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Silver ETFs ने 2025 में दिया 150% से ज्यादा रिटर्न, 2026 के लिए क्या हो रणनीति? (AI Generated Image)
Year Ender 2025 | Silver ETFs performance in 2025 | Silver Outlook 2026 : ये साल जिन दो एसेट्स के शानदार रिटर्न के लिए हमेशा याद रहेगा, वे हैं सोना और चांदी. कीमती मेटल्स में सोना हमेशा आगे रहा है, लेकिन 2025 में रिटर्न के मामले में चांदी ने बाज़ी मार ली है. बीते कई दशकों में ऐसा शायद ही देखा गया हो कि चांदी ने सोना ही नहीं, बल्कि लगभग हर बड़े एसेट क्लास को काफी पीछे छोड़ दिया है. हालांकि सोने के लिए भी 2025 का साल दशकों में सबसे मजबूत प्रदर्शन वाला रहा, लेकिन चांदी की चमक ने तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए. 2025 ने यह साफ कर दिया कि चांदी को सिर्फ “सोने का सस्ता विकल्प” समझना गलत है. इसकी चाल और ड्राइवर्स अलग हैं.
सिल्वर ETF का शानदार प्रदर्शन
वैल्यू रिसर्च पर मौजूद लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक चांदी में निवेश करने वाले सिल्वर ईटीएफ ने 2025 के साल में अब तक (YTD) करीब 158% का जबरदस्त रिटर्न दिया है, जबकि इसी दौरान गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) का YTD रिटर्न 79.44 % रहा है.
इस तेजी के दौरान ETF में निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी देखने को मिली. साल में कई बार ऐसा हुआ, जब गोल्ड और Silver ETF अपने इंडिकेटिव नेट एसेट वैल्यू यानी iNAV से ऊपर ट्रेड करते दिखे. इसका सीधा मतलब था कि डिमांड की रफ्तार सप्लाई से आगे निकल रही थी. हालांकि जैसे-जैसे बाजार में सप्लाई बेहतर हुई, ये प्रीमियम धीरे-धीरे कम भी हुए. लेकिन यह साफ दिख रहा है कि सिल्वर में निवेशकों की दिलचस्पी सिर्फ सेंटिमेंट्स पर आधारित नहीं है.
भारतीय निवेशकों का नजरिया
भारतीय निवेशकों ने 2025 में गोल्ड और सिल्वर ETF में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई है. इसकी सबसे बड़ी वजह ETF में निवेश का आसान और ट्रांसपेरेंट होना है. साथ ही इसकी लिक्विडिटी और रेगुलेटेड स्ट्रक्चर भी उन्हें आकर्षित कर रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि कीमतें जैसे-जैसे ऊपर गई हैं, वैसे-वैसे सिल्वर में निवेश करने वालों का रुझान फिजिकल मेटल की बजाय ETF की तरफ बढ़ा, जिसे उन्होंने एक रणनीतिक निवेश के तौर पर अपनाया है.
चांदी में इतनी तेजी क्यों आई?
चांदी की यह तेजी किसी संकट या डर की वजह से नहीं आई. यह तेजी पूरी तरह से डिमांड की कहानी है. आज चांदी सिर्फ गहनों या सिक्कों तक सीमित नहीं है. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर पावर, सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी इंडस्ट्री में चांदी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि चांदी की मांग अब सिर्फ निवेश से नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल ग्रोथ से भी जुड़ गई है.
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हाई रिटर्न, हाई वोलेटिलिटी
चांदी के साथ एक बात हमेशा से जुड़ी रही है. माना जाता है कि यह अगर सोने के मुकाबले ज्यादा तेज़ी से ऊपर जा सकती है, तो उतनी ही तेजी से नीचे भी आ सकती है.
जब ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी ट्रांजिशन को लेकर माहौल पॉजिटिव होता है, तो चांदी तेजी से रैली करती है. लेकिन जैसे ही ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ती है, इसमें उतनी ही तेज करेक्शन भी देखने को मिलता है.
अब कई बड़े मैन्युफैक्चरर्स स्पॉट मार्केट पर निर्भर रहने की बजाय सीधे माइनिंग कंपनियों से लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट कर रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि चांदी की डिमांड अब सिर्फ साइकल में नहीं चलने वाली, बल्कि धीरे-धीरे यह स्ट्रक्चरल भी होती जा रही है.
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2026 में किन बातों का रखें ध्यान
आगे का रास्ता पूरी तरह सीधा नहीं है. 2026 को लेकर कुछ उम्मीदें पहले से ही कीमतों में शामिल हो चुकी हैं. अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा तेज़ी से बढ़ती है, तो ब्याज दरों में कटौती टल सकती है. इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है और कीमती मेटल्स में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी दोनों पोर्टफोलियो के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. लेकिन शॉर्ट टर्म में, खास तौर पर चांदी में निवेश करने वालों को तेज झटकों के लिए भी तैयार रहना होगा. इसलिए सिल्वर ईटीएफ में निवेश करने वालों को अपनी रिस्क झेलने की क्षमता को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए. साथ ही यह भी याद रखें कि इनके पिछले रिटर्न बाजार पर आधारित रहे हैं, जिनके भविष्य में जारी रहने की गारंटी नहीं है. इसीलिए सिल्वर ईटीएफ को रिस्कोमीटर पर बहुत अधिक जोखिम (Very High Risk) की रेटिंग दी जाती है.
(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, निवेश की सिफारिश करना नहीं. निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार की राय लेने के बाद ही करें.)
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