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PM SVANidhi : स्वनिधि योजना में रेहड़ी पटरी वालों को मिल रहा बिना गारंटी 90,000 रुपये तक लोन और ढेरों बेनिफिट

स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों को बिना गारंटी 90 हजार रुपये तक का लोन तीन चरणों में मिल रहा है. साथ ही लाभार्थियों को केंद्र सरकार की 8 वेलफेयर योजनाओं से भी जोड़ा गया है. यहां डिटेल देखें.

स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों को बिना गारंटी 90 हजार रुपये तक का लोन तीन चरणों में मिल रहा है. साथ ही लाभार्थियों को केंद्र सरकार की 8 वेलफेयर योजनाओं से भी जोड़ा गया है. यहां डिटेल देखें.

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FE Hindi Desk
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PM SVANidhi Scheme Narendra Modi

9 दिसंबर 2025 तक 47 लाख से अधिक रेहड़ी–पटरी वालों और उनके परिवारों की प्रोफाइलिंग पूर्ण की जा चुकी है और 1.46 करोड़ से अधिक योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है. (Screenshots : YT/Narendramodi)

रेहड़ी-पटरी वाले शहरों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन पहचान की कमी, बैंक लोन तक सीमित पहुंच, तय वेंडिंग जगह न होना और सामाजिक सुरक्षा से दूर रहने जैसी कई मुश्किलों का सामना करते हैं. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए जून 2020 में प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि यानी पीएम स्वनिधि योजना शुरू की गई थी, ताकि कोरोना से प्रभावित स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी के लोन देकर उनका कारोबार दोबारा शुरू कराया जा सके और उन्हें सम्मानजनक पहचान मिल सके.

इस साल 27 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिवनेट ने इस योजना की मियाद यानी डेडलाइन बढ़ाने और रिस्ट्रक्चर को मंजूरी दी, जिसके तहत योजना को 31 मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है. इस पर 7,332 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसके माध्यम से 1.15 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें 50 लाख नए लाभार्थी भी शामिल हैं. हाल में रिस्ट्रक्चर किए स्वनिधि योजना के फायदों के बारे में एक नजर देखें.

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नई स्वनिधि योजना कैसे रेहड़ी पटरी वालों के लिए पहले से बेहतर 

रेहड़ी-पटरी वालों को ज्यादा और आसान मदद मिल सके इसके लिए स्वनिधि योजना में कई अहम बदलाव किए गए हैं. अब पहले चरण में मिलने वाला लोन 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये, दूसरे चरण में 20 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये और तीसरे चरण में 50 हजार रुपये तक कर दिया गया है. जो स्ट्रीट वेंडर्स दूसरा लोन समय पर चुका देते हैं, उन्हें यूपीआई लिंक रुपे क्रेडिट कार्ड भी दिया जाएगा, जिससे अचानक आने वाली व्यापार या निजी जरूरतों के लिए तुरंत पैसा मिल सके

  • डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक की सुविधा भी दी गई है, जिसमें रोजमर्रा की बिक्री पर सालाना 1200 रुपये तक (मंथली अधिकतम 100 रुपये) और थोक खरीद पर अलग से कैशबैक मिल सकता है. यानी 2,000 रुपये या उससे अधिक की थोक खरीद पर अधिकतम 400 रुपये तक का कैशबैक (प्रति लेन-देन 20 रुपये, प्रति तिमाही अधिकतम 100 रुपये)
  • यह योजना अब बड़े शहरों तक सीमित न रहकर धीरे-धीरे नगरों, सेमी-अर्बन इलाकों और कस्बों तक भी पहुंचाई जा रही है.
  • रोजगार, वित्तीय समावेशन और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने में इसके योगदान के लिए इस योजना को 2022 और 2023 में केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं.

राहत से विकास की ओर

कोरोना महामारी के दौरान साल 2020 में छोटे लोन की मदद के रूप में शुरू हुई पीएम स्वनिधि योजना अब सिर्फ राहत तक सीमित नहीं रही है. पुनर्गठन के बाद यह योजना रेहड़ी-पटरी वालों के पूरे विकास पर केंद्रित हो गई है. इसके जरिए उन्हें कारोबार बढ़ाने के लिए भरोसेमंद वित्तीय मदद मिलती है और लंबे समय तक आगे बढ़ने के मौके भी मिलते हैं.

यह योजना न केवल समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है, बल्कि स्ट्रीट वेंडर्स और उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने में भी मदद करती है, जिससे शहरों में एक मजबूत और आत्मनिर्भर व्यवस्था तैयार हो सके. इस योजना में उद्यमिता, वित्तीय समझ, डिजिटल लेन-देन की जानकारी और मार्केटिंग कौशल पर खास ध्यान दिया गया है, ताकि रेहड़ी-पटरी वालों की क्षमता बढ़ सके. इसके अलावा एफएसएसएआई के सहयोग से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि उनका कारोबार सुरक्षित और टिकाऊ बन सके.

सफल बनाने में स्थानीय सरकारों और बैंकों की अहम भूमिका

भले ही पीएम स्वनिधि योजना केंद्र सरकार की पहल है, लेकिन इसे जमीन पर सफल बनाने में राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों और बैंकों की अहम भूमिका होती है. राज्य सरकारें और नगर निकाय रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की पहचान करने, लोन प्रक्रिया आसान बनाने और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने में मदद करते हैं, जबकि बैंक समय पर लोन बांटने, ब्याज सब्सिडी देने और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने का काम करते हैं. इन सभी के मिलकर किए गए प्रयासों से यह योजना प्रभावी रूप से लागू हो पाती है.

‘स्वनिधि से समृद्धि’ घटक के तहत लोक कल्याण मेलों के जरिये रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और उनके परिवारों के कल्याण और विकास को तेज किया जा रहा है. इसका मकसद यह है कि उन्हें केंद्र सरकार की सभी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके और उनके समग्र विकास के लिए अनुकूल माहौल बने. इसी उद्देश्य से 17 सितंबर से 15 अक्टूबर 2025 के बीच सभी शहरी स्थानीय निकायों में लोक कल्याण मेले लगाए गए, जिनकी निगरानी एक समर्पित लोक कल्याण पोर्टल से की गई. इन मेलों के माध्यम से विक्रेताओं की भागीदारी बढ़ाई गई, ऋण आवेदन स्वीकार किए गए, त्वरित लोन वितरण किया गया और डिजिटल ऑनबोर्डिंग को भी सुनिश्चित किया गया.

रेहड़ी-पटरी वालों को 15,191 करोड़ का बिना गारंटी लोन

9 दिसंबर 2025 तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना के तहत अब तक 1.01 करोड़ से अधिक बिना गारंटी ऋण वितरित किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 15,191 करोड़ रुपये है, जिससे 69.66 लाख से ज्यादा रेहड़ी-पटरी विक्रेता लाभान्वित हुए हैं.

योजना का असर डिजिटल लेन-देन में भी साफ दिख रहा है, जहां 48.62 लाख स्ट्रीट वेंडर्स डिजिटल रूप से सक्रिय हो चुके हैं और 31 अक्टूबर 2025 तक 658 करोड़ डिजिटल लेन-देन किए गए, जिनकी कुल कीमत करीब 7.10 लाख करोड़ रुपये रही.

वहीं ‘स्वनिधि से समृद्धि’ पहल के तहत पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों और उनके परिवारों को पात्रता के आधार पर केंद्र सरकार की 8 कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है. इनमें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना, भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक पंजीकरण, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, वन नेशन वन राशन कार्ड, जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शामिल हैं. इस पहल का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और सरकारी लाभों से जोड़ना है.

9 दिसंबर 2025 तक, 47 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और उनके परिवारों की प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी है और 1.46 करोड़ से ज्यादा योजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है.

पीएम स्वनिधि योजना का विस्तार स्ट्रीट वेंडर्स के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे उन्हें बिना गारंटी बैंक से कर्ज, डिजिटल पेमेंट की सुविधा और अपनी क्रेडिट हिस्ट्री बनाने का मौका मिलता है. इस योजना से ठेला-पटरी वालों को असंगठित काम से निकलकर आत्मनिर्भर छोटे कारोबार की ओर बढ़ने में मदद मिलती है, साथ ही सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाता है. डिजिटल लेनदेन, वित्तीय समझ और लगातार सहयोग के जरिए यह योजना स्ट्रीट वेंडर्स और उनके परिवारों की आजीविका को ज्यादा सुरक्षित और मजबूत बनाने का काम कर रही है.

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