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Income Tax Planning : सीनियर सिटिजन कैसे कर सकते हैं मैक्सिमम टैक्स सेविंग? बहुत काम आएंगे ये टिप्स

Income Tax Planning : सीनियर और सुपर सीनियर सिटिजन के लिए टैक्स प्लानिंग की जरूरी टिप्स, मैक्सिमम टैक्स सेविंग करने वाले नियमों का कैसे उठाएं पूरा फायदा.

Income Tax Planning : सीनियर और सुपर सीनियर सिटिजन के लिए टैक्स प्लानिंग की जरूरी टिप्स, मैक्सिमम टैक्स सेविंग करने वाले नियमों का कैसे उठाएं पूरा फायदा.

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Viplav Rahi
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Senior citizen tax saving tips guide in India

Maximum Tax Saving for Senior Citizens : सीनियर सिटिजन कैसे ले कर सकते हैं मैक्सिमम टैक्स सेविंग. (AI Generated Image)

Senior citizen maximum tax saving guide in India : टैक्स प्लानिंग वैसे तो सभी लोगों के लिए जरूरी है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. सैलरी के तौर पर मिलने वाली रेगुलर इनकम बंद होने के बाद बढ़ती उम्र के कारण सेहत से जुड़े खर्च बढ़ने लगते हैं. ऐसे में टैक्स का बोझ ज्यादा अखरता है. अच्छी बात यह है कि सरकार भी सीनियर और सुपर सीनियर सिटिजन्स को कई तरह की राहतें देती है, जिनका सही इस्तेमाल करके टैक्स प्लानिंग की जा सकती है. आइए जानते हैं कि किस उम्र में कौन-सी टैक्स छूट मिलती है या किस नियम के तहत बुजुर्गों को ITR फाइलिंग से छुटकारा मिल सकता है और फाइलिंग के समय किन बातों का ध्यान रखने से आपकी टैक्स सेविंग मैक्सिमम हो सकती है.

सीनियर और सुपर सीनियर सिटिजन  

भारत में 60–79 साल की उम्र वाले लोग सीनियर सिटिजन (Senior Citizen) माने जाते हैं, जबकि 80 साल और उससे ज्यादा उम्र वालों को सुपर सीनियर सिटिजन (Super Senior Citizen) का दर्जा दिया जाता है. इन दोनों ही कैटेगरी को इनकम टैक्स से जुड़े नियम-कानूनों में कई राहतें दी गई हैं (Senior Citizens Tax Benefits). सरकार ने ऐसा इसलिए किया है, क्योंकि आमतौर पर इस उम्र में इनकम सीमित रह जाती है और मेडिकल खर्च बढ़ जाते हैं. 

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इन सीनियर्स को ITR फाइल करने की जरूरत नहीं

सरकार ने बहुत से बुजुर्ग टैक्सपेयर्स को टैक्स फाइलिंग (Income Tax Filing) में राहत दी है. जिन बुजुर्गों की उम्र 75 साल या उससे अधिक है और उनकी इनकम के सिर्फ दो ही सोर्स हैं - पेंशन और उसी बैंक से मिलने वाली इंटरेस्ट इनकम, तो उनके लिए ITR फाइल करना जरूरी नहीं है.
ऐसे बुजुर्गों को सिर्फ बैंक में एक डिक्लेरेशन देना होता है. बैंक उनकी सभी टैक्स छूट को देखते हुए सही TDS काटकर जमा कर देगा. जिसके बाद उनके लिए ITR फाइलिंग करना जरूरी नहीं होता.
यह ऑप्शन खास तौर पर उन बुजुर्गों को राहत देता है, जिन्हें अपनी उम्र और सेहत की वजह से टैक्स फाइलिंग करने में काफी दिक्कत होती है.

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कौन-सा ITR फॉर्म चुनें बुजुर्ग ? 

जो बुजुर्ग ऊपर दी गई कैटेगरी में नहीं आते या इसके दायरे में आने के बावजूद अपनी मर्जी से टैक्स रिटर्न भरना चाहते हैं, उनके लिए भी सही ITR फॉर्म भरना बेहद जरूरी है. अगर ऐसा न करें तो रिटर्न रिजेक्ट होने या नोटिस मिलने का खतरा रहता है. 

  • ITR-1 (Sahaj) उन बुजुर्गों को भरना चाहिए जिनकी इनकम 50 लाख रुपये तक है, इनमक कै सोर्स पेंशन है और सिर्फ एक ही घर हो.

  • ITR-2 तब चुनें जब आपकी इनकम का सोर्स तो पेंशन ही है, लेकिन ITR-1 की दूसरी शर्तें पूरी नहीं करते.

  • ITR-3 उन्हें भरना चाहिए जिन्हें बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम होती है.

  • ITR-4 (Sugam) प्रिज़म्पटिव बिजनेस इनकम वालों के लिए है.

सही फॉर्म चुनना सबसे पहला कदम होना चाहिए.

कौन-कौन से फॉर्म हमेशा काम आते हैं?

सीनियर सिटिजन के टैक्स रिकॉर्ड में कुछ डॉक्यूमेंट्स बेहद जरूरी होते हैं जैसे - Form 15H, Form 12BB, Form 16/16A, Form 26AS, AIS, Form 10E और Form 67 वगैरह. इनकी स्कैन कॉपी हमेशा अपने पास सुरक्षित रखें ताकि फाइलिंग के समय बार-बार खोजने की जरूरत न पड़े.

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हर साल करें दोनों रिजीम की तुलना

सीनियर सिटिजन्स को पुरानी और नई, दोनों ही टैक्स रिजीम में कुछ फायदे मिलते हैं. वित्त वर्ष 2024-25 (AY 2025-26) तक नई इनकम टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली मैक्सिमम रिबेट 25,000 थी, जो उन टैक्सपेयर्स के लिए थी, जिनकी सालाना टैक्सेबल इनकम 7 लाख रुपये से अधिक न हो. लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) के लिए न्यू टैक्स रिजीम में सालाना टैक्सेबल इनकम की ये लिमिट बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है. सैलरीड लोगों और पेंशनर्स के लिए 75 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर 12.75 लाख रुपये तक की इनकम पर ये सुविधा मौजूद है. साथ ही मैक्सिमम रिबेट बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी गई है. वहीं 80 साल या उससे ज्यादा उम्र वाले टैक्सपेयर्स के लिए ओल्ड टैक्स रिजीम में बेसिक एग्जम्प्शन लिमिट 5 लाख रुपये है.

 हालांकि अब ज्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए नई रिजीम ही बेहतर है, लेकिन ओल्ड रिजीम में कई ऐसे टैक्स बेनिफिट मिलते हैं, जो न्यू रिजीम में उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि बुजुर्ग टैक्सपेयर हर साल अपनी इनकम के हिसाब से दोनों रिजीम में बन रही टैक्स देनदारी चेक करके तय करें कि उनके लिए कौन सा ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद है.

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इन टैक्स बेनिफिट्स पर जरूर ध्यान दें

सीनियर सिटिजन्स को अपनी इनकम पर मैक्सिमम टैक्स सेविंग करने के लिए इन सेक्शन्स पर जरूर गौर करना चाहिए -

  • Section 80TTB के तहत बैंक/पोस्ट ऑफिस इंटरेस्ट पर 50,000 रुपये तक की छूट.

  • Section 80D में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक की कटौती.

  • Section 80DDB में बेहद जरूरी मेडिकल ट्रीटमेंट पर 1 लाख रुपये तक का क्लेम.

  • Section 24(b) में होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख रुपये तक की छूट (ओल्ड रिजीम में).

सीनियर सिटिजन्स को मिलने वाली खास रियायतें

80 साल या उससे अधिक उम्र वाले सुपर सीनियर अब भी पेपर ITR फाइल कर सकते हैं. उनके लिए ई-फाइलिंग अनिवार्य नहीं है.

ऐसे रेजिडेंट सीनियर सिटिजन्स के लिए एडवांस टैक्स भरना जरूरी नहीं है, जिनकी कोई बिजनेस इनकम नहीं है. 

बैंकों को यह निर्देश भी दिया गया है कि Form 15H जमा होने पर वे 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम पर TDS नहीं काटेंगे.

फाइलिंग से पहले ये चेकलिस्ट जरूर देखें

  • Form 26AS और AIS को मैच करें.

  • पुरानी और नए टैक्स रिजीम दोनों में अपनी टैक्स देनदारी चेक करें.

  • मेडिकल बिल, इंश्योरेंस रिसीप्ट और FD स्टेटमेंट तैयार रखें.

  • Form 15H, पेंशन सर्टिफिकेट और PAN-लिंक्ड बैंक डॉक्यूमेंट सुरक्षित रखें.

  • 194P लागू हो तो बैंक को डिक्लेरेशन दें.

  • सही ITR फॉर्म चुनकर समय पर रिटर्न फाइल करें.

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