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PF Deduction in New Labour Code : नए लेबर कोड में किन कर्मचारियों की नहीं घटेगी टेक होम सैलरी? (Image : Freepik)
PF Deduction in New Labour Code: नए लेबर कोड के लागू होने पर सैलरी पाने वाले कर्मचारियों का ईपीएफ (EPF) कंट्रीब्यूशन बढ़ने और उसकी वजह से टेक-होम सैलरी में कमी आने की अटकलों पर भारत सरकार ने स्थिति साफ की है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये बाकायदा पीएफ डिडक्शन का उदाहरण जारी करके पूरे मामले को समझाया है. मंत्रालय का कहना है कि नया लेबर कोड के लागू होने के बाद भी उन कर्मचारियों के हाथ में आने वाले वेतन में कोई कमी नहीं होगी, जिनका पीएफ 15,000 रुपये की वेज सीलिंग के आधार पर काटा जाता है.
मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा
भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) ने अपने सोशल मीडिया (X) हैंडल पर जो जानकारी शेयर की है, उसके मुताबिक नया लेबर कोड के लागू होने के बाद भी वेतन से पीएफ काटने (PF deduction) के लिए 15,000 रुपये की वैधानिक वेज सीलिंग (statutory wage ceiling) का ऑप्शन बरकरार रहेगा. यानी सिर्फ 15 हजार रुपये की मंथली सैलरी पर ही पीएफ काटना कानूनी तौर पर अनिवार्य होगा. इससे ऊपर की सैलरी पर पीएफ काटना नए लेबर कोड में भी ऑप्शनल ही है, अनिवार्य नहीं. लिहाजा जिन कर्मचारियों के वेतन से पीएफ काटने का आधार 15,000 रुपये की वेज सीलिंग है, उनकी टेक होम सैलरी पहले जितनी ही रहेगी.
मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, “नए लेबर कोड की वजह से किसी कर्मचारी की टेक-होम सैलरी नहीं घटेगी, अगर उसका पीएफ डिडक्शन वैधानिक वेज सीलिंग के आधार पर होता है. ऐसे में पीएफ डिडक्शन पहले की तरह ही 15,000 रुपये की वेज सीलिंग पर ही आधारित होगा. इससे ऊपर कोई भी कंट्रीब्यूशन वॉलंटरी है, अनिवार्य नहीं.”
60,000 रुपये सैलरी पर PF डिडक्शन का कैलकुलेशन
मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उदाहरण के तौर पर 60,000 रुपये की मंथली सैलरी के आधार पर पीएफ कटौती (EPF Deduction) का कैलकुलेशन भी दिया है. जिसमें पूरे बेसिक वेतन पर पीएफ डिडक्शन के साथ ही साथ 15,000 रुपये की वेज सीलिंग पर होने वाले डिडक्शन, दोनों की जानकारी दी गई है. इस उदाहरण के आधार पर पूरी बेसिक सैलरी के आधार पर कंट्रीब्यूशन का कैलकुलेशन कुछ इस तरह होगा -
उदाहरण 1 : पूरी बेसिक सैलरी के आधार पर कंट्रीब्यूशन
- मान लिया किसी कर्मचारी की कुल मंथली सैलरी 60,000 रुपये है.
- इसमें बेसिक वेतन 20,000 रुपये और अन्य भत्ते (Allowances) 40,000 रुपये हैं.
- मौजूदा नियमों के तहत पूरी बेसिक सैलरी के आधार पर पीएफ डिडक्शन हो तो एंप्लॉयर का 12% कंट्रीब्यूशन और एंप्लॉई का 12% कंट्रीब्यूशन, दोनों ही 20,000 रुपये पर कैलकुलेट होगा, जो 2400+2400 = 4800 रुपये होगा.
- लेकिन नए लेबर कोड (New Labour Code) के लागू होने पर यह कंट्रीब्यूशन 20,000 रुपये + 10,000 रुपये यानी 30,000 रुपये पर करना होगा.
- ऐसा हुआ तो एंप्लॉयर और एंप्लॉई का 12-12% कंट्रीब्यूशन 3600 + 3600 =7200 रुपये हो जाएगा.
- ऐसा इसलिए, क्योंकि इस उदाहरण में कर्मचारी को मिलने वाले कुल भत्तों की रकम 40,000 रुपये है, जो 60,000 रुपये की कुल सैलरी के 50% से 10,000 रुपये अधिक है. इसलिए 10,000 रुपये की यह रकम भी वैधानिक कैलकुलेशन (Statutory Calculation) यानी पीएफ की गणना के लिए वेज में जोड़ दी जाएगी.
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उदाहरण 1 : 15,000 रुपये की वेज सीलिंग के आधार पर कंट्रीब्यूशन
- कर्मचारी की कुल मंथली सैलरी 60,000 रुपये है, लेकिन पीएफ कंट्रीब्यूशन सिर्फ 15,000 रुपये के वेज सीलिंग के आधार पर किया जा रहा है.
- ऐसे में एंप्लॉयर का 12% कंट्रीब्यूशन 1800 रुपये होगा और एंप्लॉई का 12% कंट्रीब्यूशन भी इतना ही यानी 1800 रुपये होगा.
- इस हिसाब से 60,000 रुपये की सैलरी से पीएफ के रूप में 3600 रुपये कटेंगे.
- ऐसे में कर्मचारी की टेक-होम सैलरी 60,000 - 3600 = 56,400 रुपये होगी.
- नया लेबर कोड लागू होने के बाद भी पीएफ का अनिवार्य डिडक्शन 15,000 रुपये की मिनिमम वेज सीलिंग के आधार पर जारी रखा जा सकता है.
- ऐसा होने पर एंप्लॉयर और एंप्लॉई का कंट्रीब्यूशन पहले जितना ही बना रहेगा और टेक-होम सैलरी भी उतनी ही, यानी 56,400 रुपये बनी रहेगी.
The new Labour Codes do not reduce take-home pay if PF deduction is on statutory wage ceiling.
— Ministry of Labour & Employment, GoI (@LabourMinistry) December 10, 2025
PF deductions remain based on the wage ceiling of ₹15,000 and contributions beyond this limit are voluntary, not mandatory.#ShramevJayatepic.twitter.com/zHVVziszpy
किन कर्मचारियों की घट सकती है टेक-होम सैलरी?
मंत्रालय की तरफ से दिए गए इस स्पष्टीकरण से साफ हो गया है कि नए लेबर कोड के बाद सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी घट सकती है, जिनका पीएफ डिडक्शन मिनिमम वेज सीलिंग पर आधारित नहीं है. यानी 15,000 रुपये से ऊपर की मंथली सैलरी पर पीएफ कंट्रीब्यूशन करना कर्मचारियों और उनके एंप्लॉयर के लिए ऑप्शनल है.
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