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Advance Tax Due: एडवांस टैक्स भरने के लिए बचे हैं सिर्फ 2 दिन, चुके तो देना होगा इंटरेस्ट

जिन टैक्सपेयर्स की इनकम का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं होता, जैसे कैपिटल गेन, अगर वे 31 मार्च तक पूरा टैक्स चुका देते हैं, तो उन पर कोई ब्याज नहीं लगाया जाएगा.

जिन टैक्सपेयर्स की इनकम का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं होता, जैसे कैपिटल गेन, अगर वे 31 मार्च तक पूरा टैक्स चुका देते हैं, तो उन पर कोई ब्याज नहीं लगाया जाएगा.

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FE Hindi Desk
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Advance Tax Deadline : 15 दिसंबर तक कुल टैक्स देनदारी का कम से कम 75% हिस्सा जमा करना जरूरी है, वरना देरी पर ब्याज देना पड़ सकता है. (AI Generated Image by ChatGPT)

एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की डेडलाइन अब बेहद करीब है, ऐसे में टैक्सपेयर्स को अपनी टैक्स देनदारी का एक बार फिर आकलन कर लेना चाहिए. खासतौर पर वे लोग, जिनकी कुछ इनकम साल के बाद के महीनों में आती है या जिन्होंने भुगतान को आगे टाला है, उन्हें यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इनकम का सही समय पर टैक्स में समावेश हो, ताकि किसी तरह की चूक न हो. एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की आखिरी तारीख 15 दिसंबर है, यानी टैक्सपेयर्स के पास अब तीन दिन से भी कम समय बचा है.

एडवांस टैक्स भरने की डेडलाइन और नियम 

जिन टैक्सपेयर्स की कुल अनुमानित टैक्स देनदारी, TDS और TCS घटाने के बाद 10,000 रुपये से अधिक है, उनके लिए एडवांस टैक्स का भुगतान अनिवार्य है. नियमों के अनुसार, 15 दिसंबर तक कुल टैक्स का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा एडवांस टैक्स के रूप में जमा करना होता है.

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अगर तय समयसीमा तक जरूरी रकम जमा नहीं की जाती, तो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234C के तहत ब्याज लगाया जाता है. टैक्स एक्सपर्ट नीरज अग्रवाल के अनुसार, तिमाही किस्तों में तय प्रतिशत का भुगतान न करने पर पहली तीन किस्तों पर तीन-तीन महीने के लिए 1 प्रतिशत प्रति माह ब्याज, जबकि मार्च की किस्त पर एक महीने के लिए 1 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है.

डिफर्ड एडवांस टैक्स का नियम कहां होता है लागू

कुछ तरह की इनकम ऐसी होती है, जिनका अंदाजा पहले से लगाना मुश्किल होता है, जैसे कैपिटल गेन, लॉटरी से जीत, डिविडेंड इनकम आदि. ऐसी इनकम पर डिफर्ड एडवांस टैक्स का नियम लागू होता है. इसका मतलब यह है कि टैक्सपेयर्स इनकम मिलने के बाद 31 मार्च तक पूरा टैक्स जमा कर सकते हैं, और इस पर कोई ब्याज नहीं लगता.

दरअसल, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234C टैक्सपेयर्स को राहत देती है. अगर टैक्स की कमी ऐसी इनकम की वजह से हुई है, जिसका अनुमान पहले नहीं लगाया जा सकता था, और उस इनकम पर टैक्स अगली तय किस्त में समय पर जमा कर दिया जाता है, तो उस कमी पर कोई पेनल ब्याज नहीं लगाया जाता.

एडवांस टैक्स का भुगतान ऑनलाइन मोड में Challan ITNS-280 के जरिए किया जाता है, जिसमें एडवांस टैक्स का विकल्प चुनना होता है.

वहीं इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234B तब लागू होती है, जब कोई टैक्सपेयर पूरे वित्त वर्ष के अंत तक कुल आकलित टैक्स का कम से कम 90 प्रतिशत हिस्सा जमा नहीं करता. ऐसे मामलों में आकलन वर्ष की 1 अप्रैल से लेकर पूरी बकाया राशि चुकाने तक 1 प्रतिशत प्रति माह ब्याज देना पड़ता है. उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2025–26 के लिए यह ब्याज 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा.

अच्छी खबर यह है कि वे वरिष्ठ नागरिक जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से नहीं होती, उन्हें एडवांस टैक्स देने से पूरी तरह छूट है. हालांकि, उन्हें यह जरूर सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी इनकम पर TDS सही तरीके से काटा जा रहा हो.

किन टैक्सपेयर्स के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन है राहत वाला विकल्प

प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन उन टैक्सपेयर्स के लिए राहत वाला विकल्प है, जो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 44AD या 44ADA के तहत टैक्स देना चुनते हैं. ऐसे टैक्सपेयर्स पूरे साल का एडवांस टैक्स एक ही किस्त में 15 मार्च तक जमा कर सकते हैं, और इस पर धारा 234C के तहत कोई ब्याज नहीं लगता.

यह सुविधा खास तौर पर उन पेशेवरों को मिलती है जो वकालत, मेडिकल, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, अकाउंटेंसी जैसे पेशों से जुड़े हैं और जिनकी सालाना ग्रॉस रसीद या टर्नओवर 50 लाख रुपये से कम है. ऐसे लोगों को प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन के तहत टैक्स चुकाने की पात्रता होती है.

टैक्स एक्सपर्ट संदीप सहगल के मुताबिक, इस सिस्टम से टैक्स अनुपालन आसान हो जाता है, क्योंकि इसमें टैक्सपेयर्स को हर तिमाही इनकम का अनुमान लगाने या किस्तों के हिसाब से अलग-अलग हिसाब-किताब रखने की जरूरत नहीं पड़ती.

वहीं नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि भले ही उनकी सैलरी से हर महीने TDS कटता हो, लेकिन अगर उनके पास किराए से आय, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन जैसी अतिरिक्त इनकम है, जिसकी जानकारी उन्होंने अपने नियोक्ता को नहीं दी है, तो उन्हें उस पर एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है. ऐसे मामलों में उनकी कुल टैक्स देनदारी, सैलरी से कटे TDS से ज्यादा हो सकती है.

समय पर एडवांस टैक्स जमा करने से यह सुनिश्चित होता है कि सैलरी ही नहीं, बल्कि सभी इनकम सोर्सेज को मिलाकर टैक्स की सही और पूरी गणना हो सके.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

To read this article in English, click here.

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