authority) ने कुछ नए नियम जारी किए हैं. जिसके बाद अब पेंशन फंड्स को गोल्ड और सिल्वर ETF, Nifty 250 इंडेक्स और अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स (Alternative Investment Funds - AIF कैटेगरी I & II) में निवेश की इजाजत मिल गई है.
इस अहम बदलाव से NPS, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी स्कीम्स में रिटर्न बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी, क्योंकि अब निवेश का दायरा पहले से कहीं ज्यादा बड़ा हो गया है. पेंशन स्कीम्स में ये सभी बदलाव PFRDA के बुधवार 10 दिसंबर को जारी एक मास्टर सर्कुलर के जरिए लागू किए गए हैं. पहले के कई सर्कुलर अब इसी में शामिल हो गए हैं. नए नियमों को फौरन लागू कर दिया गया है.
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NPS, UPS और APY में निवेश के नए ऑप्शन खुले
नए सर्कुलर के तहत पेंशन फंड्स को कई तरह की एसेट क्लास में निवेश की इजाजत दी गई है. इसका बड़ा फायदा यह होगा कि निवेशक एक ही स्कीम के भीतर ज्यादा डायवर्सिफाइड तरीके से निवेश कर पाएंगे, जिससे रिस्क मैनेजमेंट बेहतर होगा. इन नए नियमों के तहत अब निवेश का स्ट्रक्चर इस प्रकार हो सकता है :
सरकारी सिक्योरिटी में अधिकतम 65% तक निवेश
NPS की सबसे बड़ी मजबूती यह रही है कि इसका बड़ा हिस्सा सरकारी सिक्योरिटी में जाता है. नई गाइडलाइन के अनुसार अब अधिकतम 65% तक निवेश केंद्र और राज्य सरकार की सिक्योरिटीज में किया जा सकता है, जिनमें PSUs द्वारा जारी फुली सर्विस्ड बॉन्ड और G-Sec पोर्टफोलियो के 5% की सीमा तक गिल्ट म्यूचुअल फंड्स भी शामिल हैं. सरकारी बॉन्ड सुरक्षित माने जाते हैं और लंबी अवधि में स्टेबल रिटर्न देते हैं, इसलिए इन्हें पोर्टफोलियो का कोर माना गया है.
कॉर्पोरेट बॉन्ड, डेट इंस्ट्रूमेंट्स में 45% तक निवेश
इस कैटेगरी में अच्छी क्रेडिट रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड और अन्य डेट प्रोडक्ट में अधिकतम 45% तक निवेश किया जा सकता है. इनमें, AA या उससे ऊपर की रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड, Basel III Tier-1 बॉन्ड (स्कीम AUM का 2% तक), IFC, IBRD, ADB जैसे संस्थानों के बॉन्ड, बैंक FD (एक बैंक में अधिकतम 10%), डेट म्यूचुअल फंड (डेट पोर्टफोलियो के अधिकतम 5% तक), REIT और InvIT के डेट इंस्ट्रूमेंट और AAA रेटेड म्युनिसिपल बॉन्ड शामिल हैं.
अगर किसी सिक्योरिटी की रेटिंग AA- और A के बीच है, तो उसमें कुल डेट पोर्टफोलियो का 10% तक ही निवेश किया जा सकता है.
शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में अधिकतम 10% निवेश
लिक्विडिटी के लिए शॉर्ट टर्म इंस्ट्रूमेंट्स में भी अधिकतम 10% तक निवेश किया जा सकता है. इनमें ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर (A1+ रेटिंग), सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट और शॉर्ट ड्यूरेशन म्यूचुअल फंड शामिल हैं.
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इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में 25% तक निवेश
इक्विटी में निवेश बढ़ने से हाई रिटर्न का मौका बढ़ जाता है. नई गाइडलाइन के तहत इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में अधिकतम 25% तक निवेश किया जा सकता है. इसमें Nifty 250 इंडेक्स के शेयर के अलावा ऐसे चुनिंदा BSE 250 शेयर भी शामिल हैं, जो Nifty 250 में नहीं हैं. इक्विटी एलोकेशन का कम से कम 90% निवेश टॉप 200 स्टॉक्स में होना चाहिए. इक्विटी पोर्टफोलियो का मैक्सिमम 5% तक हिस्सा इक्विटी म्यूचुअल फंड में भी लगाया जा सकता है. इनमें Nifty और Sensex आधारित ETF, हेजिंग के लिए डेरिवेटिव (इक्विटी पोर्टफोलियो के अधिकतम 5% तक) के अलावा IPO, FPO और OFS में किए जाने वाले निवेश शामिल हैं. इंडेक्स में बदलाव होने पर 6 महीने के भीतर पोर्टफोलियो को अपडेट करना जरूरी है.
गोल्ड- सिल्वर ETF, AIF समेत अन्य एसेट्स में 5% तक निवेश
नए नियमों की एक बड़ी खासियत ये है कि अब पेंशन फंड्स गोल्ड- सिल्वर ETF, AIF समेत अन्य एसेट्स में अधिकतम 5% निवेश कर सकेंगे. इसके तहत गोल्ड ETF और सिल्वर ETF में स्कीम AUM का मैक्सिमम 1% तक निवेश किया जा सकता है. इसी तरह AIF कैटेगरी I और II में भी सरकारी सेक्टर स्कीम के AUM के 1% तक निवेश किया जा सकेगा. इसके अलावा REIT और InvIT की यूनिट्स, एसेट-बैक्ड सिक्योरिटी, (कमर्शियल मॉर्गेज-बैक्ड सिक्योरिटीज (CMBS) और रेसिडेंशियल मॉर्गेज-बैक्ड सिक्योरिटीज (RMBS) में भी निवेश किया जा सकेगा.
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नए नियमों में रिस्क मैनेजमेंट पर खास जोर
नए नियमों में रिस्क मैनेजमेंट के लिए कड़े दिशानिर्देश भी शामिल किए गए हैं. इनके तहत पोर्टफोलियो में किसी एक कंपनी या इंडस्ट्री का वेटेज बहुत अधिक न हो, इसके लिए सख्त लिमिट तय की गई है, जो इस प्रकार है:
किसी कंपनी की इक्विटी में अधिकतम 5% (स्पॉन्सर ग्रुप), 10% (नॉन- स्पॉन्सर ग्रुप)
डेट एक्सपोजर 5% (स्पॉन्सर ग्रुप), 10% (नॉन- स्पॉन्सर ग्रुप)
किसी एक इंडस्ट्री में 15% से अधिक निवेश नहीं
InvIT/REIT में कुल एक्सपोजर अधिकतम 3% तक
कुल मिलाकर इन नए नियमों से NPS और APY जैसी स्कीम्स के पोर्टफोलियो पहले से ज्यादा डायवर्सिफाइड, सुरक्षित और रिटर्न-फोकस्ड होने की उम्मीद है. सोना, चांदी और AIF जैसे नए विकल्प रिस्क और रिटर्न को बैलेंस करने में मदद करेंगे. साथ ही लंबी अवधि में पेंशन फंड और भी आकर्षक बन सकता है.
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