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SBI Research की रिपोर्ट के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपये में अब तक की सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है. (AI Generated Image)
SBI Research report on Indian Rupee Vs Us Dollar | Falling Rupee Value : इतिहास में पहली बार 1 साल से कम वक्त में दिखी 5 रुपये की गिरावट ! यह जानकारी एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट में दी गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में जितनी तेज गिरावट हाल के दिनों में देखने को मिली है, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई थी. एक डॉलर के भाव को 85 से 90 रुपये तक पहुंचने में इस बार सिर्फ 349 दिन लगे, जबकि इससे पहले डॉलर-रुपये के एक्सचेंज रेट में 5 रुपये का अंतर आने में इससे काफी अधिक वक्त लगता रहा है.
5 रुपये की गिरावट में कब कितना लगा वक्त
रुपये में इससे पहले सबसे तेज गिरावट तब देखी गई थी, जब एक डॉलर का भाव 70 से 75 रुपये तक पहुंचने में 581 दिन यानी करीब 19 महीने लगे थे. वहीं, 1 डॉलर का भाव 65 से 70 रुपये तक पहुंचने में तो पूरे 1815 दिन यानी 5 साल से भी ज्यादा वक्त लगा था. वहीं, 1 डॉलर का रेट 75 से 80 रुपये तक पहुंचने में 917 दिन (ढाई साल) और 80 से 85 रुपये तक पहुंचने में 819 दिन यानी 2 साल से ज्यादा वक्त लगा था.
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1 डॉलर का भाव 90 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने बाद सिर्फ 13 दिन में ही 91 रुपये पर पहुंच गया, जो इस तेज गिरावट के आगे भी जारी रहने का संकेत दे रहा है.
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रुपये में क्यों आ रही है तेज गिरावट
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही इस तेज गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो इनवेस्टमेंट (FPI) का भारी आउटफ्लो है. रिपोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक कैलेंडर इयर 2007 से 2014 (CY07-14) के दौरान देश में FPI का एवरेज नेट इनफ्लो 162.8 अरब डॉलर रहा था. इसके मुकाबले कैलेंडर इयर 2015 से 2025 (CY14-25 till date) में अब तक नेट इनफ्लो उससे काफी कम, सिर्फ 87.7 अरब डॉलर रहा है.
ट्रंप टैरिफ के बाद सबसे ज्यादा टूटा भारतीय रुपया
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2 अप्रैल 2025 को अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा दुनिया भर के कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ थोपे जाने के बाद से अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में 5.7% की गिरावट आई है. चिंता की बात ये है कि यह गिरावट दुनिया के किसी भी प्रमुख देश की करेंसी में इस दौरान आई गिरावट से ज्यादा है. यानी इस दौरान प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं (Major Economies) में सबसे ज्यादा गिरावट भारतीय करेंसी में ही आई है. इसके मुकाबले 2 अप्रैल से अब तक जापान की करेंसी में 3.3%, फिलीपींस की मुद्रा पेसो में 2.4 % और दक्षिण कोरिया की करेंसी में सिर्फ 1.2% की गिरावट ही देखी गई है.
ट्रंप टैरिफ के दौर में मजबूत हुई चीन समेत इन देशों की करेंसी
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक 2 अप्रैल 2025 से अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में आई 5.7% की गिरावट के उलट इसी दौरान चीन की करेंसी युआन 3.1% मजबूत हुई है. चीन की तरह ही इस दौरान ब्राजील की करेंसी में 2.6%, ब्रिटिश पाउंड में 3.3% और रूस के रूबल में 6.3% की मजबूती देखने को मिली. इतना ही नहीं, थाईलैंड की करेंसी में 7.8%, मलेशिया के रिंगिट में 8.2%, यूरो में 8.3% और दक्षिण अफ्रीका की करेंसी रैंड में तो सबसे अधिक, 11% की मजबूती दर्ज की गई है. इसी दौर में भारतीय करेंसी का 5.7% गिरना वाकई चिंता बढ़ाने वाला है.
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RBI के 30 अरब डॉलर के दखल के बावजूद तेजी से गिरा रुपया
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का फॉरेक्स रिजर्व जून 2025 में 703 अरब डॉलर था, जो 5 दिसंबर 2025 को खत्म सप्ताह में घटकर 687.2 अरब डॉलर पर आ गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस गिरावट की एक वजह एक्सचेंज रेट की उथल-पुथल को कम करने के लिए फॉरेक्स मार्केट में RBI की तरफ से दिया गया दखल (intervention) भी है. रिपोर्ट के मुताबिक RBI ने फॉरेक्स मार्केट में जून-सितंबर 2025 के दौरान करीब 18 अरब डॉलर और अक्टूबर में करीब 10 अरब डॉलर का दखल दिया. रिपोर्ट के अनुसार कुल मिलाकर ये दखल 30 अरब डॉलर के आसपास रहा है. इन आंकड़ों का एक मतलब ये भी हो सकता है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में 5.7% की गिरावट इस दखल के बावजूद आई है.
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