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SBI PSU Fund ने 5 साल में 4.5 गुना कर दिए पैसे, कैसे कमाया इतना जबरदस्त मुनाफा? (AI Generated Image)
SBI Mutual Fund Equity Scheme : 5 साल में करीब 4.5 गुना हो गए निवेशकों के पैसे ! यह कमाल किया है SBI म्यूचुअल फंड की एक इक्विटी स्कीम ने. अगर किसी ने 5 साल पहले इस स्कीम में 1 लाख रुपये लगाए होंगे, तो आज उसकी फंड वैल्यू करीब 4.48 लाख रुपये हो चुकी होगी. इस थीमैटिक इक्विटी स्कीम का नाम है एसबीआई पीएसयू फंड (SBI PSU Fund) ने, जिसने पिछले पांच सालों में लंपसम रिटर्न के साथ ही साथ सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (Systematic Investment Plan) यानी SIP पर भी शानदार मुनाफा दिया है. खास बात ये है कि इस स्कीम ने इतना जबरदस्त रिटर्न मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों में पैसे लगाकर हासिल किया है. इस फंड की स्ट्रॉन्ग परफॉर्मेंस की मुख्य वजह है पिछले 5 साल में पब्लिक सेक्टर कंपनियों के शेयरों (PSU Stocks) की तेजी, जिसने निवेशकों की दौलत को कई गुना बढ़ा दिया है.
5 साल में 1 लाख से बने 4.48 लाख रुपये
SBI PSU फंड ने पिछले 5 साल में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने बाकी कई फंड्स को पीछे छोड़ दिया. फंड के डायरेक्ट प्लान का 5 साल का औसत सालाना रिटर्न (CAGR)34.92% रहा है.
इस रिटर्न का मतलब ये है कि अगर किसी निवेशक ने 5 साल पहले SBI PSU फंड में 1 लाख रुपये लगाए होंगे, तो आज उस निवेश की फंड वैल्यू 4,47,850 रुपये हो चुकी होगी. इस स्कीम ने 3 साल से लेकर 10 साल तक, हर अवधि में लंपसम इनवेस्टमेंट पर बेहतरीन रिटर्न दिए हैं.
SBI PSU फंड के डायरेक्ट प्लान का सालाना रिटर्न
3 साल में : 31.76% (CAGR)
5 साल में : 34.92% (CAGR)
10 साल में : 15.39% (CAGR)
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SIP पर 28% से ऊपर सालाना रिटर्न
SBI PSU फंड ने SIP पर भी पिछले 5 साल में बेहद शानदार रिटर्न दिए हैं. अगर किसी ने पिछले 5 साल में हर महीने इस स्कीम में 10,000 रुपये की SIP की होगी, तो उसकी फंड वैल्यू बढ़कर 12 लाख रुपये से ज्यादा गई होगी. जबकि इस दौरान उसने कुल 6 लाख रुपये ही निवेश किए होंगे. यानी निवेशकों के SIP के लगाए गए पैसे भी 5 साल में दोगुने से ज्यादा हो गए हैं. इसका कैलकुलेशन आप यहां देख सकते हैं :
SIP पर 5 साल का एन्युलाइज्ड रिटर्न : 28.77 %
10 हजार मंथली SIP से 5 साल में कुल निवेश : 6 लाख रुपये
10 हजार मंथली SIP की 5 साल में फंड वैल्यू : 12,18,043 रुपये
SBI PSU फंड की निवेश रणनीति
SBI म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund) की इस स्कीम का मकसद निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल ग्रोथ (Long-term capital growth) का मौका देना है. इसके लिए यह फंड PSU कंपनियों और उनकी सब्सिडियरीज़ में निवेश करता है.
नियमों के मुताबिक इस फंड के पोर्टफोलियो का कम से कम 80% हिस्सा पब्लिक सेक्टर कंपनियों के शेयरों में लगाया जाता है, जबकि बाकी 20% हिस्सा गैर-पीएसयू (Non-PSU) इक्विटी या डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जा सकता है.
पब्लिक सेक्टर कंपनियों के प्रदर्शन में हाल के वर्षों में बड़ा सुधार देखने को मिला है. सरकार की डिवेस्टमेंट नीतियां, डिविडेंड यील्ड में बढ़त, और मजबूत बैलेंस शीट ने PSU शेयरों को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है. SBI PSU Fund को इसी ट्रेंड की वजह से अपने पोर्टफोलियो में शामिल पीएसयू स्टॉक्स पर शानदार रिटर्न मिला है.
कहां लगा है सबसे ज्यादा पैसा?
SBI PSU फंड की टॉप होल्डिंग्स में भारत की प्रमुख सरकारी कंपनियां शामिल हैं. इन कंपनियों के शेयर हाल के वर्षों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, खासतौर पर एनर्जी, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी के कारण. 31 अक्टूबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक इस स्कीम की टॉप 10 होल्डिंग्स में शामिल कंपनियां हैं :
SBI PSU फंड की टॉप 10 होल्डिंग्स
State Bank of India : 16.28%
Bharat Electronics Ltd : 9.68%
NTPC Ltd : 8.58%
Power Grid Corporation of India : 8.34%
GAIL India Ltd : 8.24%
Bharat Petroleum Corp : 6.06%
Bank of Baroda : 5.36%
NMDC Ltd : 3.7%
Indian Bank : 3.65%
Oil India Ltd : 2.92%
SBI PSU फंड के बारे में जरूरी जानकारी
फंड टाइप : थीमैटिक इक्विटी फंड (Thematic Equity Fund)
बेंचमार्क इंडेक्स (Benchmark Index) : BSE PSU TRI
एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) : रेगुलर प्लान 1.85%, डायरेक्ट प्लान 0.85%
रिस्क लेवल (Riskometer) : बहुत अधिक (Very High)
एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) : 5715.33 करोड़ रुपये (31 अक्टूबर 2025 को)
फंड मैनेजर : रोहित शिंपी (Rohit Shimpi), जून 2024 से
(सोर्स : फंड फैक्टशीट, वैल्यू रिसर्च)
निवेश से पहले ध्यान रखें
हालांकि SBI PSU फंड ने पिछले 5 साल में निवेशकों को लंपसम और एसआईपी, दोनों में शानदार रिटर्न दिए हैं, लेकिन इन आंकड़ों को देखते समय ये ध्यान रखें कि इक्विटी फंड्स में पिछले रिटर्न के आगे भी जारी रहने की गारंटी नहीं होती है. यही वजह है कि ऐसे फंड्स को आमतौर पर रिस्कोमीटर (Riskometer) पर "बहुत अधिक रिस्क" की रेटिंग मिलती है. उसमें भी थीमैटिक और सेक्टोरल फंड्स को खास तौर पर ज्यादा रिस्की माना जाता है. यानी ऐसे फंड्स को हाई रिस्क, हाई रिटर्न इनवेस्टमेंट कहा जा सकता है. इसलिए इनमें पैसे लगाने का फैसला करने से पहले निवेशकों को अपने रिस्क प्रोफाइल को ध्यान में रखना चाहिए.
(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का मकसद सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सलाह देना नहीं. निवेश का कोई भी फैसला अपने इनवेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह-मशविरा करने के बाद ही करें)
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