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Inactive Jan Dhan Accounts Updates 2025 : सरकार ने संसद में बताया 26% से ज्यादा जनधन खाते इनऑपरेटिव. (Image : india.gov.in)
PM Jan Dhan Scheme Latest Update : देश भर में खोले गए पीएम जनधन खातों की संख्या तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या ऐसे खातों की भी है जिनमें लंबे समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है. संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) में सोमवार को सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक देश भर में प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए कुल खातों की संख्या 57 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन इनमें 15 करोड़ से भी अधिक यानी 26.44% खाते इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय पड़े हैं. सरकार ने साफ किया है कि इन खातों को RBI के नियमों के तहत इनऑपरेटिव माना गया है और इनके मैनेजमेंट के लिए पूरी व्यवस्था भी मौजूद है.
PM Jan Dhan Scheme News : दो सांसदों ने पूछे अहम सवाल
लोकसभा में सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) और जून मलिहा (June Maliah) ने सरकार से प्रधानमंत्री जनधन योजना (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana) के तहत खोले गए खातों के बारे में कई अहम सवाल पूछे थे. इनमें यह जानकारी मांगी गई थी कि पिछले 5 साल के दौरान किस राज्य में कितने जन धन खाते इनऑपरेटिव (inoperative) यानी निष्क्रिय होने की वजह से बंद हुए हैं. सांसदों ने इन खातों के इन-ऑपरेटिव होने की वजह पूछने के साथ ही साथ यह भी जानना चाहा था कि इनमें कितने खाते ग्रामीण इलाकों के हैं और कितने सेमी-अर्बन यानी अर्ध-शहरी इलाकों के. साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि कितने जनधन खाते ऐसे हैं, जिनमें जमा रकम 500 रुपये से कम है.
सरकार ने क्या दिया जवाब
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इन सवालों के लिखित जवाब में बताया कि देश में कुल 57.07 करोड़ पीएम जनधन खाते मौजूद हैं, जिनमें से करीब 15.09 करोड़ खाते इनऑपरेटिव श्रेणी में आते हैं. इसका मतलब यह है कि इन खातों में पिछले दो साल या उससे ज्यादा समय से ग्राहक द्वारा कोई लेन-देन नहीं किया गया है.
चौधरी ने बताया कि RBI के निर्देशों के अनुसार, “अगर किसी खाते में दो साल तक ग्राहक द्वारा कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया जाता, तो उसे इनऑपरेटिव या डॉर्मेंट श्रेणी में रखा जाता है.” यह नियम बचत खाते (savings account) और चालू खाते (current account), दोनों पर लागू होता है.
खाते इनऑपरेटिव क्यों होते हैं?
सरकार ने बताया कि खातों के इनऑपरेटिव होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. जिनमें लंबे समय तक खाते में लेन-देन न होना, कम बैलेंस, ग्राहक द्वारा खाते का सक्रिय रूप से इस्तेमाल न करना या खाते का किसी दूसरे बैंक में शिफ्ट हो जाना, जैसे कई कारण शामिल हैं.
इन्हीं सांसदों के एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि बंद पड़े या निष्क्रिय खातों की जो जानकारी सरकार के पास उपलब्ध है, उसमें महिलाओं के खातों, ग्रामीण और सेमी-अर्बन क्षेत्रों के खातों के अलग-अलग डिटेल उपलब्ध नहीं है. सरकार ने अपने जवाब में निष्क्रिय या बंद पड़े खातों का राज्यवार (State-wise) ब्योरा भी नहीं दिया है.
500 रुपये से कम बैलेंस वाले खातों का डेटा मौजूद नहीं
कई जनधन खातों में बैलेंस बहुत कम होता है. 500 रुपये से कम बैलेंस वाले ऐसे खातों की संख्या जानने के लिए भी संसद में सवाल पूछा गया था, लेकिन सरकार ने बताया कि 500 रुपये से कम बैलेंस वाले खातों की जानकारी उसके पास मौजूद नहीं है.
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10 साल पुरानी रकम कहां जाती है?
सरकार ने बताया कि रिजर्व बैंक (RBI) के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवायरनेस (Depositor Education and Awareness (DEA) Fund) से जुड़े नियमों के तहत, अगर कोई खाता लगातार 10 साल तक निष्क्रिय रहता है और उसमें मौजूद राशि क्लेम नहीं की जाती, तो यह रकम DEA फंड में ट्रांसफर कर दी जाती है.
सरकार ने स्पष्ट किया कि “जब कोई ग्राहक बाद में क्लेम करता है, तो बैंक ग्राहक को उसकी रकम, उस पर देय ब्याज समेत वापस करता है और फिर वह रकम RBI से क्लेम करता है.” यह इंतजाम खाताधारकों के पैसों की सुरक्षा के लिए किया गया है.
क्या ये खाते दोबारा ऑपरेटिव हो सकते हैं?
हां, बिल्कुल. सरकार ने बताया कि इनऑपरेटिव खातों को कभी भी दोबारा ऑपरेटिव किया जा सकते हैं. इसके लिए अकाउंटहोल्डर को केवल KYC प्रॉसेस पूरी करनी होती है. यह प्रॉसेस खाते के 10 साल पूरे होने के बाद भी लागू रहती है.
इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति का जनधन खाता लंबे समय से निष्क्रिय है, तो भी वह इसे आसानी से ऑपरेटिव करा सकता है और अपनी रकम हासिल कर पहुंच सकता है.
निष्क्रिय खातों में जमा पैसे क्या सरकार जब्त करती है?
इस सवाल के जवाब में सरकार ने साफ किया कि किसी भी इनऑपरेटिव खाते में पड़ी रकम को सरकार जब्त नहीं करती है. यह रकम उसी ग्राहक के नाम पर सुरक्षित रहती है, जिसे ग्राहक KYC अपडेट करने के बाद निकाल सकते हैं.
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