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NBFC Merger Explained : पीरामल फाइनेंस की बिना IPO कैसे हुई लिस्टिंग, समझें दो NBFC के मर्जर का पूरा मामला

Piramal Finance Merger Explained : पीरामल फाइनेंस ने बिना IPO कैसे की शानदार लिस्टिंग. पीरामल एंटरप्राइजेज के मर्जर से कैसे बनी एक मजबूत NBFC, निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब.

Piramal Finance Merger Explained : पीरामल फाइनेंस ने बिना IPO कैसे की शानदार लिस्टिंग. पीरामल एंटरप्राइजेज के मर्जर से कैसे बनी एक मजबूत NBFC, निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब.

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Viplav Rahi
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Investment Return Profit Graph Freepik

Listing Without IPO : बिना आईपीओ कैसे हुई पीरामल फाइनेंस की लिस्टिंग? (Image : Freepik)

Piramal Finance Listing Without IPO Explained : आमतौर पर जब कोई कंपनी स्टॉक मार्केट में आती है, तो वह IPO (Initial Public Offering) के जरिए आती है. लेकिन पीरामल फाइनेंस (Piramal Finance) की लिस्टिंग का मामला कुछ अलग है. दरअसल पिछले हफ्ते इस एनबीएफसी (NBFC) की शानदार लिस्टिंग बिना IPO के ही हुई और शेयर ने लिस्टिंग के दिन ही 5% का ऊपरी सर्किट छू लिया. 

दरअसल, यह लिस्टिंग किसी नए शेयर ऑफर के जरिए नहीं, बल्कि एक बड़े मर्जर (NBFC Merger) के जरिए हुई. इस मर्जर ने कंपनी के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को आसान बना दिया. आइए समझते हैं पूरा मामला.

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कैसे हुआ पीरामल एंटरप्राइजेज और पीरामल फाइनेंस का मर्जर (Piramal Enterprises and Piramal Finance Merger Process)

इससे पहले पीरामल एंटरप्राइजेज (Piramal Enterprises Limited - PEL) और पीरामल फाइनेंस (PF) दो अलग-अलग कंपनियां थीं.

  • PEL एक listed NBFC थी जो होल्डिंग कंपनी की तरह काम करती थी.

  • PFL, PEL की 100% सब्सिडियरी थी और खुद एक NBFC के रूप में रिटेल, हाउसिंग और कॉर्पोरेट लोन देती थी.

दोनों कंपनियां एक ही सेक्टर में काम कर रही थीं. इस स्ट्रक्चर को आसान बनाने के लिए PEL को PFL में मर्ज किया गया. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सितंबर 2025 में इस मर्जर को मंजूरी दी.

23 सितंबर 2025 को रिकॉर्ड डेट तय हुई और उसी दिन से PEL के शेयरों की ट्रेडिंग बंद हो गई. इसके बाद PEL के हर शेयरधारक को PFL का 1 शेयर दिया गया. इस तरह PEL की जगह पीरामल फाइनेंस लिमिटेड (Piramal Finance Limited - PFL) बाजार में लिस्टेड कंपनी बन गई (BSE Scrip Code: 544597; NSE symbol: PIRAMALFIN).

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क्यों किया गया मर्जर (Why the Merger Was Done)

इस मर्जर के दो मुख्य उद्देश्य थे:

  1. सिंप्लीफिकेशन (Simplification): दो समान काम करने वाली NBFCs को मिलाकर Piramal Group ने डुप्लिकेशन खत्म किया और एक मजबूत NBFC बनाई.

  2. रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance):RBI के नियमों के अनुसार “अपड लेयर एनबीएफसी” (Upper Layer NBFCs) के लिए लिस्टेड होना जरूरी है. मर्जर के बाद Piramal Finance इस शर्त को पूरा करती है.

अब पीरामल फाइनेंस एक सिंगल फाइनेंशियल यूनिट के तौर पर काम कर रही है, जिससे इसकी परफॉर्मेंस को निवेशक बेहतर तरीके से ट्रैक कर सकते हैं. पीरामल फाइनेंस के चेयरमैन आनंद पीरामल के मुताबिक इस मर्जर का उद्देश्य “करोड़ों लोगों के लिए वित्तीय पहुंच को आसान, भरोसेमंद और पारदर्शी बनाना है.” उनका कहना है कि “यह लिस्टिंग कंपनी के सफर में एक मील का पत्थर है, जिसके साथ कंपनी की अपने स्टेकहोल्डर्स के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ी है.”

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लिस्टिंग के बाद जबरदस्त रेस्पॉन्स (Piramal Finance Share Listing Response)

लिस्टिंग के दिन पीरामल फाइनेंस के शेयर का “डिस्कवर्ड प्राइस” 1,124 रुपये 20 पैसे था. लेकिन NSE पर यह 1,260 रुपये पर खुला और BSE पर 1,270 रुपये पर. शुक्रवार को शेयर का भाव 1,333 रुपये 45 पैसे तक पहुंच गया, दिन के अंत में यह करीब 1,323 रुपये पर बंद हुआ. यानी एक ही दिन में लगभग 18% का फायदा हुआ. इस जोरदार शुरुआत के बाद सोमवार को भी बाजार में निवेशकों ने इस पर भरोसा दिखाया और सोमवार को कंपनी के शेयर ने 1,400 रुपये का आंकड़ा भी छू लिया.

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कंपनी का फ्यूचर प्लान (Piramal Finance Future Plans)

कंपनी के MD और CEO जयराम श्रीधरन के मुताबिक “यह लिस्टिंग कंपनी के लिए एक नए चैप्टर की शुरुआत है, जिसमें स्केल, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इनोवेशन और कस्टमर-फर्स्ट एप्रोच पर फोकस रहेगा.” उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य FY28 तक 1.5 लाख करोड़ रुपये के AUM तक पहुंचना है. 

कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management) यानी AUM FY21 में 49,000 करोड़ रुपये था, जो FY26 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 91,477 करोड़ रुपये हो चुका है. इसका 82% पोर्टफोलियो रिटेल सेक्टर में है. आने वाले महीनों में पीरामल फाइनेंस की योजना 75 नई ब्रांच खोलने की है. कंपनी की फिलहाल 428 शहरों में 517 ब्रांच हैं.


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हर लिस्टिंग IPO से नहीं होती. कभी-कभी कंपनियां अपने ढांचे में बदलाव करके भी बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती हैं. पीरामल फाइनेंस की लिस्टिंग से यह भी पता चलता है कि कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को आसान बनाना (Corporate Simplification) निवेशकों के लिए पारदर्शिता और वैल्यू दोनों बढ़ा सकता है. इससे पहले हम एचडीएफसी लिमिटेड (HDFC Ltd) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के मर्जर में भी हमने ऐसा ही उदाहरण देख चुके हैं.

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