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Rupee vs Dollar : 90.21 पर बंद हुआ रुपया, अब तक का सबसे निचला स्तर, क्या है वजह और आगे के संकेत

Rupee closes at all-time low: रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 90.21 पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. रुपया पहली बार 90 का स्तर तोड़कर नीचे गया और दिन के कारोबार में 90.30 तक फिसला.

Rupee closes at all-time low: रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 90.21 पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. रुपया पहली बार 90 का स्तर तोड़कर नीचे गया और दिन के कारोबार में 90.30 तक फिसला.

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FE Hindi Desk
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Indian Rupee falls to record low 90.21 against US Dollar, currency market pressure

Rupee vs Dollar : डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट, 90.21 पर पहुंचा. (File Photo : Reuters)

Rupee breaches 90/dollar for first time; falls 25 paise to close at all-time low: रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.21 पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. पहली बार रुपया 90 के स्तर को तोड़कर नीचे गया और दिन में कारोबार के दौरान 90.30 तक फिसल गया. विदेशी फंड्स की लगातार निकासी, कच्चे तेल की बढ़ी कीमतें और भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर जारी असमंजस इसके पीछे मुख्य वजह बताई जा रही है. लोगों के मन में सवाल यह भी है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा क्या हो सकती है?

रुपयें में क्यों आई रिकॉर्ड गिरावट

बुधवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 89.96 पर खुला और दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद 90.30 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया. पिछले कुछ दिनों से विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग और बढ़ गई है. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत के इंपोर्ट बिल में इजाफे से जुड़ी चिंताओं को भी और गहरा किया है.

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तेल कीमतों और FII की बिकवाली का असर

मिरे एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा, “रुपया 90.30 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया, क्योंकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हो गई है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं. भारत-अमेरिका ट्रेड डील के एलान को लेकर अनिश्चितता भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है. हालांकि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने से रुपये में और तेज गिरावट नहीं हुई.” उन्होंने आगे कहा कि अगर FII के आउटफ्लो का रुझान बना रहा और क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंचाई पर बनी रहीं, तो रुपया आने वाले दिनों में हल्की कमजोरी के रुझान के साथ कारोबार कर सकता है. हालांकि डॉलर की कमजोरी और दिसंबर में यूएस फेड द्वारा ब्याज दर घटाए जाने की बढ़ती संभावनाओं की वजह से रुपये को निचले स्तरों पर सपोर्ट भी मिल सकता है. उन्होंने अनुमान जाहिर किया है कि आने वाले दिनों में डॉलर-रुपये का स्पॉट रेट (USD-INR spot price) 89.80 रुपये से 90.50 रुपये के बीच रह सकता है.

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RBI ने नहीं दिखाई तेजी

कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये में गिरावट को रोकने के लिए ज्यादा सक्रियता के साथ कदम नहीं उठाए हैं. फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली ने कहा, “आरबीआई ने रुपये को आसानी से 90 के स्तर से नीचे जाने दिया और यह 90.30 तक भी पहुंच गया. इसके बाद ही आरबीआई ने हस्तक्षेप किया.”

बाजार के माहौल ने भी बनाया दबाव

शेयर बाजार में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने भी रुपये को नीचे धकेला है. एक्सचेंज डेटा के मुताबिक मंगलवार को एफआईआई (FII) ने 3,642 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे डॉलर की मांग और बढ़ गई. सेंसेक्स भी 31.46 अंक गिरकर 85,106.81 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 46.20 अंक की गिरावट के साथ 25,986 पर रहा.

इस बीच, डॉलर इंडेक्स 0.20% गिरकर 99.16 पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 63.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. वहीं सीज़नली एडजस्टेड HSBC इंडिया सर्विसेज़ PMI बिज़नेस एक्टिविटी इंडेक्स नवंबर में बढ़कर 59.8 हो गया, जो अक्टूबर में 58.9 था. सर्विस सेक्टर के मजबूत PMI डेटा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती जरूर दिखाई, लेकिन रुपये को इससे राहत नहीं मिल सकी.

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क्या कह रहे हैं करेंसी मार्केट एक्सपर्ट 

एलकेपी सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी एंड करेंसी) जतिन त्रिवेदी ने कहा, “रुपया पहली बार 90 के नीचे गया है, और इसका मुख्य कारण भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता और डेडलाइन का बार-बार आगे खिसकना है. बाजार अब बड़े वादों से ज्यादा ठोस आंकड़े चाहता है, इसी वजह से पिछले कुछ हफ्तों में रुपये पर दबाव बढ़ा है.” उन्होंने आगे कहा कि मेटल्स और बुलियन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची कीमतों से भारत का इंपोर्ट बिल और बढ़ रहा है, जबकि अमेरिका की ऊंची टैरिफ पॉलिसी से एक्सपोर्ट को नुकसान हुआ है.

त्रिवेदी के मुताबिक “आरबीआई का सीमित हस्तक्षेप भी तेजी से गिरावट का कारण बना है. शुक्रवार की पॉलिसी से बाजार को यह संकेत मिलेगा कि आरबीआई भारतीय करेंसी को स्टेबल करने के लिए आगे कदम उठाएगा या नहीं. तकनीकी रूप से रुपया काफी कमजोर स्थिति में है और 89.80 के ऊपर लौटना जरूरी है, तभी कोई मजबूत रिकवरी दिख सकती है.”

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आगे कैसा रहेगा रुपये का रुझान 

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल रुपये पर दबाव बना रह सकता है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ऊंचे इंपोर्ट बिल और ट्रेड डील से जुड़ी अनिश्चितता इसे और नीचे धकेल सकती है. हालांकि दिसंबर में फेड द्वारा रेट कट की संभावना और डॉलर इंडेक्स की कमजोरी से रुपये को कुछ राहत मिल सकती है. बाजार की नजरें फिलहाल आरबीआई की अगली पॉलिसी और उसके दखल पर टिकी हैं.

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